नरक पूर्णिमा  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • प्रत्येक पूर्णिमा या मार्गशीर्ष की पूर्णिमा पर आरम्भ होता है।
  • यह व्रत एक वर्ष के लिए किया जाता है।
  • उस दिन उपवास एवं विष्णु पूजा की जाती है।
  • तथा उनके नाम का जप या केशव से दामोदर तक 12 नामों का जाप 12 मासों में (मार्गशीर्ष से प्रारम्भ कर) होता है।
  • प्रत्येक मास में दक्षिणा के साथ एक जलपात्र एवं वस्त्रों का जोड़ा, यदि असमर्थ हों तो वर्ष के अन्त में ही ऐसा दान दिया जाता है।
  • इस व्रत से सुख मिलता है।
  • यदि मृत्यु के समय हरि का नाम लिया जाता है तो स्वर्ग मिलता है।[1]

 

अन्य संबंधित लिंक

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 166-167, विष्णुधर्मोत्तरपुराण से उद्धरण)।
"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=नरक_पूर्णिमा&oldid=140248" से लिया गया