पहेली नवम्बर 2017  

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वर्ष 2018 >> जनवरी 2018

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1. जाने माने तबला वादक लच्छू महाराज का सम्बंध किस घराने से था?

एम. एस. गोपालकृष्णन
अल्ला रक्खा ख़ाँ
बनारस घराना
अहमद जान थिरकवा
लच्छू महाराज
'लच्छू महाराज' भारत के जाने माने तबला वादक थे। उन्होंने बनारस घराने की तबला बजाने की परम्परा को आगे बढ़ाया था। उनके कई शिष्य देश-विदेश में तबला बजा रहे हैं। लच्छू महाराज बेहद सादगी पसंद व्यक्ति थे, यही कारण था कि उन्होंने कभी कोई सम्मान ग्रहण नहीं किया। लच्छू महाराज ने अपने विकट अभ्यास के ज़रिये स्वतंत्र तबला वादक एवं संगत दोनों में ख्याति प्राप्त की। आप गायन, वादन एवं नृत्य तीनों की संगत में निपुण थे।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-लच्छू महाराज

2. 'विषकन्या' नामक उपन्यास किस महिला लेखिका द्वारा लिखा गया है?

आशापूर्णा देवी
शिवानी
अमृता प्रीतम
इस्मत चुग़ताई
शिवानी
'शिवानी' हिन्दी की सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थीं। हिंदी साहित्य जगत में शिवानी एक ऐसी शख्सियत रहीं, जिनकी हिंदी, संस्कृत, गुजराती, बंगाली, उर्दू तथा अंग्रेज़ी पर अच्छी पकड रही और जो अपनी कृतियों में उत्तर भारत के कुमायूँ क्षेत्र के आसपास की लोक संस्कृति की झलक दिखलाने और किरदारों के बेमिसाल चरित्र चित्रण करने के लिए जानी गई। महज 12 वर्ष की उम्र में पहली कहानी प्रकाशित होने से लेकर उनके निधन तक उनका लेखन निरंतर जारी रहा। शिवानी की अधिकतर कहानियां और उपन्यास नारी प्रधान रहे। इसमें उन्होंने नायिका के सौंदर्य और उसके चरित्र का वर्णन बडे दिलचस्प अंदाज में किया है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-शिवानी

3. रामायण के अनुसार सुग्रीव के बड़े भाई कौन थे?

बालि
हनुमान
जामवन्त
केसरी
'सुग्रीव' बालि का छोटा भाई और वानरों का राजा था। वह किष्किन्धा में रहता था। वह भगवान श्रीराम का भक्त तथा सखा था। सीताहरण के पश्चात् सीताजी को ढूँढते हुए जब श्रीराम किष्किन्धा पहुँचे, तब हनुमान ने ही सुग्रीव की मित्रता श्रीराम से करवाई थी। सुग्रीव का राज्य उसके बड़े भाई बालि ने छीन लिया था और उसकी पत्नी रूमा को भी अपने पास रख लिया था। श्रीराम ने बालि का वध कर सुग्रीव की पत्नी को मुक्त कराया और उसे किष्किन्धा का नया राजा बनाया। राम-रावण युद्ध में सुग्रीव ने श्रीराम की बहुत मदद की। सुग्रीव भगवान सूर्य के पुत्र कहे जाते हैं।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-सुग्रीव

4. 'एंड देन वन डेः अ मेमॉयर' किसकी आत्मकथा है?

विनोद खन्ना
गुलज़ार
नसीरुद्दीन शाह
जावेद अख़्तर
नसीरुद्दीन शाह
'नसीरुद्दीन शाह' प्रसिद्ध भारतीय सिने अभिनेता हैं। वे भारतीय फ़िल्म उद्योग के सबसे प्रतिभाशाली कलाकारों में से एक हैं। मुख्यधारा की व्यावसायिक सिनेमा से लेकर कला फ़िल्मों और नाटकों तक नसीरुद्दीन शाह ने अपने अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। नसीरुद्दीन शाह इस नाम का ज़िक्र होते ही एक ऐसे साधारण पर आकर्षक व्यक्तित्व की छवि सामने आती है, जिसकी अभिनय-प्रतिभा अतुलनीय है, जिसके चेहरे का तेज असाधारण है और हिन्दी सिनेमा में जिसके योगदान को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। 1981 में 'आक्रोश', 1982 में 'चक्र', 1984 में 'मासूम', 1985 में 'पार' तथा 'अ वेनस्डे' के लिए उन्हें 'फ़िल्म फेयर' के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के अवार्ड से सम्मानित किया गया था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-नसीरुद्दीन शाह

5. किस शास्त्रीय गायक की रिकॉर्डिंग को फ़्राँस सरकार ने यूनेस्को में प्रसारण के लिए चुना था?

