कर्नाटक  

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कर्नाटक
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राजधानी बंगलोर
राजभाषा(एँ) कन्नड़ भाषा, तुळु भाषा, कोंकणी भाषा
स्थापना 1 नवंबर 1956
जनसंख्या 5,28,50,562[1]
· घनत्व 714 /वर्ग किमी
क्षेत्रफल 1,91,976 वर्ग किमी
भौगोलिक निर्देशांक 12°58′13″N 77°33′37″E
जलवायु उष्णकटिबंधीय
· ग्रीष्म 40 °C
· शरद 6 °C
ज़िले 30[2]
सबसे बड़ा नगर बंगलोर
मुख्य ऐतिहासिक स्थल मैसूर
मुख्य पर्यटन स्थल बैंगलोर, मैसूर
लिंग अनुपात 1000:965 ♂/♀
साक्षरता 66.60[2]%
· स्त्री 56.9%
· पुरुष 76.1%
राज्यपाल वाजूभाई रूदाभाई वाला[3]
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया [2]
विधानसभा सदस्य 224
विधान परिषद सदस्य 75
राज्यसभा सदस्य 12
बाहरी कड़ियाँ अधिकारिक वेबसाइट
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दक्षिण भारत में स्थित कर्नाटक भारत के बड़े राज्यों में से एक है। इस राज्य में अनेक इन्जीनियरिंग (अभियांत्रिकी) और मेडिकल (आयुर्विज्ञान) कॉलेज हैं। कर्नाटक के उत्तर में महाराष्ट्र, दक्षिण में केरल, दक्षिण-पूर्व में तमिलनाडु तथा पूर्व में आंध्र प्रदेश राज्य हैं। इसके पश्चिम में अरब सागर है। कन्नड़ यहाँ की मुख्य भाषा है। तुळु और कोंकणी भाषा भी बोली जाती हैं।

इतिहास

कर्नाटक राज्य का लगभग 2,000 वर्ष का लिखित इतिहास उपलब्ध है। कर्नाटक पर नंद, मौर्य और सातवाहन नामक राजाओं का शासन रहा। चौथी शताब्दी के मध्य से इसी क्षेत्र के राजवंशों बनवासी के कदंब तथा गंगों का अधिकार रहा। श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर की विशाल प्रतिमा गंग वंश के मंत्री चामुंडराया ने बनवायी थी, जो विश्व प्रसिद्ध है। बादामी के चालुक्य वंश (500-735 ई. तक) ने नर्मदा से कावेरी तक के विशाल भूभाग पर राज किया और पुलिकेशी द्वितीय (609-642 ई.) ने कन्नौज के शाक्तिशाली राजा हर्षवर्धन को हराया था। इस राजवंश ने बादामी, ऐहोल और पट्टादकल में अनेक सुंदर कलात्मक तथा कालजयी स्मारकों का निर्माण कराया था। इसमें कुछ मंदिर चट्टानों को तराशकर बनाए गए है। एहोल के मंदिर में वास्तुकला का विकास हुआ।

चालुक्यों के स्थान पर बाद में मलखेड़ के राष्ट्रकूटों ने (753-973 ई.) कन्नौज के वैभवशाली समय में भी वसूल किया। इसी समय कन्नड़ साहित्य का विकास प्रारम्भ हुआ। भारत के प्रमुख जैन विद्वान् यहाँ के राजाओं के दरबार की शोभा थे। कल्याण के चालुक्य राजा (973-1189 ई.) और उनके बाद हलेबिड के होयसाल शासकों ने कलात्मक मंदिरों का निर्माण करवाया। ललित कलाओं और साहित्य को बढावा दिया। विजयनगर साम्राज्य (1336-1646 ई.) ने इन्हीं परपंराओं का पालन करते हुए कला, धर्म, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु और तमिल साहित्य को बढावा दिया। उनके समय में व्यापार का भी बहुत विस्तार हुआ। अजीमुद्दौला को 1801 ई. में गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली (1798-1805 ई.) द्वारा कर्नाटक का नाम मात्र के लिए नवाब बनाया गया और उसे पेंशन दी।

