भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ('कंट्रोलर एण्ड ऑडिटर जनरल' अर्थात् 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक') को आम तौर पर 'कैग' के नाम से जाना जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में 'कैग' का प्रावधान है, जो केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों और उनके द्वारा नियंत्रित संस्थानों के आय-व्यय की जाँच करता है। यही संस्था सार्वजनिक धन की बरबादी के मामलों को समय-समय पर प्रकाश में लाती है। सन 1948 में पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) वी. नरहरि राव बने थे।[1]

  • भारतीय संविधान के अनुसार भारत का एक नियंत्रक महालेखा परीक्षक होगा, जिसको राष्ट्रपति अपने सीलयुक्त हस्ताक्षर से अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा। उसे पद से केवल उन्हीं आधारों पर हटाया जाएगा, जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
  • प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नियंत्रक महालेखा परीक्षक नियुक्त किया जाता है, अपना पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिये गये प्रारूप के अनुसार शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा।
  • नियंत्रक महालेखाकार का वेतन और सेवा की अन्य शर्तें एसी होंगी, जो संसद विधि द्वारा अवधारित करे और जब तक वे इस प्रकार अवधारित नहीं की जाती हैं, तब ऐसी होंगी जो दूसरी अनुसूची में वर्णित हैं, परंतु नियंत्रक महालेखा परीक्षक के वेतन और अनुपस्थिति, छुट्टी, पेंशन या निव्रत्ति की आयु के संबंध में उसके अधिकारों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
  • नियंत्रक महालेखा परीक्षक अपने पद पर न रह जाने के पश्चात् भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी और पद पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
  • संविधान के और संसद द्वारा बनाई गयी किसी विधि के उपबंधों के आधीन रहते हुए, भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में सेवा करने वाले व्यक्तियों की सेवा शर्तें और नियंत्रक महालेखा परीक्षक की प्रशासनिक शक्तियाँ एसी होंगी, जो नियंत्रक महालेखा परीक्षक से परामर्श के पश्चात् राष्ट्रपति द्वारा बनाये गये नियमों द्वारा विहित की जाए।
  • नियंत्रक महालेखा परीक्षक के कार्यालय के प्रशासनिक व्यय, जिनके अंतर्गत इस कार्यालय की सेवा करने वाले व्यक्तियों को या उनके सम्बंध में सन्देय सभी वेतन, भत्ते और पेंशन हैं, भारत की संचित निधि पर भारित होंगे।[2]

कर्तव्य और शक्तियाँ

नियत्रक महालेखा परीक्षक संघ के और राज्यों के तथा किसी अन्य प्राधिकारी या निकाय के लेखाओं के सम्बन्ध में ऐसे कर्तव्यों का पालन और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जिन्हें संसद द्वारा बनाई गयी विधि द्वारा या उनके अधीन विहित किया जाए और जब तक इस निमित इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है, तब तक और संघ के और राज्यों के लेखाओं के संबंध में ऐसे कर्तव्यों का पालन और शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो इस संविधान के प्रारभ से ठीक पहले क्रमश: भारत डोमिनियन के और प्रांतों के लेखाओं के संबंध में भारत के महालेखा परीक्षक को प्रदत्त थीं या उनके द्वारा प्रयोक्त थीं।

संघ और राज्यों के लेखाओं का प्रारूप

संघ के और राज्यों के लेखाओं को ऐसे प्रारूप में रखा जाएगा, जो राष्ट्रपति भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की सलाह पर विहित करें।

प्रतिवेदन

  1. भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक, संघ के लेखाओं सम्बंधी प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।
  2. भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के किसी राज्य के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को उस राज्य के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको राज्य के विधान मंडल के समक्ष रखवाएगा।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारत की प्रमुख स्वतंत्र संस्थाएँ (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2012।
  2. 2.0 2.1 अधिदेश (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2012।

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