कैप्टन मोहन सिंह  

कैप्टन मोहन सिंह का 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' में बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इन्होंने 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' की स्थापना 15 दिसम्बर, 1941 ई. में की थी। बाद में इस फ़ौज़ का नेतृत्व सुभाषचन्द्र बोस को 21 अक्टूबर, 1943 ई. को सौंपा गया।

  • फ़रवरी 1942 ई. में भारतीय सेना ने सिंगापुर के 'फ़रैर पार्क' में जापानियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था।
  • इस समय ब्रिटिश सेना के अंग्रेज़ करनल हंट ने भारतीय सैनिकों को जापानियों के हवाले कर दिया।
  • जापानी सेना के मेजर फ़ूजीवारा ने भारतीय सैनिकों को एशियाई भाइयों की तरह संबोधित किया।
  • फ़ूजीवारा का कहना था कि भारतीय भी लम्बे समय से अंग्रेज़ों के अधीन जी रहे हैं।
  • इसके बाद ही कैप्टन मोहन सिंह ने अपने साथियों से कहा कि वो मातृभूमि की आज़ादी के लिए एक अलग सेना बनाएँ और जापानियों की मदद करें।
  • इसी के फलस्वरूप 1941 ई. में 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन कैप्टन मोहन सिंह के द्वारा किया गया।
  • अक्टूबर 1943 ई. को सुभाषचन्द्र बोस को फ़ौज का सर्वोच्च सेनापति बनाया गया।
  • फ़ौज के तिरंगे झण्डे के बीच में दहाड़ते हुआ शेर बनाया गया था, जो फ़ौज की वीरता का प्रतीक था।
  • 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' की तीन ब्रिगेड थीं, जिनका नाम- 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और 'जवाहर ब्रिगेड' था।
  • फ़ौज में महिला रेजिमेंट का नाम 'लक्ष्मीबाई रेजिमेंट' था।


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