अहिच्छत्र

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अहिच्छत्र / अहिक्षेत्र

'सोऽध्यावसद्दीनमना: काम्पिल्यं च पुरोत्तमम्।
दक्षिणांश्चापि पंचालान् यावच्चर्मण्वती नदी।
द्रोणेन चैव द्रुपदं परिभूयाथ पातित:।
पुत्रजन्म परीप्सन् वै पृथिवीमन्वसंचरत्,
अहिच्छत्रं च विषयं द्रोण: समभिपद्यत'।[1]

'अहिच्छत्रं कालकूटं गंगाकूलं च भारत'।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महा. आदि., 137, 73-74-76
  2. शतपथ ब्राह्मण (13, 5, 4, 7
  3. वैदिक इंडेक्स 1,494
  4. संख्यावती
  5. एंशेंट जैन हिम्स पृ. 56
  6. ए क्लासिकल डिक्शनरी ऑफ़ हिन्दू माइथोलोजी एण्ड रिलीजन, ज्योग्रेफी, हिस्ट्री एण्ड लिटरेचर - सप्तम संस्करण

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