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आज का दिन - 24 मार्च 2017 (भारतीय समयानुसार)
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भारतकोश हलचल

भारतकोश हलचल

मत्स्य जयन्ती (30 मार्च) गणगौर (30 मार्च) राजस्थान दिवस (30 मार्च) झूलेलाल जयन्ती (29 मार्च) चैत्र नवरात्र प्रारम्भ (28 मार्च) गुड़ी पड़वा (28 मार्च) संवत 2074 प्रारम्भ (28 मार्च) विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) पापमोचनी एकादशी (24 मार्च) विश्व क्षयरोग दिवस (24 मार्च) विश्व मौसम विज्ञान दिवस (23 मार्च) शहीद दिवस (23 मार्च) विश्व जल दिवस (22 मार्च) विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) विश्व कठपुतली दिवस (21 मार्च) अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस (21 मार्च) विश्व कविता दिवस (21 मार्च) शीतला पूजन, बासौड़ा (20 मार्च) विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) भानु सप्तमी (19 मार्च) नौचन्दी मेला, मेरठ (19 मार्च)


जन्म
गुरु अंगद देव (31 मार्च) रमा शंकर व्यास (31 मार्च) शीला दीक्षित (31 मार्च) मीरा कुमार (31 मार्च) कोनेरू हंपी (31 मार्च) देविका रानी (30 मार्च) भवानी प्रसाद मिश्र (29 मार्च) रोमेश भंडारी (29 मार्च) उत्पल दत्त (29 मार्च) गोरख प्रसाद (28 मार्च) लीला दुबे (27 मार्च) बनवारी लाल जोशी (27 मार्च) धीरेन्द्र नाथ गांगुली (26 मार्च) महादेवी वर्मा (26 मार्च) फ़ारुख़ शेख़ (25 मार्च) सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा (24 मार्च) हरिभाऊ उपाध्याय (24 मार्च)
मृत्यु
श्यामजी कृष्ण वर्मा (31 मार्च) मीना कुमारी (31 मार्च) गुरु हर किशन सिंह (30 मार्च) आनंद बख्शी (30 मार्च) मनोहर श्याम जोशी (30 मार्च) सियारामशरण गुप्त (29 मार्च) गुरु अंगद देव (28 मार्च) बंसीलाल (28 मार्च) सर सैयद अहमद ख़ाँ (27 मार्च) गणेशशंकर विद्यार्थी (25 मार्च) कमला प्रसाद (25 मार्च) नन्दा (25 मार्च)

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भारतकोश सम्पादकीय

भारतकोश सम्पादकीय -आदित्य चौधरी
सत्ता का रंग
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     शेरशाह सूरी जब दिल्ली की गद्दी पर बैठा तो कहते हैं कि सबसे पहले वह शाही बाग़ के तालाब में अपना चेहरा देखकर यह परखने गया कि उसका माथा बादशाहों जैसा चौड़ा है या नहीं !
जब शेरशाह से पूछा गया "आपके बादशाह बनने पर क्या-क्या किया जाय ?"
तब शेरशाह ने कहा "वही किया जाय जो बादशाह बनने पर किया जाता है!"
एक साधारण से ज़मीदार परिवार में जन्मा ये 'फ़रीद' जब हुमायूँ को हराकर 'बादशाह शेरशाह सूरी' बना तो उसने सबसे पहले यही सोचा कि उसका आचरण बिल्कुल बादशाहों जैसा ही हो। शेरशाह ने सड़कें, सराय, प्याऊ आदि विकास कार्य तो किए, लेकिन हिंदुओं पर लगने वाले कर 'जज़िया' को नहीं हटाया, क्योंकि अफ़ग़ानी सहयोगियों को ख़ुश रखना ज़्यादा ज़रूरी था। पूरा पढ़ें

पिछले सभी लेख घूँघट से मरघट तक शहीद मुकुल द्विवेदी के नाम पत्र

एक आलेख

एक आलेख
मौर्य कालीन भारत का मानचित्र

        मौर्य काल (322-185 ईसा पूर्व) भारत के इतिहास में अति महत्त्वपूर्व स्थान रखता है। ईसा पूर्व 326 में सिकन्दर की सेनाएँ पंजाब के विभिन्न राज्यों में विध्वंसक युद्धों में व्यस्त थीं। मध्य प्रदेश और बिहार में नंद वंश का राजा धननंद शासन कर रहा था। सिकन्दर के आक्रमण से देश के लिए संकट पैदा हो गया था। धननंद का सौभाग्य था कि वह इस आक्रमण से बच गया। यह कहना कठिन है कि देश की रक्षा का मौक़ा पड़ने पर नंद सम्राट यूनानियों को पीछे हटाने में समर्थ होता या नहीं। मगध के शासक के पास विशाल सेना अवश्य थी, किन्तु जनता का सहयोग उसे प्राप्त नहीं था। प्रजा उसके अत्याचारों से पीड़ित थी। असह्य कर-भार के कारण राज्य के लोग उससे असंतुष्ट थे। देश को इस समय एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी, जो मगध साम्राज्य की रक्षा तथा वृद्धि कर सके। विदेशी आक्रमण से उत्पन्न संकट को दूर करे और देश के विभिन्न भागों को एक शासन-सूत्र में बाँधकर चक्रवर्ती सम्राट के आदर्श को चरितार्थ करे। शीघ्र ही राजनीतिक मंच पर एक ऐसा व्यक्ति प्रकट भी हुआ। इस व्यक्ति का नाम था- 'चंद्रगुप्त मौर्य'। चंद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र 'बिन्दुसार' सम्राट बना। बिन्दुसार का पुत्र था 'अशोक महान' जिसका जन्म लगभग 304 ई. पूर्व में माना जाता है। ... और पढ़ें