ओंकारनाथ ठाकुर
राम चतुर मल्लिक
कुमार गंधर्व
गिरिजा देवी
राम चतुर मल्लिक
'राम चतुर मल्लिक' भारतीय शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद-धमार शैली के प्रसिद्ध गायक थे। उन्होंने ध्रुपद-धमार गायन शैली में सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त की थी और देश का नाम रोशन किया। राम चतुर मल्लिक ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और मैथिली लोकगीतों के अनुपम गायक थे। सन 1976 में फ़्राँस सरकार ने राम चतुर मल्लिक के ध्रुपद-धमार रिकॉर्ड को यूनेस्को प्रसारण के लिए चुना था। फ़्राँस के ही कुछ संगीत प्रेमी इनकी वीडियों रिकार्डिंग ले गये थे, जिस पर उन्होंने एक टैलीफ़िल्म तैयार की। फ़्राँस, जर्मनी तथा कोलम्बिया ने मल्लिक जी के दो रिकॉर्ड भी जारी किए थे।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-राम चतुर मल्लिक

6. स्वतंत्र भारत की पहली नदी घाटी परियोजना कौन-सी है?

नागार्जुन सागर परियोजना
दामोदर घाटी परियोजना
नर्मदा घाटी परियोजना
सरदार सरोवर परियोजना
दामोदर नदी, पश्चिम बंगाल
'दामोदर घाटी परियोजना' भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना है। 7 जुलाई, 1948 को स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में 'दामोदर नदी घाटी परियोजना' अस्तित्व में आई। यह परियोजना भारत की अधिकतर परियोजनाओं की तरह अमेरिका की ‘टेनेसी घाटी परियोजना' पर आधारित हैं, जो की जल-राशि का अधिकतम प्रयोग करने के लिये बनाई गयी है। दामोदर घाटी परियोजना भारत की ऐसी पहली परियोजना है, जहाँ कोयला, जल और गैस तीनो स्रोतों से विद्युत उत्पन्न की जाती है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-दामोदर घाटी परियोजना

7. 'खज्जियार' किस भारतीय राज्य का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है?

हिमाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश
उत्तराखण्ड
छत्तीसगढ़
खज्जियार
'खज्जियार' हिमाचल प्रदेश की चम्बा वैली में स्थित एक मनमोहक पहाड़ी स्थान है। चीड़ और देवदार के ऊँचे-लंबे, हरे-भरे पेड़ों के बीच बसा खज्जियार दुनिया के 160 मिनी स्विटजरलैंड में से एक है। यहाँ आकर पर्यटकों को आत्मिक शांति और मानसिक सुकून मिलता है। यदि अप्रैल के बाद मई-जून की झुलसाने वाली गर्मी से छुटकारा पाना हो तो यह स्थान पर्यटकों के लिए बिलकुल सपनों के शहर जैसा ही है। खज्जियार के मौसम में एक अलग ही मस्ती है, नजारों में अलग ही सौंदर्य है। यही कारण है कि आस-पास के लोग तो यहाँ पिकनिक मनाने के लिए आ ही जाते हैं, दूर-दूर से बार-बार आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम नहीं रहती।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-खज्जियार

8. भारत के किस शहर को 'डायमण्ड हार्बर' कहा जाता है?

मुम्बई
कोलकाता
चेन्नई
बेंगळूरू
कोलकाता के विभिन्न दृश्य
'कोलकाता' भारत के महानगरों में से एक तथा पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी है। कोलकाता का उपनाम डायमण्ड हार्बर भी है। यह भारत का सबसे बड़ा शहर है और प्रमुख बंदरगाहों में से एक हैं। कोलकाता का पुराना नाम कलकत्ता था। 1 जनवरी, 2001 से कलकत्ता का नाम आधिकारिक तौर पर कोलकाता हुआ। कोलकाता शहर बंगाल की खाड़ी के मुहाने से 154 किलोमीटर ऊपर को हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित है, जो कभी गंगा नदी की मुख्य नहर थी। यहाँ पर जल से भूमि तक और नदी से समुद्र तक जहाज़ों की आवाजाही के केन्द्र के रूप में बंदरगाह शहर विकसित हुआ। भारत के एक मुख्य आर्थिक केन्द्र के रूप में कोलकाता की जड़ें उसके उद्योग, आर्थिक एवं व्यापारिक गतिविधियों और मुख्य बंदरगाह के रूप में उसकी भूमिका में निहित है; यह मुद्रण, प्रकाशन और समाचार पत्र वितरण के साथ-साथ मनोरंजन का केन्द्र भी है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-कोलकाता

9. 'न्यूज ऑन सिनेमा' नामक पुस्तक के रचयिता कौन हैं?