बहमनी सुल्तानों और बीजापुर के आदिलशाहों ने सारासानी शैली में विशाल भवनों का निर्माण कराया। उर्दू, फ़ारसी के साहित्य की रचना इसी समय में हुई। इसके बाद पुर्तग़ाली अपने साथ नई फ़सलें जैसे- तंबाकू, मक्का, मिर्च, मूँगफली, आलू आदि लेकर आये और इनकी खेती प्रारम्भ हुई। पेशवा (1818) और टीपू सुल्तान (1799) की पराजय के बाद कर्नाटक ब्रिटिश शासन के अधीन हो गया। 19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों के कारण अंग्रेज़ी की शिक्षा, परिवहन, संचार और उद्योग में क्रान्तिकारी बदलाव आया और नगरों में मध्यम वर्ग का पनपना प्रारम्भ हुआ।

मैसूर राजवंश ने विकास की पहल की और औद्योगिकीकरण तथा सांस्कृतिक वृद्धि के लिए इन्हें अपनाया। आज़ादी की लड़ाई के समय कर्नाटक में एकता का अभियान चलाया गया। स्वतंत्रता मिलने पर 1953 में मैसूर राज्य का निर्माण हुआ, जिसमें कन्नड बहुल क्षेत्रों को साथ लेकर मैसूर राज्य का निर्माण 1956 में किया गया और इसे 1973 में कर्नाटक का नाम दिया गया। विजयनगर साम्राज्य के विघटन के दौरान अनेक हिन्दू जागीरदारों ने अपने स्वतन्त्र राज्य क़ायम कर लिये थे। इसी प्रकार का एक छोटा राज्य इक्केरी (बेदनूर) भी था। जो कि कर्नाटक के अंतर्गत आता है।

स्थापना दिवस

कर्नाटक राज्य की स्थापना 1 नवंबर, 1956 को हुई थी। इसलिये कर्नाटक का स्थापना दिवस प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है।

भूगोल

भौतिक रूप से कर्नाटक को चार भिन्न क्षेत्रों में बांटा गया है- समुद्रतटीय मैदान, पर्वत श्रेणियाँ (पश्चिम घाट), पूर्व में स्थित कर्नाटक का पठार और पश्चिमोत्तर में कपास उत्पाक काली मिट्टी का क्षेत्र। समुद्रतटीय मैदान मालाबार तट का विस्तार हैं और यहाँ जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से भारी वर्षा होती है। तट पर स्थित रेत के टीले भूमि की ओर बढ़ते हुए छोटे जलोढ़ मैदानों में बदल जाते हैं, जिनमें नारियल के वृक्षों से घिरे अनूप (लैगून) हैं। समुद्र के अलावा अन्य किसी भी मार्ग से तट पर पहुँचना मुश्किल है। पूर्व में पश्चिमी घाट की ढलानों के रूप भूमि तेज़ी से उठती है, जहाँ समुद्र तल से औसत ऊँचाई 760- 915 मीटर है। घाट की वनाच्छादित उच्चभूमि को मलनाड कहा जाता है; यह क्षेत्र एक जल- विभाजक भी है और इसके शीर्ष से मैदानों की ओर कई द्रुतगामी धाराएँ बहती हैं, जिनमें 253 मीटर ऊंचे जोग (जरस्पा) जलप्रपात वाली शरावती नदी भी शामिल है। अन्य नदियाँ लहरदार कर्नाटक के पठार से होकर बहती हैं, जिसकी हल्की ढलान पूर्व की ओर है। पठारी क्षेत्र की समुद्रतल से औसत ऊँचाई लगभग 457 मीटर है; सामान्यत: इसकी मिट्टी सरंध्र और अनुपजाऊ है। यहाँ बहने वाली नदियों के बेसिन की, जिसमें दक्षिण में कावेरी और उत्तर में कृष्णा की सहायक तुंगभद्रा शामिल हैं, मिट्टी चिकनी तथा कुछ हद तक उपजाऊ है। पुराने ज़माने से ही इस क्षेत्र में सिंचाई के जलाशयों के निर्माण के लिए छोटी धाराओं पर बाधं बनाया जाता रहा है और हाल के वर्षों में इनसे अधिकांश पनबिजली का विकास हुआ है। राज्य के पश्चिमोत्तर हिस्से में ज्वालामुखीय चट्टान के क्षेत्र रेगर में समृद्ध कपास की खेती वाली भारतीय काली मिट्टी पाई जाती है।