पिछले आलेख होली विमुद्रीकरण

एक व्यक्तित्व

एक व्यक्तित्व
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        आर. के. लक्ष्मण को भारत के एक प्रमुख व्यंग-चित्रकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है। अपने कार्टूनों के ज़रिए आर. के. लक्ष्मण ने एक आम आदमी को एक व्यापक स्थान दिया और उसके जीवन की मायूसी, अँधेरे, उजाले, ख़ुशी और ग़म को शब्दों और रेखाओं की मदद से समाज के सामने रखा। लक्ष्मण के बड़े भाई आर. के. नारायण एक कथाकार तथा उपन्यासकार थे, जिनकी रचनाएँ 'गाइड' तथा 'मालगुडी डेज़' ने प्रसिद्धि की ऊँचाइयों को छुआ था। एक कार्टूनिस्ट के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करने के साथ ही लक्ष्मण ने महत्त्वपूर्ण लेखन भी किया। उनकी आत्मकथा 'टनल टु टाइम' उनकी लेखन क्षमता का प्रमाण सामने लाती है। आर. के. लक्ष्मण के कार्टूनों में एक आम आदमी को प्रस्तुत करती एक छवि जितनी सादगी भरी है, उतनी ही पैनी भी होती है। आर. के. लक्ष्मण को उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए पद्म भूषण, पद्म विभूषण, रेमन मेग्सेसे पुरस्कार आदि सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। ... और पढ़ें

पिछले लेख अबुलकलाम आज़ाद सी. डी. देशमुख

एक खेल

एक खेल
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         कबड्डी एक सामूहिक खेल है, जो प्रमुख रूप से भारत में खेला जाता है। कबड्डी नाम का प्रयोग प्राय: उत्तर भारत में किया जाता है, इस खेल को दक्षिण भारत में चेडु-गुडु और पूरब में हु तू तू के नाम से भी जानते हैं। भारत के साथ पड़ोसी देशों में भी कबड्डी बड़े पैमाने पर खेली जाती है। विभिन्न क्षेत्रों में इसके अलग-अलग नाम हैं। बांग्लादेश में हा-दो-दो; श्रीलंका में गुड्डु और थाईलैंण्ड में थीचुब। यद्यपि यह खेल थोड़ी भिन्नता के साथ खेला जाता है, पर शत्रु क्षेत्र में आक्रमण का मूलतंत्र सभी में समान रहता है। ...और पढ़ें

पिछला लेख → ओलम्पिक खेल क्रिकेट

एक नदी

एक नदी
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        नर्मदा नदी भारत के मध्यभाग में पूरब से पश्चिम की ओर बहने वाली एक प्रमुख नदी है, जो गंगा के समान पूजनीय है। नर्मदा का उद्गम विंध्याचल की मैकाल पहाड़ी शृंखला में अमरकंटक नामक स्थान में है। मैकाल से निकलने के कारण नर्मदा को 'मैकाल कन्या' भी कहते हैं। स्कंद पुराण में इस नदी का वर्णन 'रेवा खंड' के अंतर्गत किया गया है। कालिदास के ‘मेघदूतम्’ में नर्मदा को 'रेवा' का संबोधन मिला है, जिसका अर्थ है- पहाड़ी चट्टानों से कूदने वाली। अमरकंटक में सुंदर सरोवर में स्थित शिवलिंग से निकलने वाली इस पावन धारा को 'रुद्र कन्या' भी कहते हैं, जो आगे चलकर नर्मदा नदी का विशाल रूप धारण कर लेती हैं। पवित्र नदी नर्मदा के तट पर अनेक तीर्थ हैं, जहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इनमें कपिलधारा, शुक्लतीर्थ, मांधाता, भेड़ाघाट, शूलपाणि, भड़ौंच उल्लेखनीय हैं। अमरकंटक की पहाड़ियों से निकल कर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर नर्मदा क़रीब 1310 किमी का प्रवाह पथ तय कर भरौंच के आगे खंभात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। ... और पढ़ें

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

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महत्त्वपूर्ण आकर्षण

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स्वतंत्र लेखन

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समाचार

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₹500 और ₹1000 के नोटों का विमुद्रीकरण
कबड्डी विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम
भारतकोश संस्थापक श्री आदित्य चौधरी ‘भाषा दूत’ पुरस्कार से सम्मानित


कुछ लेख

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हिसार स्थित प्रसिद्ध अगरोहा मंदिर

अगरोहा मंदिर, हिसार, हरियाणा



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