कच्छी भाषा  

कच्छी भाषा पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र की सीमा से घिरे कच्छ की भाषा है। 'कच्छ' भारत का सुदूर पश्चिमोत्तर प्राय:द्वीप है। आज यह गुजरात राज्य का एक ज़िला है। कच्छी भाषा एक नवीन भारतीय-आर्य भाषा है, जो भाषा साहित्य के दृष्टिकोण से सिंधी, काठियावाड़ी[1] और मारवाड़ी[2] से घिरी हुई है।[3]

गुजराती तथा सिंधी बोली से सम्बंध

भौगोलिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से कच्छी भाषा सिंध की भूमि से दूर है, लेकिन इसका गुजरात और गुजराती भाषा से गहरा संबंध है। इस प्रकार इसे सिंधी और गुजराती के बीच की बोली माना जाता है। इस भाषा को लिखने के लिए गुजराती लिपि का उपयोग होता है।

भाषा का स्वर

यह निश्चित है कि कच्छी भाषा का स्वर वैज्ञानिक मूल सिंधी में है, इसमें सिंधी की ही तरह ग़ैर भारतीय-आर्य अंत:स्फोटात्मक ध्वनियां[4] हैं। उल्लेखनीय है कि सिंध से काठियावाड़ तक का क्षेत्र संहत ध्वनि उच्चारण[5] क्षेत्र है। यह ध्वनि उच्चारण प्रक्रिया अंत:स्फोटात्मक ध्वनियों के लिए उपयुक्त है। वाक्य-विन्यास की दृष्टि से कच्छी भाषा में बड़ी संख्या में संयुक्त क्रियाओं का उपयोग होता है।

बोलियाँ

भौगोलिक दृष्टिकोण से कच्छी भाषा की तीन भिन्न बोलियाँ हैं-

  1. बन्नी
  2. मांडवी
  3. वगाडी

अन्य नवीन भारतीय-आर्य भाषाओं के समान ही जाति भेद और भौगोलिक वर्गीकरण के कारण अतिरिक्त बोलीगत विशेषताओं का जन्म होता है, जैसे- लोहाणा, भाटिया, खोजा और जैन बनिया बोलियाँ। हालांकि इस भाषा की अपनी लिपि नहीं है, लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से बताई गई लोक और भक्ति साहित्य की प्रचुरता है। कच्छी लोगों में भाषाशास्त्रीय आत्म चेतना का विकास हुआ है। पिछले तीन दशकों में इस भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने, नई लिपि का विकास करने और 'कच्छी साहित्य अकादमी' की शुरुआत करने, कच्छी साहित्य रचना को बढ़ावा देने, कच्छी भाषा में स्कूली पाठ्य पुस्तक की रचना एवं इस क्षेत्र के स्कूलों मे वैकल्पिक विषय के रूप में इस भाषा को लागू करने के लिए आंदोलन चल रहा है। व्यापक रूप से प्रसारित एक समाचार पत्र 'कच्छ-मित्र' ने आम लोगों में इस भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया है, जिससे इस भाषा के आंदोलन को मज़बूती मिली है।[3]


Seealso.jpg इन्हें भी देखें: गुजराती भाषा एवं गुजराती साहित्य


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. गुजराती की एक बोली
  2. राजस्थान की एक बोली
  3. 3.0 3.1 भारत ज्ञानकोश, खण्ड-1 |लेखक: इंदु रामचंदानी |प्रकाशक: एंसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली और पॉप्युलर प्रकाशन, मुम्बई |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 280 |
  4. मुंह में अचानक हवा अंदर खींचकर ध्वनि निकालना, बजाय इसके कि अधिक सामान्य वायु उच्छवासित की जाए।
  5. जिस प्रक्रिया में उच्च कंठ से ध्वनि उत्पन्न होती है।

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