जसवंत सिंह द्वितीय

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहां जाएं: भ्रमण, खोज
गणराज्य कला पर्यटन दर्शन इतिहास धर्म साहित्य सम्पादकीय सभी विषय ▼

घनन के घोर, सोर चारों ओर मोरन के,
अति चितचोर तैसे अंकुर मुनै रहैं।
कोकिलन कूक हूक होति बिरहीन हिय,
लूक से लगत चीर चारन चुनै रहैं
झिल्ली झनकार तैसो पिकन पुकार डारी,
मारि डारी डारी दु्रम अंकुर सु नै रहैं।
लुनै रहैं प्रान प्रानप्यारे जसवंत बिनु,
कारे पीरे लाल ऊदे बादर उनै रहैं


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

सम्बंधित लेख

-


निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
संक्षिप्त सूचियाँ
सहायता
सहायक उपकरण