आनन्द नवमी  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह व्रत फाल्गुन शुक्ल पक्ष नवमी को प्रारम्भ करना चाहिए।
  • इस व्रत को एक वर्ष के तक करना चाहिए।
  • इसमें पंचमी पर एक भक्त, षष्ठी पर नक्त, सप्तमी पर अयाचित, अष्टमी एवं नवमी पर उपवास करना चाहिए।
  • आनन्द नवमी व्रत में देवी की पूजा करनी चाहिए।
  • इसमें वर्ष का तीन भाग में विभाजन, चार मासों की प्रत्येक अवधि में देवी के नाम, पुष्पों एवं नैवेद्य में अन्तर हो जाता है।[1]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कृत्यकल्पतरु (व्रतखण्ड 299-301), हेमाद्रि (व्रत 1, 948-950, यहाँ 'अनन्दा' शब्द आया है)।

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