देवयात्रोत्सव  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • देव-मन्दिरों में यात्रोत्सव का सम्पादन कुछ निश्चित तिथियों में होता है[1], यथा—विनायक मन्दिर में चौथ पर, स्कन्द मन्दिर में षष्ठी पर, सूर्य मन्दिर में सप्तमी पर, दुर्गा मन्दिर में नवमी पर, उसी प्रकार लक्ष्मी, शिव, नागों एवं विश्वदेवों के मन्दिरों में क्रम से पंचमी, अष्टमी या चतुर्दशी, पंचमी, द्वादशी या पूर्णिमा पर होता है।
  • राजनीतिप्रकाश[2] ने इसके लिए वैशाख से लेकर आगे 6 मांसों तक देवों के मन्दिरों में व्यवस्था दही है, यथा—प्रथमा पर ब्रह्मा, तृतीया पर गंगा आदि।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. नीलमत पुराण (पृ0 83-84, श्लोक 1013-1017
  2. राजनीतिप्रकाश (पृ0 416-419

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