जलवायु

पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए पठार पर मलनाड ज़्यादा खुले क्षेत्र में परिवर्तित हो जाता है, जिसे मैदान कहते हैं, जहाँ कम वर्षा होती है और मॉनसूनी जंगलों का स्थान झाड़ीदार जंगल ले लेते हैं। मॉनसूनी जंगलों में वन्य जीवन समृद्ध है, जिसमें बाघ, हाथी, गौर और हिरन शामिल हैं। जंगली सूअर, भालू और तेंदुआ मैदानी क्षेत्र में रहते हैं। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में मोर सबसे आम है। कर्नाटक राज्य में डांडेली में वन्यजीव अभयारण्य और बांदीपुर और नगरहोल में राष्ट्रीय अद्यान हैं।

वन और वन्य जीवन

वन विभाग के पास राज्य के 20.15 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र का प्रबंधन है। वनों का वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है-

  1. सुरक्षित वन
  2. संरक्षित वन
  3. अवर्गीकृत वन
  4. ग्रामीण वन
  5. निजी वन
  • यहाँ 5 राष्ट्रीय पार्क और 23 वन्य जीव अभयारण्य है।
  • ईंधन की लकड़ी, चारा और इमारती लकड़ी के लिए जंगलों को विकसित किया जा रहा है।
  • प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसी अनेक योजनाएं केंद्रीय सहायता से लागू की जा रही हैं।
  • विदेशी सहायता से अनेक वन परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
  • जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन से कर्नाटक के लिए फारेस्ट मैनेजमेंट और बायो-डार्यवर्सिटी परियोजना चल रही है और यह पूरे राज्य कर्नाटक में 2005 - 06 से 2012 - 13 तक लागू करने की योजना है।

अर्थव्यवस्था

कर्नाटक की लगभग 70 प्रतिशत जनता कृषि कार्य में लगी है। तटीय मैदान में सघन खेती होती है, जहाँ प्रमुख खाद्यान्न चावल और प्रमुख नकदी गन्ना है। अन्य प्रमुख फ़सलों में ज्वार और रागी शामिल हैं। अन्य नकदी फ़सलों में काजू, इलायची, सुपारी और अंगूर प्रमुख हैं। पश्चिमी घाट की ठंडी ढलानों पर कॉफी और चाय के बागान हैं। पूर्वी क्षेत्र में सिंचाई के कारण गन्ने और अल्प मात्रा में रबड़ केलेसंतरे जैसे फलों की खेती संभव हो सकी है। पश्चिमोत्तर में मिलने वाली काली मिट्टी में कपास, तिलहन और मूंगफली की फ़सलें उगाई जाती है।

पश्चिम में मलनाड क्षेत्र के जंगलों में सागौन, चंदनबांस मिलते हैं और अन्य वनोपजों में चर्मरंजक गोद लाख (गोंद के जैसा पदार्थ, जिसका उपयोग वार्विश के निर्माण में होता है) शामिल हैं। अन्य वृक्षों में यूकलिप्टस और शीशम आते हैं। मैसूर नगर में चंदन के तेल का प्रसंस्करण होता है और यह राज्य की अग्रणी निर्यात सामग्री है।