दादा साहब फाल्के
सत्यजित राय
ऋषिकेश मुखर्जी
मृणाल सेन
मृणाल सेन
'मृणाल सेन' भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्माता व निर्देशक हैं। इनकी अधिकतर फ़िल्में बांग्ला भाषा में हैं। बंगाली, उड़िया, तेलुगु और हिंदी फ़िल्मों में समान रूप से सक्रिय रहे मृणाल सेन भारत में समानांतार सिनेमा आंदोलन के अग्रणी माने जाते हैं। कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) से भौतिकशास्त्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल रिप्रेंजेंटेटिव, पत्रकारिता और साउंड रिकॉर्डिंग सरीखे कई काम किये। फ़िल्मों में जीवन के यथार्थ को रचने से जुड़े और पढ़ने के शौकीन मृणाल सेन ने फ़िल्मों के बारे में गहराई से अध्ययन किया और सिनेमा पर कई पुस्तकें भी प्रकाशित कीं, जिनमें शामिल हैं- ‘न्यूज ऑन सिनेमा’ (1977) तथा ‘सिनेमा, आधुनिकता’ (1992)।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-मृणाल सेन

10. 'गाँधी व लेनिन' नामक पुस्तक के रचनाकार कौन थे?

श्रीपाद अमृत डांगे
फ़ख़रुद्दीन अली अहमद
जगजीवन राम
खंडू भाई देसाई
श्रीपाद अमृत डांगे
'श्रीपाद अमृत डांगे' का भारत के प्रारम्भिक कम्युनिस्ट नेताओं में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। श्रीपाद अमृत डांगे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्होंने 'गांधी व लेनिन' नामक पुस्तक भी लिखी थी, जिसमें इन दोनों नेताओं तथा उनके विचारों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाता है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-श्रीपाद अमृत डांगे

11. भारत में पहली बार पुलिस यूनियन का गठन किसने किया था?

किरण बेदी
सत्य नारायण सिन्हा
मनीराम बागड़ी
कांशीराम
मनीराम बागड़ी
'मनीराम बागड़ी' समाजवादी विचारधारा के प्रसिद्ध नेता थे, जो तीन बार (दूसरी, छठी और सातवीं) लोकसभा में संसद के सदस्य रहे थे। साधारण परिवार से संबंध रखने वाले मनीराम बागड़ी ने हमेशा कमेरे वर्ग की लड़ाई लड़ी। चाहे 'मुजारा आंदोलन' हो या अध्यापकों, किसानों और कर्मचारियों का आंदोलन, उनकी सभी में सक्रिय भागीदारी थी। वे ही एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने देश में पहली बार पुलिस यूनियन का गठन किया और 24 घंटे ड्यूटी देने के फैसले के ख़िलाफ़ लड़ाई जीती।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-मनीराम बागड़ी

12. प्रसिद्ध उपन्यास 'गुनाहों का देवता' किसके द्वारा लिखा गया था?

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
धर्मवीर भारती
जयशंकर प्रसाद
माखन लाल चतुर्वेदी
धर्मवीर भारती
'धर्मवीर भारती' आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वे साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के प्रधान संपादक भी रहे। डॉ. धर्मवीर भारती को 1972 में 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया। उनका उपन्यास 'गुनाहों का देवता' हिन्दी साहित्य के इतिहास में सदाबहार माना जाता है। धर्मवीर भारती के द्वारा संपादित 'धर्मयुग' पत्रकारिता की कसौटी बन चुका है। आज के पत्रकारिता के विद्यार्थी उनकी शैली को 'धर्मवीर भारती स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म' के नाम से जानते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, खेलकूद, साहित्यिक सभी पक्षों को समेटते हुए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर हर अंक में सामग्री दी जाती थी।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-धर्मवीर भारती

13. भारतीय इतिहास में 'समाचार पत्रों का मुक्तिदाता' किसे कहा गया है?

