देवी व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह व्रत कार्तिक में होता है।
  • कर्ता केवल दूध एवं रात्रि में शाक सब्जी मात्र खाता है।
  • इसमें देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।
  • तिल से होम किया जाता है,- 'जयन्ती मंगला काली भदकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा धात्री स्वधा स्वाहा नमोस्तु ते।।' मन्त्र के साथ में जाप किया जाता है।
  • इससे सभी पापों, रोगों एवं भयों से मुक्ति हो जाती है।[1]
  • प्रकीर्णक व्रत, गौरी एवं शम्भु, जनार्दन एवं लक्ष्मी तथा सूर्य एवं उसकी पत्नी छाया की मूर्तियों की पूजा की जाती है।
  • श्वेत पुष्पों से सम्मान देने के उपरान्त धूप, घण्टी एवं दीप का दान किया जाता है।
  • इससे दिव्य रूप प्राप्त होता है।[2]
  • किसी भी मास की पूर्णिमा पर, कर्ता केवल दूध पर रहता है तथा गोदान करने से लक्ष्मी के लोक में पहुँचता है।[3]


अन्य संबंधित लिंक

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 775-776
  2. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 884
  3. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 239); कृत्यकल्पतरु (447-448

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