खनिज

कुछ स्थानों पर कर्नाटक की उच्च खनिज भंडार वाली पूर्व कैंब्रियन युग की चट्टानें हैं, जो कम से कम 57 करोड़ वर्ष पुरानी हैं। कर्नाटक भारत में क्रोमाइट का सबसे बड़ा उत्पादन है; यह देश में मैग्नेसाइट उत्पादन दो राज्यों में से एक (दूसरा राज्य तमिलनाडु) है। उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क भंडार मुख्यत: चिकमगलूर और चित्रदुर्ग ज़िलों में हैं; अल्प मात्रा में अभ्रक ताम्र अयस्क, बॉक्साइट, रक्तमणि का भी खनन होता है। भारत में सोना इस क्षेत्र में स्थित कोलार स्वर्ण क्षेत्र से निकाला जाता है। राष्ट्रीयकृत हो चुकी सोने की प्रमुख खानें 2,743 मीटर तक गहरी हैं।

कृषि

कर्नाटक राज्य में लगभग 66 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है और 55.60 प्रतिशत जनता कृषि और इससे जुडे रोज़गारों में लगी है। राज्य की 60 प्रतिशत, लगभग 114 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। कुल कृषि योग्य भूमि के 72 प्रतिशत भाग में अच्छी वर्षा होती है, बाक़ी लगभग 28 प्रतिशत भूमि में सिंचाई की व्यवस्था है। राज्य में 10 प्रतिशत कृषि मौसमी क्षेत्र हैं। यहाँ की प्रमुख मिट्टी लाल मिट्टी है, फिर दूसरे स्थान पर काली मिट्टी है। आज्य की कुल भूमि का 51.7 प्रतिशत भाग राज्य का बुआई क्षेत्र है। वर्ष 2007-08 में लगभग 117.35 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ है।

उद्योग

राज्य के खनिज संसाधन, भद्रावती में लौह और इस्पात उद्योग और बंगलोर में भारी इंजीनियरिंग कारख़ाने को आधार प्रदान करते है। राज्य के अन्य उद्योगों में सूती वस्त्र की मिलें चीनी प्रसंस्करण, वस्त्र निर्माण, खाद्य सामग्री, बिजली की मशीनरी उर्वरक, सीमेंट और काग़ज़ उद्योग शामिल हैं। मैसूर शहर बंगलोर दोनों में प्राचीन काल से स्थापित रेशम उद्योग है, जहाँ भारत के मलबेरी रेशम का अधिकांश हिस्सा उत्पादित होता है। जोग जलप्रपात के पास स्थित शरावती परियोजना कर्नाटक के उद्योगों को बिजली प्रदान करने वाले अनेक जलविद्युत संयंत्रों में सबसे बड़ी है।

दुग्ध उत्पादन

  • कर्नाटक देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में से एक है।
  • कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के पास 21 प्रसंस्करण संयंत्र हैं जिनकी क्षमता लगभग 26.45 लाख लीटर प्रतिदिन है।
  • 42 प्रतिशत दुग्ध केंद्रों की क्षमता 14.60 लाख लीटर प्रतिदिन है।

बागवानी

  • राज्य के 16.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी होती है।
  • इसमें 101 लाख मी. टन उत्पादन होता है।
  • केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन’ के अंतर्गत 171.29 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

सिंचाई योजनाएँ

  • कर्नाटक राज्य में 28 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र में सिंचाई होती है।
  • 2006-07 के दौरान कुल 33.14 लाख हेक्टयेर भूमि की सिंचाई क्षमता थी जिसमें से 23.21 लाख हेक्टेयर बड़ी और 9.93 लाख हेक्टेयर लघु सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं।

