आदित्याभिमुख विधि  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • इस विधि में प्रातः स्नान के उपरान्त सायंकाल तक सूर्याभिमुख होकर खड़ा रहना चाहिए।[1]
  • किसी स्तम्भ से उठंग कर (सटे रहकर) महाश्वेता मन्त्र का जप करना चाहिए।
  • गन्ध, पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए।
  • दक्षिणा देकर भोजन करना चाहिए।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कृत्यकल्पतरु (व्रतखण्ड 18-19), हेमाद्रि व्रतखण्ड (2, 525-26), कृत्यरत्नाकर (494-495)।

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