खनीनेत्र  

खनीनेत्र हिन्दू पौराणिक ग्रंथ महाभारत के अनुसार राजा विविंश के पन्द्रह पुत्रों में से एक थे।

  • इक्ष्वाकु के सौ पुत्रों में से एक पुत्र विंश हुए तथा विंश के कल्याणमय पुत्र का नाम विविंश हुआ। विविंश के पन्द्रह पुत्र हुए। वे सब-के-सब धनुर्विद्या पराक्रमी, ब्राह्मणभक्त, सत्यवादी, दान-धर्मनारायण, शान्त और सर्वदा मधुर भाषण करने वाले थे। इन सब में जो ज्येष्ठ था, उसका नाम खनीनेत्र था। वह अपने उन सभी छोटे भाइयों को बहुत कष्ट देता था।
  • खनीनेत्र पराक्रमी होने के कारण निष्कण्टक राज्य को जीतकर भी उसकी रक्षा न कर सका, क्योंकि प्रजा का उसमें अनुराग न था। उसे राज्य से हटाकर प्रजा ने उसी के पुत्र सुवर्चा को राजा के पद पर अभिषिक्त कर दिया।


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महाभारत शब्दकोश |लेखक: एस. पी. परमहंस |प्रकाशक: दिल्ली पुस्तक सदन, दिल्ली |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 42 |


टीका टिप्पणी और संदर्भ

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