प्रतिविंध्य  

Disamb2.jpg प्रतिविंध्य एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- प्रतिविंध्य (बहुविकल्पी)

प्रतिविंध्य का उल्लेख महाभारत में हुआ है। यहाँ के राजा को पाण्डव अर्जुन ने अपने दिग्विजय यात्रा के प्रसंग में हराया था।

'स तेन सहितोराजन स्वयसाची:, विजिग्ये शाकलं द्वीपं प्रतिविंध्यं च पार्थिवम्' [1]
  • प्रतिविंध्य संभवत: शाकल (स्यालकोट, पश्चिमी पाकिस्तान) के निकट कोई पहाड़ी स्थान था।
  • यह सम्भवत: शाकल नरेश का नाम भी हो सकता है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 581 |

  1. महाभारत, आदिपर्व 26, 5.

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=प्रतिविंध्य&oldid=591083" से लिया गया