अर्थशास्त्र सामान्य ज्ञान 224  

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1. दो वस्तुओं के मध्य त्रियक या आड़ी मांग लोच के संबंध में भिन्न कथनों में से कौन सही है?

जब दो वस्तुएं पूर्ण स्थानापन्न हों तो आड़ी मांग लोच शून्य है।
जब दो वस्तुएं एक-दूसरे से पूर्ण स्वतंत्र हैं तो मांग की आड़ी लोच अनंत है।
जब दो वस्तुएं पूरक हैं तो मांग की आड़ी लोच धनात्मक है।
जब दो वस्तुएं संयुक्त रूप से मांगी जाती हैं तो मांग की आड़ी लोच ऋणात्मक होती है।
आड़ी लोच का विचार सबसे पहले थामस मूर ने दिया, किंतु रॉबर्ट टिफिन ने इसका प्रयोग मूल्य सिद्धांत में किया। आड़ी लोच (मांग की)=A वस्तु की मांग में आनुपातिक परिवर्तन/B वस्तु की मूल्य में आनुपातिक परिवर्तन। 1. यदि मांग की आड़ी लोच का मान शून्य है तो ऐसी स्थिति में वस्तुएं स्वतंत्र होंगी। 2. यदि मांग की आड़ी लोच का मान ऋणात्मक है तो दोनों वस्तुएं परस्पर पूरक अवश्य होगी। 3. यदि मांग की आड़ी लोच का मान धनात्मक है तो दोनों वस्तुएं स्थानापन्न होंगी। 4. जब दोनों वस्तुएं पूर्ण स्थानापन्न तो मांग की आड़ी लोच का मान अनंत होना।

2. मांग की आड़ी लोच होती है-

सदैव धनात्मक
सदैव ऋणात्मक
स्थापानापन्न
संयुक्त मांग वाली वस्तुओं में ऋणात्मक
मांग की आड़ी लोच: एक वस्तु की मांग में जो परिवर्तन दूसरी के मूल्य में परिवर्तन के परिणामस्वरूप होता है उसे मांग की आड़ी लोच कहा जाता है। [मांग की आड़ी लोच= A वस्तु की मांग में % परिवर्तन/A वस्तु की मांग में % परिवर्तन]। अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य- 1. स्थानापन्न वस्तुओं के संबंध में मांग की आड़ी लोच धनात्मक होती है। पूरक वस्तुओं (संयुक्त मांग) के संबंध में मांग की आड़ी लोच ऋणात्मक होती है। 2. मांग की आड़ी लोच बाज़ार विश्लेषण में प्रयुक्त होने वाली 4 लोचों में से एक है। शेष हैं- मांग की क़ीमत लोच, पूर्ति की क़ीमत लोच और मांग की आय लोच।

3. निम्नलिखित में से किस संदर्भ में पूर्ण प्रतियोगिता निश्चय ही एकाधिकार से श्रेष्ठतर होगी?

प्रवैशिक कुशलता
आवंटन कुशलता
प्रौद्योगिकीय कुशलता
स्थैतिक कुशलता
पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत संसाधनों का आवंटन सबसे बेहतर ढंग से होता है, जिससे समाज में अधिकतम संतुष्टि अथवा कल्याण की प्राप्ति होती है। आवंटन कुशलता का तात्पर्य यह है कि संसाधनों का आवंटन इस प्रकार से हो जिससे उत्पन्न उत्पादन का ढांचा (अर्थात विभिन्न वस्तुओं की मात्रा) ऐसा हो जो उपभोक्ताओं के अधिमानों के अनुकूल हो ताकि उनको अधिकतम संतुष्टि प्राप्त हो सके।

4. निम्न में से कौन-सा अर्थशास्त्री ब्याज के सिद्धांत से संबंधित नहीं है?

ए. मार्शल
के. विकसेल
आई. फिशर
एफ. लिस्ट
एफ. लिस्ट ब्याज के सिद्धांत से संबंधित नहीं हैं जबकि ब्याज के सिद्धांत से संबंधित अर्थशास्त्री हैं- ए. मार्शल (ब्याज का प्रतिष्ठिक सिद्धांत), सीनियर (ब्याज का उपभोग स्थगन सिद्धांत), बॉम वावर्क (ब्याज का बट्टा सिद्धांत), इरविंग फिशर (ब्याज का समय अधिमान्यता सिद्धांत), के. विकसेल (ब्याज का ऋण योग्य राशियों का सिद्धांत), हिक्स-हेंसन (ISLM मॉडल), ओहलिन, हेवेलर, रॉबर्डसन, वाइनर, नाइट, जे.वी. क्लार्क आदि।

5. बाज़ार क़ीमत है-

अल्पकालीन संतुलन क़ीमत
दीर्घकालीन संतुलन क़ीमत
स्वतंत्र बाज़ार में औसत क़ीमत
सभी बाज़ारों की औसत क़ीमत
बाज़ार क़ीमत वह क़ीमत है, जो समय के एक निश्चित बिंन्दु पर बाज़ार में वास्तव में प्रचलित होते हैं। यह सामान्य क़ीमत जो कि एक संभावित क़ीमत है, के चारों ओर घटती-बढ़ती है। बाज़ार क़ीमतों में जल्दी परिवर्तन होने की संभावना होती है। परंतु सामान्य क़ीमत दी गई परिस्थितियों में स्थिर रहती है।

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