जावा द्वीप  

जावा द्वीप इण्डोनेशिया गणराज्य में स्थित है। इस द्वीप का भारतीय इतिहास से बहुत निकट का सम्बंध रहा है। प्राचीन समय में इस द्वीप को 'यव द्वीप' कहा जाता था। भारत के कई ग्रंथों में जावा द्वीप का उल्लेख हुआ है। लगभग दो हज़ार वर्ष तक यहाँ हिन्दू सभ्यता का प्रभुत्व रहा। आज भी यहाँ हिन्दुओं की बड़ी बस्तियाँ पाई जाती हैं। विशेषकर पूर्व जावा में 'मजापहित' साम्राज्य के वंशज टेंगर लोग रहते हैं, जो अब भी हिन्दू हैं। 'बोरोबुदुर' और 'प्रमबनन मंदिर' यहाँ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं।

इतिहास

प्राचीन काल में जावा निकटवर्ती क्षेत्रों के समान हिन्दू राजाओं के अधीन था। हिन्दू राजाओं ने ही यहाँ बौद्ध धर्म का प्रचार किया था। यहाँ बहुत से हिन्दू एवं बौद्ध समुदाय के मंदिर तथा उनके अवशेष विद्यमान हैं। मैगेलांग के निकट 'बोरोबुदुर' मंदिर संसार का बृहत्तम बौद्ध मंदिर है। 14वीं-15वीं सदी में यहाँ मुस्लिम संस्कृति फैली और यहाँ मुसलमानों का राजनीतिक आधिपत्य हुआ। इसके बाद पुर्तग़ाली, डच एवं अंग्रेज़ व्यापारी आए, किंतु 1619 ई. से डचों ने राज्य प्रारंभ किया। 27 दिसम्बर, 1949 में इंडोनेशिया गणराज्य की स्थापना हुई, जिसमें जावा प्रमुख द्वीप है।

भौगोलिक स्थिति

जावा इंडोनेशिया गणराज्य में स्थित एक द्वीप है, जो मलाया द्वीप श्रृंखला में बृहत्तम तथा सर्वप्रसिद्ध है। इसका क्षेत्रफल 1,32,174 वर्ग मील है। इसके उत्तर में जावा समुद्र, दक्षिण में हिन्द महासागर और पूर्वं में बाली तथा पश्चिम में सुमात्रा द्वीप हैं, जो क्रमश: बाली तथा सुंडा जलडमरूमध्यों द्वारा जावा से अलग हो गए हैं। जावा की पूर्व से पश्चिम में लंबाई लगभग 960 कि.मी. तथा उत्तर से दक्षिण की अधिकतम चौड़ाई लगभग 200 कि.मी. है।

जावा द्वीप का निर्माण अधिकांशत: तृतीय कयुगीन चट्टानों द्वारा तथा अंशत: नवीनतर चट्टानों द्वारा हुआ है। केवल तीन स्थानों पर प्राचीनतर चट्टानें उपलब्ध होती हैं, जो संभवत: क्रिटेशस युग की हैं। जावा के भूगर्भ एवं धरातल पर 'प्लाइओसीन' तथा मध्य तृतीयक युगीन ज्वालामुखी उद्गारों का अधिक प्रभाव पड़ा है।

ज्वालामुखी

जावा में सौ से भी अधिक ज्वालामुखी पर्वत हैं, जिनमें से 13 अब भी सक्रिय अवस्था में हैं। यहाँ 20 से भी अधिक पर्वत-शिखरों की ऊँचाई 8000 फुट से अधिक है, जिनमें सेमेरू (12,060') सर्वोच्च है। इस द्वीप में भूकंप आते रहते हैं, लेकिन बहुत ही विरल। हिन्द महासागर में गिरने वाली नदियाँ छोटी और तीव्रगामी हैं। परंतु उत्तर में प्रवाहित होने वाली नदियाँ अपेक्षाकृत अधिक लंबी, धीमी गति वाली परिवाहनीय हैं।

कृषि

भारत के समान ही जावा भी कृषि प्रधान क्षेत्र है। रबर, गन्ना, चाय, कहवा तथा कोको यहाँ की व्यापारिक फ़सलें हैं, जो पहले बड़े बागानों में, किंतु अब छोटे खेतों में भी उगाई जाती हैं। संसार का कुल 90 प्रतिशत सिनकोना यहाँ पैदा होता है। नारियल की जटा, तेल, ताड़ का तेल और पटुआ भी निर्यात होते हैं। धान सर्वप्रमुख उपज और निवासियों का आहार है। सिंचाई की सहायता से इसकी दो फ़सलें उगाई जाती है। तंबाकू, मक्का, मटर, सोयाबीन और कसावा यहाँ की अन्य प्रमुख फ़सलें हैं।

उद्योग

खनिजों में कोयला और तेल का उत्पादन होता है। जावा के लोग लगभग तीस प्रकार की दस्तकारी के लिये प्रसिद्ध हैं। बड़े उद्योग अधिक नहीं हैं। जकार्ता, सुराबाया और सेमरांग में जहाज़ निर्माण का कार्य किया जाता है और साथ ही इनकी मरम्मत भी की जाती है। कपड़े, काग़ज़, दियासलाई, कांच और रासायनिक पदार्थो के भी कुछ कारखाने यहाँ की अर्थव्यवस्था का आधार हैं।


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