बिजली उत्पादन

  • कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य है जहां पनबिजली संयंत्र स्थापित किए गए थे।
  • आज कर्नाटक की सकल बिजली उत्पादन की क्षमता 7222.91 है।
  • 2007-08 में 31229 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।

सूचना प्रौद्योगिकी

कनार्टक सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अतुलनीय है।

  • 2006-07 में यहाँ से 48700 करोड़ रुपए के सॉफ्टवेयर का निर्यात हुआ था।
  • 2007-08 में नवंबर, 2007 तक 24,450 करोड़ रुपए का निर्यात हो चुका था।
  • नैसकॉम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मैंगलौर और मैसूर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक गति से उन्नति कर रहे है।

जैव प्रौद्योगिकी

  • कनार्टक राज्य और विशेषकर बैंगलोर शहर देश का सबसे बड़ा जैव भंडार है।
  • 2006-07 के दौरान एस एल एल डब्ल्यूए ने तीन परियोजनाएं स्वीकृत की हैं, जिन पर 535.50 करोड़ रुपए का निवेश होगा।
  • जैव प्रौद्योगिकी का निर्यात 21.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा।

यातायात

  • कर्नाटक में रेलवे के नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 3089 किलोमीटर है।
  • कर्नाटक में हवाई अडडे बैंगलोर, मंगलोर, हुबली, बेलगांव, हंपी एवं बेलारी में उपलब्ध हैं जिनमें, बैंगलोर हवाई पट्टी से दूसरे देशों के लिए भी विमान सेवा उपलब्ध है। मैसूर एवं गुलबर्गा, बीजापुर, हासन एवं शिमोगा में इस वर्ष के अंत तक हवाई सेवाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
  • कर्नाटक में 11 बंदरगाह हैं, जिसमे नवीन मंगलोर बंदरगाह शामिल है जो एक मुख्य बंदरगाह है।
  • कर्नाटक में राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्गों की कुल दूरी क्रमश: 3973 किलोमीटर और 9829 किलोमीटर है।

सडकें

  • कनार्टक में 1971 में 83,749 कि.मी. लम्बी सड़कें थी जो 2007 में बढ़कर 2,15,849 कि.मी. हो गई।
  • 'कर्नाटक राजमार्ग सुधार परियोजना' में विश्व बैंक की मदद से 2,375 कि.मी. सड़क को उन्नत करने की योजना है जिसमें 900 कि.मी. का विकास तथा 1475 कि.मी. का पुन: र्निमाण योजित है। इसमें प्रांतीय राजमार्ग और ज़िला सड़कें शामिल हैं। इस पर लगभग 2,402.51 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह मदद सड़कों और पुलों के निर्माण और विकास के लिए ग्रामीण

विकास निधि के अंतर्गत की जा रही है।

बंदरगाह

कनार्टक राज्य में 155 समुद्री मील लगभग 300 किमी लंबे समुद्र तट पर केवल एक ही बड़ा बंदरगाह है - मंगलौर या न्यू मंगलौर। इसके अतिरिक्त 10 छोटे बंदरगाह है-

उच्च न्यायालय, कर्नाटक
  1. कारवाड
  2. बेलेकेरी
  3. ताद्री
  4. भत्काल
  5. कुंडापुर
  6. हंगरकट्टा
  7. मालपे
  8. पदुबिद्री
  9. होन्नावर
  10. पुराना मंगलौर
  • इन 10 बंदरगाहों में से केवल कावाड़ हर मौसम के लिए उपयुक्त है जबकि शेष नौ बंदरगाहों ऐसे नहीं है। इन बंदरगाहों से 2006-07 में मालवाहक जहाजों के द्वारा 6573 हज़ार टन माल ढोया गया।