सर चार्ल्स मैटकाफ़
लॉर्ड कर्ज़न
रॉबर्ट क्लाइव
लॉर्ड विलियम बैंटिक
सर चार्ल्स मैटकाफ़
'सर चार्ल्स मैटकाफ़' 1835 से 1836 ई. भारत का गवर्नर-जनरल रहा। 1830 ई. में राजा राममोहन राय, द्वारकानाथ टैगोर एवं प्रसन्न कुमार टैगोर के प्रयासों से बंगाली भाषा में 'बंगदूत' का प्रकाशन आरम्भ हुआ था। बम्बई से 1831 ई. में गुजराती भाषा में 'जामे जमशेद' तथा 1851 ई. में 'रास्त गोफ़्तार' एवं 'अख़बार-ए-सौदागार' का प्रकाशन हुआ। लॉर्ड विलियम बैंटिक प्रथम गवर्नर-जनरल था, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण अपनाया। कार्यवाहक गर्वनर-जनरल चार्ल्स मेटकॉफ़ ने 1823 ई. के प्रतिबन्ध को हटाकर समाचार पत्रों को मुक्ति दिलवाई। यही कारण है कि उसे 'समाचार पत्रों का मुक्तिदाता' भी कहा जाता है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-सर चार्ल्स मैटकाफ़

14. 'गुलामगीरी' नामक पुस्तक के लेखक कौन थे?

दादाभाई नौरोजी
सुभाषचंद्र बोस
ज्योतिबा फुले
भीमराव आम्बेडकर
ज्योतिबा फुले
'ज्योतिबा फुले' महाराष्ट्र में सर्वप्रथम अछूतोद्धार और महिला शिक्षा का काम आरंभ करने वाले महान् भारतीय विचारक, समाज सेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। सन 1873 में महात्मा ज्योतिबा फुले ने 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी और इसी साल उनकी पुस्तक "गुलामगिरी" का प्रकाशन भी हुआ। दोनों ही घटनाओं ने पश्चिमी और दक्षिण भारत के भावी इतिहास और चिंतन को बहुत प्रभावित किया। महात्मा फुले की किताब 'गुलामगिरी' बहुत कम पृष्ठों की एक किताब है, लेकिन इसमें बताये गये विचारों के आधार पर पश्चिमी और दक्षिणी भारत में बहुत सारे आंदोलन चले।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-ज्योतिबा फुले

15. अर्थशास्त्र विषय में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम एशियाई व्यक्ति कौन हैं?

अमर्त्य सेन
रबीन्द्रनाथ ठाकुर
सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर
मदर टेरेसा
अमर्त्य सेन
'अमर्त्य सेन' अर्थशास्त्र के लिये सन 1998 का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई हैं। शांति निकेतन में जन्मे इस विद्वान् अर्थशास्त्री ने लोक कल्याणकारी अर्थशास्त्र की अवधारणा का प्रतिपादन किया है। अमर्त्य सेन ने कल्याण और विकास के विभिन्न पक्षों पर अनेक पुस्तकें तथा पर्चे लिखे हैं। प्रोफ़ेसर अमर्त्य सेन आम अर्थशास्त्रियों के सम्मान के समान नहीं हैं। वह अर्थशास्त्री होने के साथ-साथ, एक मानववादी भी हैं। इन्होंने अकाल, ग़रीबी, लोकतंत्र, स्त्री-पुरुष असमानता और सामाजिक मुद्दों पर जो पुस्तकें लिखीं हैं, वे अपने आप में बेजोड़ हैं।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-अमर्त्य सेन

16. किस शास्त्रीय गायक को "ख़याल गायकी का स्कूल" कहा जाता है?

कुमार गंधर्व
ओंकारनाथ ठाकुर
भीमसेन जोशी
बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ
भीमसेन जोशी
'भीमसेन जोशी' किराना घराने के महत्त्वपूर्ण शास्त्रीय गायक थे। उन्होंने 19 साल की उम्र से ही गायन शुरू कर दिया था और वे सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे। भीमसेन जोशी ने कर्नाटक को गौरवान्वित किया है। पण्डित भीमसेन जोशी को ख़याल गायकी का स्कूल कहा जाता है। संगीत के छात्रों को बताया जाता है कि ख़याल गायकी में राग की शुद्धता और रागदारी का सबसे सही तरीका सीखना है तो जोशी जी को सुनो। भीमसेन जोशी ने कन्नड़, संस्कृत, हिंदी और मराठी में ढेरों भजन और अभंग भी गाए हैं, जो बहुत ही लोकप्रिय हैं। भीमसेन जोशी ने पं. हरिप्रसाद चौरसिया, पं. रविशंकर और बालमुरलीकृष्णा जैसे दिग्गजों के साथ यादगार जुगलबंदियां की हैं।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-भीमसेन जोशी

17. किस भारतीय प्रधानमंत्री को पाकिस्तान की ओर से 'तहरीक़-ए-पाकिस्तान' का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ था?

