अवमदिन  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • अवमदिन वह दिन है जब दो तिथियों का अन्त होता है।
  • निर्ण्यसिन्धु[1] में रत्नमाला से उद्धरण है-:
    "यत्रैकः स्पृशते तिथिद्वयावासानं वारश्चेदवमदिनं तदुक्तमार्यैः।"
  • किसी व्रत के आरम्भ के लिए इसका परिहार करना चाहिए क्योंकि यहाँ एक तिथि का क्षय है।


अन्य संबंधित लिंक

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. निर्ण्यसिन्धु 153
"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=अवमदिन&oldid=189493" से लिया गया