उडड्यन

  • नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में बहुत विकास और वृध्दि हुई है।
  • 2006-07 में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में 50 प्रतिशत और अंतर्देशीय यात्रियों में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • राज्य के हवाई अड्डों से 2006-07 में 1.66 लाख टन माल ढोया गया। यह गत वर्ष से 19 प्रतिशत अधिक था।
  • बैंगलोर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश का पहला हरे-भरे मैदान वाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, यह बैंगलोर के पास देवनहल्ली में बनाया गया है। यात्री और मालवाहक हवाई जहाजों के लिए बनाये गये हवाई अड्डे की लागत लगभग 2000 करोड़ रुपए की है। यह हवाई अड्डा 28 मई 2008 से शुरू हो गया है। इस हवाई अड्डे के कारण से बैंगलोर शहर विश्व के लिए सरल गंतव्य बन गया है और यहाँ पर सुविधाएं सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हैं। सरकार ने शिमोगा और गुलबर्गा में हवाई अड्डे विकसित करने की योजना बनाई है।

शिक्षा

  • कर्नाटक , जिसकी आबादी का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा साक्षर है, भारत के शैक्षिक रूप से विकसित राज्यों में से एक है।
  • यहाँ बड़ी संख्या में विद्यालय और उच्च शिक्षा के संस्थान हैं, जिनमें मैसूर में विश्वविद्यालय, धारवाड़ स्थित कर्नाटक विश्वविद्यालय और गुलबर्गा व मंगलोर विश्वविद्यालय एवं शिमोगा स्थित कुवैंफ विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।
  • बंगलोर विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, ये सभी बंगलोर में स्थित हैं।
  • लगभग आधे स्कूल व संस्थान सरकार द्वारा प्रबंधित हैं और शेष का संचालन स्थानीय बोर्ड और निजी संस्थाएं करती हैं।
  • राज्य के अधिकांश शहरों और गांवों में अनिवार्य नि:शुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जाती है।

सांस्कृतिक जीवन

  • कर्नाटक में विभिन्न राजवंशों के योगदान के कारण एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत मौजूद है, जिसमें विभिन्न धर्मों और दर्शनों को बढ़ावा दिया गया है।
  • इन्होंने साहित्य, वास्तुशिल्प, लोकगीतों, संगीत, चित्रकला और लघु कलाओं पर अपना प्रभाव छोड़ा है।
  • मैसूर से 90 किमी दूर श्रवणबेलगोला नगर में मौर्य वास्तुशिल्प और मूर्तिशिल्प के उल्लेखनीय उदाहरण मिलते हैं, जैसे जैन मुनि बाहुबली (गोमतेश्वर) की लगभग 1,000 वर्ष पुरानी मानी जाने वाली विशालकाय प्रस्तर प्रतिमा।
  • विशाल आकार और एक ही चट्टान से तराशी गई जैन प्रतिमाएँ कन्नड़ संस्कृति की विशेषता है।
  • सातवीं शताब्दी के मन्दिरों के वास्तुशिल्प में चालुक्य और पल्लव वंशों का प्रभाव अब भी स्पष्ट है।
  • पश्चिमी शक्तियों के आगमन ने शहरी क्षेत्रों के आभिजात्य वर्ग को पश्चिमी वास्तुशिल्प और जीवन शैली से परिचित कराया।
  • इसी प्रकार मुस्लिम शासकों ने न सिर्फ़ इस्लाम की नींव रखी, बल्कि वास्तुशिल्प को भी प्रभावित किया।
  • कर्नाटक का पश्चिमी तटीय क्षेत्र काफ़ी हद तक ईसाई धर्म से प्रभावित है।

