जगजीवनदास  

दादूदयाल की शिष्य परंपरा में 'जगजीवनदास' या 'जगजीवन साहब' हुए जो संवत् 1818 के लगभग वर्तमान थे। ये 'चंदेल ठाकुर' थे और कोटवा, बाराबंकी के निवासी थे। इन्होंने अपना एक अलग 'सत्यनामी' संप्रदाय चलाया। इनकी बानी में साधारण ज्ञान चर्चा है। इनके शिष्य दूलमदास हुए जिन्होंने एक 'शब्दावली' लिखी। उनके शिष्य 'तोंवरदास' और 'पहलवानदास' हुए। तुलसी साहब, गोविंद साहब, भीखा साहब, पलटू साहब आदि अनेक संत हुए हैं। प्रयाग के 'वेलवेडियर प्रेस' ने इस प्रकार के बहुत से संतों की बानियाँ प्रकाशित की हैं।



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आचार्य, रामचंद्र शुक्ल “प्रकरण 2”, हिन्दी साहित्य का इतिहास (हिन्दी)। भारतडिस्कवरी पुस्तकालय: कमल प्रकाशन, नई दिल्ली, पृष्ठ सं. 73।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

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