पौरव  

पौरव एक प्राचीन यशस्वी राजा के रूप में प्रसिद्ध है, जिसकी पुरुवंशी षोड्श राजाओं में गणना होती है।

  • पौरव अंग देश का प्रजा वत्सल राजा था।
  • उसने कई अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किये थे।
  • शिक्षा और अक्षर (वेदज्ञ) ब्राह्मणों को प्रचुर धन दान में दिया।
  • उसकी यशोगाथा मे कवियों ने छन्द भी रचे हैं, जो उसके पुरानी वंश-परम्परा से परिचित थे।[1]


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भारतीय संस्कृति कोश, भाग-2 |प्रकाशक: यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली-110002 |संपादन: प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र |पृष्ठ संख्या: 510 |

  1. महाभारत., द्रोणपर्व, अध्याय 57

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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