आनन्तर्य व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह व्रत मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष तृतीया को प्रारम्भ करना चाहिए।
  • प्रत्येक पक्ष की द्वितीया को नक्त एवं तृतीया को उपवास एक वर्ष तक करना चाहिए।
  • प्रत्येक तृतीया को विभिन्न नाम से उमा की नैवेद्य से पूजा करनी चाहिए।
  • कर्ता को केवल रात्रि में भोजन करना चाहिए। जो विभिन्न तृतीयाओं में विभिन्न होता है।
  • यह व्रत नारियों के द्वारा व्यवस्थित रूप से किया जाता है।
  • यह अपने पुत्रों, मित्रों एवं सम्बन्धियों से अन्तर (अलगाव) को रोकता है, अतएव इसका ऐसा नाम है।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=आनन्तर्य_व्रत&oldid=138519" से लिया गया