पर्यटन स्थल

श्रृंगेरी पीठ, शारदा, कर्नाटक
  • ‘एक राज्य - कई दुनियां’ के रूप में जाना जाने वाला कर्नाटक राज्य दक्षिण भारत का प्रमुख पर्यटन केंद्र बनता जा रहा है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी के केंद्र कनार्टक में हाल ही में बहुत से पर्यटक आते हैं।
  • 2005-06 की तुलना में 2006-07 में पर्यटकों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह राज्य अपने स्मारकों की विरासत और प्राकृतिक पर्यटन के रूप में प्रसिद्ध है।
  • 'स्वर्ण रथ', जिसका नाम दक्षिण भारत की विश्व धरोहर 'हंपी' के प्रस्तर रथ के नाम पर रखा गया है, प्राचीन धरोहरों, भव्य महलों, वन्यजीवन और सुनहरे समुद्र-तटों के बीच भ्रमण करेगा। मैसूर में श्रीरंगपटन, मैसूर के महल, नगरहोल राष्ट्रीय पार्क (कबीनी) की सैर कराते हुए 11वीं शताब्दी के 'होयसाला स्थापत्य' और विश्व धरोहर 'श्रवणबेल गोला, बेलूर, हलेबिड, हंपी' से होते हुए बदामी, पट्टदकल व ऐहोल की त्रिकोणीय धरोहर से होते हुए गोवा के सुनहरे समुद्र-तटों का अवलोकन कराते हुए अंत में यह बैंगलोर वापस आएगा।
  • मेगुती स्थान कर्नाटक राज्य के बीजापुर ज़िले में स्थित है। इस स्थान पर 634 ई. में चालुक्य वास्तुशैली में निर्मित एक महत्त्वपूर्ण जैन मंदिर है।

कर्नाटक में धरोहर वाले महल, घने वन और पवित्र स्थलों की भरमार है। ‘होम स्टे’ नामक नई अवधारणा ने राज्य में पर्यटन के नए आयाम जोड़ दिए हैं। हंपी और पट्टकल को विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया है।

संगनकल्लू

कर्नाटक के बेलारी ज़िले में स्थित संगनकल्लू से नव- पाषाणयुगीन तथा ताम्र- पाषाणयुगीन संस्कृतियों के प्रमाण मिले हैं। 1872 ई. में इस स्थल से घर्षित पाषाण कुल्हाड़ियाँ प्राप्त हुई हैं। 1884 ई. में इस स्थल के नजदीक एक पहाड़ी पर शैल चित्र तथा उकेरी गई मानव, हस्ति, वृषभ, पक्षी तथा तारों की आकृतियों की खोज की गई। इस क्षेत्र में दो राखी-ढेरियाँ पाई गई हैं। प्रथम राखी ढेरी के उत्खनन में तीन चरण अनावृत्त किए हैं।

वीरूपाक्ष मंदिर, हम्पी

नंजनगूड

नंजनगूड प्राचीन तीर्थनगर कर्नाटक में कावेरी की सहायक काबिनी नदी के तट पर मैसूर से 26 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह नगर 10वीं और 11वीं शताब्दी में गंग चोल वंश के समय से ही विख्यात रहा है। इस नगर में श्रीकांतेश्वर नंजुनदेश्वर (शिव) को समर्पित एक प्रसिद्ध मन्दिर है। सम्भवतः यह कर्नाटक का सबसे बड़ा मन्दिर है।

हम्पी

यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में शामिल हम्‍पी भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। 2002 में भारत सरकार ने इसे प्रमुख पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। हम्पी में स्थित दर्शनीय स्थलों में सम्मिलित हैं- विरुपाक्ष मन्दिर, रघुनाथ मन्दिर, नरसिंह मंन्दिर, सुग्रीव गुफ़ा, विट्ठलस्वामी मन्दिर, कृष्ण मन्दिर, प्रसन्ना विरूपक्ष, हज़ार राम मन्दिर, कमल महल तथा महानवमी डिब्बा आदि।