मोरारजी देसाई
राजीव गाँधी
मनमोहन सिंह
विश्वनाथ प्रताप सिंह
मोरारजी देसाई
'मोरारजी देसाई' को भारत के चौथे प्रधानमंत्री के रूप में जाना जाता है। वह 81 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बने थे। इसके पूर्व कई बार उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की थी, परंतु असफल रहे। मोरारजी देसाई को गांधीवादी नीति का परम समर्थक माना जाता है, लेकिन इस नीति में उन्होंने क्षमा भाव को शायद स्वीकार नहीं किया था और न ही निजता के अहं का त्याग किया था। मोरारजी जो निर्णय कर लेते थे, उस पर क़ायम रहते थे। ब्रिटिश नौकरी छोड़कर जब वह स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही बने थे, तब भी अपनी अंतरात्मा पर ही निर्णय दिया था। मोरारजी देसाई एकमात्र ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री थे, जिन्हें भारत सरकार की ओर से 'भारत रत्न' तथा पाकिस्तान की ओर से 'तहरीक़-ए-पाकिस्तान' का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-मोरारजी देसाई

18. 'द सोशलिस्ट' नामक समाचार पत्र किसने प्रकाशित किया था?

सत्य नारायण सिन्हा
श्रीपाद अमृत डांगे
जगजीवन राम
शिवपूजन सहाय
श्रीपाद अमृत डांगे
'श्रीपाद अमृत डांगे' का भारत के प्रारम्भिक कम्युनिस्ट नेताओं में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। श्रीपाद अमृत डांगे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वे बम्बई (वर्तमान मुम्बई) के रहने वाले थे तथा उन्होंने भारत में समाजवादी विचारों के प्रसार करने के लिए 'द सोशलिस्ट' नामक समाचार पत्र भी प्रकाशित करना प्रारम्भ किया था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-श्रीपाद अमृत डांगे

19. 'मरो नहीं मारो' यह नारा किसके द्वारा दिया गया था?

लाल बहादुर शास्त्री
महात्मा गाँधी
भगतसिंह
मंगल पाण्डे
लाल बहादुर शास्त्री
'लाल बहादुर शास्त्री' प्रसिद्ध भारतीय राजनेता, महान् स्वतंत्रता सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। लाल बहादुर शास्त्री एक ऐसी हस्ती थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में देश को न सिर्फ सैन्य गौरव का तोहफा दिया बल्कि हरित क्रांति और औद्योगीकरण की राह भी दिखाई। "मरो नहीं मारो" का नारा "करो या मरो" का ही एक रूप था। गाँधीवादी सोच के चलते महात्मा गाँधी ने नारा दिया था- 'करो या मरो'। यह नारा उसी रात दिया गया था, जिस रात भारत छोड़ो आन्दोलन का आगाज़ हुआ। यह इसी नारे का असर था कि सम्पूर्ण देश में क्रान्ति की प्रचंड आग फ़ैल गई। ब्रिटिश शासन के खिलाफ इसे अगर एक हिंसक नारा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह नारा लाल बहादुर शास्त्री द्वारा 1942 में दिया गया, जो कि बहुत ही चतुराई पूर्ण रूप से 'करो या मरो' का ही एक अन्य रूप था तथा समझने में आत्यधिक सरल था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-लाल बहादुर शास्त्री

20. किस प्रसिद्ध इमारत का वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी था?

हुमायूँ का मक़बरा
बुलंद दरवाज़ा
ताजमहल
बीबी का मक़बरा
ताजमहल
'ताजमहल' आगरा, उत्तर प्रदेश राज्य, भारत में स्थित है। ताजमहल आगरा शहर के बाहरी इलाके में यमुना नदी के दक्षिणी तट पर बना हुआ है। ताजमहल मुग़ल शासन की सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। सफ़ेद संगमरमर की यह कृति संसार भर में प्रसिद्ध है और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। ताजमहल विश्‍व के सात आश्‍चर्यों में से एक है। इसके निर्माणकारों में केली ग्राफर अमानत ख़ान शिराजी थे। मक़बरे के पत्‍थर पर इबारतें कवि गयासु‍द्दीन ने लिखी हैं, जबकि ताजमहल के गुम्‍बद का निर्माण इस्‍माइल ख़ान अफ़रीदी ने टर्की से आकर किया। ताजमहल के मिस्त्रियों का अधीक्षक मुहम्‍मद हनीफ़ था, जबकि वास्तुकार का नाम उस्‍ताद अहमद लाहौरी था। ताजमहल की सामग्री पूरे भारत और मध्‍य एशिया से लाई गई थी। 1000 हाथियों के बेड़े की सहायता इस सामग्री को निर्माण स्‍थल तक लाने में ली गई। ताजमहल का केन्‍द्रीय गुम्‍बद 187 फीट ऊँचा है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-ताजमहल

21. भारत में 'श्वेत क्रांति का जनक' किसे माना जाता है?

