गिरगिट  

गिरगिट

गिरगिट सरीसृप परिवार कैमेलियोनटिडी का एक सदस्य है, यह पुराविश्व का एक समूह है। गिरगिट पेड़ों पर रहने वाली छिपकलियाँ, जो मुख्यत: अपने शरीर के रंग बदलने की क्षमता, युग्मित अंगुलिकाओं (विपरीत दिशा में दो या तीन के समुह में युग्मित); अग्र दंतमाला (जबड़े की छोर पर उगे दाँत) और एक लम्बी, पतली तथा फैल सकने वाली जीभ के लिए जानी जाती हैं। नकली गिरगिट या एनोल, जो नई दुनिया की इगुआनिडे परिवार की छिपकली को भी गिरगिट की संज्ञा दी जाती है।

प्रजातियाँ

असली गिरगिट दो जातियों वर्णित हैं: ब्रूकेसिया (19 प्रजातियाँ) और कैमेलियो (70 प्रजातियाँ)। इनमें से लगभग आधी प्रजातियाँ सिर्फ़ मैडागास्कर में पाई जाती है; अन्य प्रजातियाँ आमतौर पर अफ़्रीका में सहारा के दक्षिण में मिलती हैं। पश्चिमी एशिया में दो प्रजातियाँ पाई जाती हैं, एक दक्षिण भारत और श्रीलंका (भूतपूर्व सिलोन) में और दूसरी प्रजाति (यूरोपीय गिरगिट, कैमेलियो कैमलियॉन) निकट पूर्व से पश्चिम की ओर उत्तरी अफ़्रीका से लेकर दक्षिणी स्पेन तक पाई जाती है।

अधिकांश गिरगिट 17-25 सेमी लंबे होते हैं; अधिकतम लंबाई 60 सेमी तक हो सकती है। शरीर दोनों ओर से चपटा होता है; कुछ प्रजातियों में कभी-कभी घुमावदार पूछँ भी पाई जाती है। गिरगिट की बाहर ओर निकली हुई आँखें एक-दूसरे से भिन्न दिशा में घूम सकती हैं। कूछ गिरगिटों का सिर हेलमेट के आकार का होता है।

कुछ प्रजातियों के सिर पर सुस्पष्ट सजावट होती है, जिसमें सामने की ओर निकले हुए तीन तक सींग हो सकते हैं। ऐसी संरचनाएं अधिक स्पष्टता से या केवल नर गिरगिटों में ही पाई जाती हैं। कम से कम कुछ प्रजातियाँ तो अपने क्षेत्र की रक्षा करती हैं:

  • प्रमुख नर अपने शरीर को फैलाकर
  • अपने गले को फुलाकर और सिर की कलग़ियों को खड़ा कर या हिलाकर अपने इलाके में घुसने वाले दूसरे नर को चेतावनी देता है। अगर यह प्रदर्शन को रोकने में सफल नहीं होता, तो रक्षक उस पर हमला करता है और जबड़े चटकाता है।

विशेषता

प्रत्येक प्रजाति रगों की विशेष शृंखला में अपना रंग परिवर्तित कर सकती है। यह प्रक्रिया स्वचालित तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित रंग के कणों से भरी कोशिकाओं (मेलानोफ़ोर कोशिकाओं) में कणों के फैलाव या जमाना से होती है। कई गिरगिट तेज़ी से अपनी त्वचा पर उसके रंग से कम या ज़्यादा गहरे हरे, पीले, दूधिया या गहरे भूरे रंग के धब्बे डाल सकते हैं। रंग परिवर्तन प्रकाश और तापमान जैसे पर्यावरणीय कारकों, भय या दूसरे गिरगिट के साथ युद्ध में जीतने या पराजित होने से उत्पन्न भावनाओं से प्रभावित होता है। यह एक आम भ्रांति है कि गिरगिट पृष्ठभूमि से अपना रंग मिलाने के लिए रंग बदलते हैं।

भोजन

इनका प्रमुख भोजन कीट हैं, लेकिन बड़े गिरगिट पक्षियों को भी खा जाते हैं। अधिकांश प्रजातियाँ अंडे देती हैं और वृक्ष या झाड़ी पर अपने निवास स्थान से उतरकर एक बार में दो से चालीस तक अंडे, मिट्टी या सड़ती हुई लकड़ियों में दबा देती हैं। अंडों से बच्चे निकलने में तीन महीने का समय लगता है। दक्षिण अफ़्रीका की कुछ प्रजातियाँ बच्चों को ही जन्म देती हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ


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