अरसात सवैया  

अरसात सवैया 24 वर्णों का छन्द 7 भगणों और रगण के योग से बनता है। देव और दास ने इस छन्द का प्रयोग किया है।

  • "राधिका की रसरंग की दीपति, संग सहेली हँसी हहराइकै।" [1]
  • "सात घरीहुँ नहीं बिलगात, लजात ओ बात गुने मुसकात है।"[2]


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धीरेंद्र, वर्मा “भाग- 1 पर आधारित”, हिंदी साहित्य कोश (हिंदी), 741।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. देव  : शब्द रसायन, पृष्ठ 38, हास्य
  2. भिखारीदास ग्र., पृष्ठ 247

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