डी. एन. खुरोदे
लक्ष्मीचंद जैन
वर्गीज़ कुरियन
एन. आर. नारायणमूर्ति
वर्गीज़ कुरियन
'वर्गीज़ कुरियन' भारत में दुग्ध क्रान्ति, जिसे 'श्वेत क्रान्ति' भी कहा जाता है, के जनक माने जाते हैं। भारत को दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए श्वेत क्रांति लाने वाले वर्गीज़ कुरियन को देश में सहकारी दुग्ध उद्योग के मॉडल की आधारशिला रखने का श्रेय जाता है। वर्गीज़ कुरियन ने 1949 में 'कैरा ज़िला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड' के अध्यक्ष त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल के अनुरोध पर डेयरी का काम संभाला। सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इस डेयरी की स्थापना की गयी थी। वर्गीज़ कुरियन ने महाराष्ट्र के 60 लाख किसानों की 60 हज़ार कोऑपरेटिव सोसायटियाँ बनाईं, जो प्रतिदिन तीन लाख टन दूध सप्लाई करती हैं। इसी को श्वेत क्रान्ति और ‘ओपरेशन फ़्लड’ के नाम से भी पुकारा जाता है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-वर्गीज़ कुरियन

22. किस क्रांतिकारी ने 'हसरत' उपनाम से कविताएँ लिखी हैं?

अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ
रामप्रसाद बिस्मिल
मुहम्मद अब्दुल बारी
सूफ़ी अम्बा प्रसाद
अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ
'अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ' को भारत के प्रसिद्ध अमर शहीद क्रांतिकारियों में गिना जाता है। देश की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने वाले अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे। 'काकोरी कांड' के सिलसिले में 19 दिसम्बर, 1927 को उन्हें फैजाबाद जेल में फाँसी पर चढ़ा दिया गया। अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ ऐसे पहले मुस्लिम थे, जिन्हें किसी षड्यंत्र के मामले में फाँसी की सज़ा हुई थी। अशफ़ाक़ कविता आदि भी किया करते थे। उन्हें इसका बहुत शौक़ था। उन्होंने बहुत अच्छी-अच्छी कवितायें लिखी थीं, जो स्वदेशानुराग से सराबोर थीं। कविता में वे अपना उपनाम हसरत लिखते थे। उन्होंने कभी भी अपनी कविताओं को प्रकाशित कराने की चेष्टा नहीं की। उनका कहना था कि- "हमें नाम पैदा करना तो है नहीं। अगर नाम पैदा करना होता तो क्रान्तिकारी काम छोड़ लीडरी न करता?"ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ

23. 'जिबोनेरे जलासोघोर' किस भारतीय पार्श्वगायक की आत्मकथा है?

राहुल देव बर्मन
मन्ना डे
भूपेन हज़ारिका
के. जे. येसुदास
मन्ना डे
'मन्ना डे' भारतीय सिनेमा जगत् में हिन्दी एवं बांग्ला फ़िल्मों के सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक थे। 1950 से 1970 के दशकों में उनकी प्रसिद्धि चरम पर थी। उनके गाए गीतों की संख्या 3500 से भी अधिक है। उन्हें 2007 के प्रतिष्ठित 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' के लिए चुना गया था। वर्ष 2005 में 'आनंदा प्रकाशन' ने बंगाली मन्ना डे की आत्मकथा "जिबोनेर जलासोघोरे" प्रकाशित की। उनकी आत्मकथा को अंग्रेज़ी में पैंगुइन बुक्स ने "Memories Alive" के नाम से छापा तो हिन्दी में इसी प्रकाशन की ओर से "यादें जी उठी" के नाम से प्रकाशित की। मराठी संस्करण "जिबोनेर जलासाघोरे" साहित्य प्रसार केंद्र, पुणे द्वारा प्रकाशित किया गया। मन्ना डे के जीवन पर आधारित "जिबोनेरे जलासोघोरे" नामक एक अंग्रेज़ी वृत्तचित्र 30 अप्रॅल, 2008 को नंदन, कोलकाता में रिलीज़ हुआ था।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-मन्ना डे

24. 'ढाई सीढ़ी की मस्जिद' मध्य प्रदेश में कहाँ स्थित है?