नई योजनाएं और उपलब्धियां

ई-गवर्नेंस

भूमि के काग़ज़ात की ऑन लाइन डिलीवरी योजना 2000 में शुरू हुई और 200 लाख काग़ज़ात की डिजिटलीकरण कर दिया गया है तथा ऑनलाइन म्यूटेशन की प्रक्रिया से तालुक स्तर पर कियोस्क में आर. टी. सी. को आसानी से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिनकी स्थापना इस प्रयोजन के लिए विशेष रूप से की गई है। अब यह निर्णय लिया गया है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर का उन्नयन किया जाए ताकि नए विशेषताओं और तकनीकी आधार को सुदृढ़ बनाया जा सके। नए भूमि सॉफ्टवेयर में सभी मौजूदा विशेषताओं को शामिल किया जाएगा जैसे कि कावेरी कार्यक्रमों, बैंकों, कचहरियों को जोड़ा जाएगा और इसमें नई विशेषताएं होंगी जैसे कि भूमि अधिग्रहण के मामलों को जोड़ना, गैर कृषि भूमि का दाख़िला ख़ारिज़ करना।

इसके अलावा ई-गवर्नेंस ने ‘बैंगलोर एक कार्यक्रम’ शुरू किया है, जो बहुसेवा केंद्र है जहां लोग बिजली, टेलीफ़ोन आदि के बिल जमा कर सकते हैं और एक ही जगह 25 अन्य सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। इसने ‘नेम्मादी’ नामक कार्यक्रम शुरू किया है। इसके अंतर्गत 765 ऐसे टेलीसेंटर हैं जहां आय, जन्म और मृत्यु के प्रमाण पत्र प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अलावा मानव संसाधन प्रबंधन सेवा भी विकसित की गई है, जो सभी विभागों की केन्द्रीय पहलों और सर्वाधिक सामान्य कार्यों के रूप में कार्य करती है।

भाग्यलक्ष्मी

स्त्री-पुरुष अनुपात को संतुलित करने और ग़रीब परिवारों को नैतिक संबल प्रदान करने के लिए कर्नाटक सरकार ने ‘भाग्यलक्ष्मी’ योजना शुरू की है। यह दो लड़कियों तक सीमित है और ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे सभी परिवारों के लिए है। लड़की के जन्म के समय उसके नाम से 10,000 रुपए जमा किए जाएंगे और ब्याज सहित 18 वर्ष पूरा हो जाने पर दिए जाएंगे।

दुर्गा मन्दिर, ऐहोल
  • 2007-08 के दौरान 1.31 लाख परिवारों के लिए 132.42 करोड़ रुपए जारी किए गए।
  • मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत 2008-09 के बजट में दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 1 लाख कर दिया गया है और इसके लिए 266.65 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।
मदीलु

यह एक अन्य योजना है जो माँ और शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए बनाई गई है। इसके तहत प्रसव के बाद माँ और शिशु की ज़रूरत का सामान दिया जाता है। यह सुविधा ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे सभी परिवारों के लिए है।

  • 2007-08 के दौरान इससे लगभग 1.50 लाख परिवारों को लाभ पहुंचा है।
  • 2006-07 में 63.82 प्रतिशत लाभान्वित प्रसव थे और
  • 2007-08 में यह संख्या 67.97 प्रतिशत रही।
भाग्यरथ

शिक्षा के लिए बेहतर पहुंच और इसे जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने यह योजना प्रारम्भ की है। इसके तहत सरकार और अनुदान प्राप्त स्कूलों में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले लड़के और लड़कियों को साइकिलें दी जाएंगी।

  • 2007-08 में ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों की 1.75 लाख लड़कियों और 2.33 लड़कों को साइकिलें बांटी गई।
  • वर्ष 2008-09 में यह योजना आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी वर्ग के बच्चों के लिए कर दी गई है। आशा है कि इससे 7 लाख से अधिक बच्चों को लाभ मिलेगा।


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वीथिका

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 2001 की जनगणना के अनुसार
  2. 2.0 2.1 2.2 मुख्यपृष्ठ (एच.टी.एम.एल) कर्नाटक की आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 14 मई, 2013।
  3. राज्यपाल (हिंदी) भारत की आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2014।

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