ग्वालियर
जबलपुर
भोपाल
इन्दौर
ढाई सीढ़ी की मस्जिद
'ढाई सीढ़ी की मस्जिद' भोपाल, मध्य प्रदेश के 'गाँधी मेडिकल कॉलेज' के समीप फतेहगढ़ क़िले के बुर्ज के ऊपरी हिस्से में है। इस मस्जिद का निर्माण दोस्त मोहम्मद ख़ान द्वारा करवाया गया था। सादे और साधारण स्थापत्य में निर्मित ढाई सीढ़ी की मस्जिद में इबादत स्थल तक जाने के लिये केवल ढाई सीढ़ियाँ ही है, इसलिये इसे 'ढाई सीढ़ी की मस्जिद' कहा जाता है। माना जाता है कि यह मस्जिद भोपाल की प्रथम मस्जिद है। पुराने शहर में बड़े तालाब के किनारे स्थित फतेहगढ़ क़िले की दीवारों पर चौकसी के लिये बने गुंबद पर इस मस्जिद में पहरेदार नमाज़ अदा किया करते थे।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-ढाई सीढ़ी की मस्जिद

25. भारत की आज़ादी के बाद किसकी अध्यक्षता में 'प्रजा सोशलिस्ट पार्टी' का गठन हुआ था?

अशोक मेहता
बिपिन चन्द्र पाल
ज़ाकिर हुसैन
मानवेन्द्र नाथ राय
अशोक मेहता
'अशोक मेहता' भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञों में से एक थे। वे समाजवादी नेता, सांसद तथा विचारक थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अशोक मेहता का योगदान था। देश को अंग्रेज़ी हुकूमत से आज़ाद कराने के लिए की जाने वाली क्रांतिकारी गतिविधियों में अशोक मेहता बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। वर्ष 1932 के बाद उन्हें कई बार जेल की सज़ा भोगनी पड़ी थी। इन जेल यात्राओं में उनका सम्पर्क अच्युत पटवर्धन और जयप्रकाश नारायण जैसे व्यक्तियों से हुआ था। देश की आज़ादी के बाद अशोक मेहता की अध्यक्षता में ही 'प्रजा सोशलिस्ट पार्टी' का गठन हुआ था। अशोक मेहता कुछ समय तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे थे।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-अशोक मेहता

26. 'आधुनिक भारतीय चित्रकला का जन्मदाता' किसे माना जाता है?

नंदलाल बोस
रबीन्द्रनाथ ठाकुर
अमृता शेरगिल
राजा रवि वर्मा
राजा रवि वर्मा
'राजा रवि वर्मा' भारत के विख्यात चित्रकार थे। उन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति के पात्रों का चित्रण किया। उनके चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता हिन्दू महाकाव्यों और धर्म ग्रंथों पर बनाए गए चित्र हैं। हिन्दू मिथकों का बहुत ही प्रभावशाली इस्‍तेमाल राजा रवि वर्मा के चित्रों में दिखता है। इस संग्रहालय में उनके चित्रों का बहुत बड़ा संग्रह है। आधुनिक भारतीय चित्रकला को जन्म देने का श्रेय राजा रवि वर्मा को जाता है। उनकी कलाओं में पश्चिमी रंग का प्रभाव साफ नजर आता है। उन्होंने पारंपरिक तंजावुर कला और यूरोपीय कला का संपूर्ण अध्ययन कर उसमें महारत हासिल की थी। उन्होंने भारतीय परंपराओं की सीमाओं से बाहर निकलते हुए चित्रकारी को एक नया आयाम दिया।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-राजा रवि वर्मा

27. 'मुम्बई का मुकुटहीन राजा' किस राजनेता को कहा जाता है?

फिरोज़शाह मेहता
दादाभाई नौरोजी
बाल गंगाधर तिलक
माधव श्रीहरि अणे
फिरोज़शाह मेहता
'फिरोज़शाह मेहता' भारतीय राजनेता, बंबई नगरपालिका के संविधान के निर्माता तथा अंग्रेज़ी भाषा के समाचार पत्र 'बॉम्बे क्रॉनिकल' के संस्थापक (1913) थे। सन 1904 में फिरोज़शाह मेहता को 'नाइट' की उपाधि से विभूषित किया गया। तत्कालीन समय में उनकी गणना भारत के सफल बैरिस्टरों में की जाती थी। उन्होंने 'मुम्बई म्युनिसिपल बोर्ड' के कार्यों में गहरी रुचि ली। उनका नगर में इतना प्रभाव था कि उन्हें ‘मुम्बई का मुकुटहीन राजा’ कहा जाता था। फिरोज़शाह मेहता 1886 में 'मुम्बई लेजिस्लेटिव कॉंसिल' के लिए मनोनीत किए गए थे। बाद में वे केन्द्र की 'इंपीरियल कॉंसिल' के भी सदस्य रहे।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-फिरोज़शाह मेहता

28. 'आनन्द वन' नामक सामाजिक संस्था की स्थापना किसने की थी?

ज्योतिबा फुले
बाबा आम्टे
गुरु घासीदास
पंडिता रमाबाई
बाबा आम्टे
'बाबा आम्टे' विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने मुख्यत: कुष्‍ठ रोगियों की सेवा के लिए प्रसिद्धि पाई। बाबा आम्टे ने कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की सेवा और सहायता का काम अपने हाथ में लिया। कुष्ठ रोगियों के लिए बाबा आम्टे ने सर्वप्रथम ग्यारह साप्ताहिक औषधालय स्थापित किए, फिर 'आनंदवन' नामक संस्था की स्थापना की। उन्होंने कुष्ठ की चिकित्सा का प्रशिक्षण तो लिया ही, अपने शरीर पर कुष्ठ निरोधी औषधियों का परीक्षण भी किया। 1951 में 'आनंदवन' की रजिस्ट्री हुई। भारत सरकार से इस कार्य के विस्तार के लिए भूमि भी मिली। बाबा आम्टे के प्रयत्न से दो अस्पताल बने, विश्वविद्यालय स्थापित हुआ, एक अनाथालय खोला गया, नेत्रहीनों के लिए स्कूल बना और तकनीकी शिक्षा की भी व्यवस्था हुई। 'आनंदवन' आश्रम अब पूरी तरह आत्मनिर्भर है और लगभग पाँच हज़ार व्यक्ति उससे आजीविका चला रहे हैं।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-बाबा आम्टे

29. 'वीरभूमि' किस भारतीय प्रधानमंत्री का समाधि स्थल है?

राजीव गाँधी
महात्मा गाँधी
लाल बहादुर शास्त्री
भगतसिंह
राजीव गाँधी
'राजीव गाँधी' भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के पुत्र और देश के नौवें प्रधानमंत्री थे। उनका पूरा नाम राजीव रत्न गांधी था। राजीव गाँधी भारत की कांग्रेस (इ) पार्टी के अग्रणी महासचिव थे और अपनी माँ की हत्या के बाद भारत के प्रधानमंत्री (1984-1989) बने थे। 40 साल की उम्र में देश के सबसे युवा और नौवें प्रधानमंत्री होने का गौरव हासिल करने वाले राजीव गाँधी "आधुनिक भारत के शिल्पकार" कहे जा सकते हैं। वह पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने देश में तकनीक के प्रयोग को प्राथमिकता देकर कंप्यूटर के व्यापक प्रयोग पर जोर डाला। भारत में कंप्यूटर को स्थापित करने के लिए उन्हें कई विरोधों और आरोपों को भी झेलना पड़ा था। 'वीरभूमि' राजीव गाँधी का समाधि स्थल है। यह दिल्ली के रिंग मार्ग पर आने वाला एक बस स्टॉप भी है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-राजीव गाँधी

30. मध्य प्रदेश स्थित किस स्थान को 'मार्बल सिटी' कहा जाता है?

मुरैना
राजगढ़
झाबुआ
भेड़ाघाट
भेड़ाघाट स्थित संगमरमर की चट्टानें
'भेड़ाघाट' मध्य प्रदेश के जबलपुर से 22 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के तट पर अवस्थित है। यहाँ से रानी अल्हण देवी का 907 चेदि संवत में लिखित एक शिलालेख उपलब्ध हुआ था। भेड़ाघाट में नर्मदा का प्रवाह ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से घिर कर झील के रूप में परिणत हो गया है। नदी की ऊपरी धारा के सिरे पर 'धुआंधार' नामक प्रसिद्ध जलप्रपात है और आगे नर्मदा दोनों और लगभग सौ फुट ऊँची संगमरमर की परतदार चट्टानों के कगारों के बीच बहती है। संगमरमर चट्टानों के लगभग दो किलोमीटर लम्बे सिलसिले में चट्टानों में आकार की अनूठी विविधा और विभिन्न मनोहारी रंगों की कोमल छटा है।ध्यान देंअधिक जानकारी के लिए देखें:-भेड़ाघाट

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