प्रायद्वीप  

प्रायद्वीप (प्राय=लगभग, द्वीप=द्वीप), भूमि के वो हिस्से या स्थान हैं जिनके चारों ओर पानी होता है पर यह मुख्यभूमि या स्थान से एक भू-सन्धि के द्वारा जुड़े रहते है।

  • दूसरे शब्दों में प्रायद्वीप भूमि के वो भाग होते हैं जिनके तीन तरफ जल तथा एक ओर स्थल होती है।
  • जैसे- भारत के गुजरात राज्य में काठियावाड़ प्रायद्वीपीय क्षेत्र है।

प्रायद्वीपीय पठारी भाग

गंगा के विशाल मैदान के दक्षिण से लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक त्रिभुजाकार आकृति में लगभग 16 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र पर प्रायद्वीपीय पठारी भाग फैला हुआ है। यह भाग दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं केरल राज्यों में फैला है। यह देश का सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला तथा प्राचीन भौतिक प्रदेश है। यह देश का सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला तथा प्राचीन भौतिक प्रदेश है। इस पर प्रवाहित होने वाली नदियों ने इसका कई छोटे-छोटे पठारों में विभाजित कर दिया है। इसकी लम्बाई राजस्थान से कुमारी अन्तरीप तक लगभग 1,700 किमी. तथा गुजरात से पश्चिम बंगाल तक चौड़ाई 1,400 किमी है। इस पठार की औसत ऊँचाई समुद्र तल से 600 मीटर तक है। इसकी उत्तरी सीमा पर अरावली, कैमूर तथा राजमहल पहाड़ियाँ स्थित है। पूर्व में पूर्वी घाट तथा पश्चिम में पश्चिमी घाट पहाड़ी इसकी सीमा बनाते हैं। यह क्षेत्र विच्छिन्न पहाड़ियों, शिखर मैदानों गभीरकृत, संकरी एवं अधिवर्धित घाटियों, शृंखलाबद्ध पठारों, समप्राय मैदानों एवं अवशिष्ट खण्डों का एक प्राकृतिक भूदृश्य है। पूर्वी एवं पश्चिमी घाट का मिलन जिस स्थान पर होता है, वहां अन्नामलाई पहाड़ियाँ स्थित है। नर्मदा नदी के उत्तर में मालवा पठार स्थित है। यह पठार लावा निर्मित होने के कारण काली मिट्टी का समप्रायः बन गया है, जिसका ढाल विशाल मैदान की ओर है। इस पर बेतवा, पार्वती, नीवज, काली सिन्ध, चम्बल तथा माही नदियाँ बहती है। मालवा पठार की उत्तरी तथा उत्तरी पूर्वी सीमा पर बुन्देलखण्ड तथा बघेलखण्ड के पठार स्थित हैं जबकि कैमूर तथा भारनेर श्रेणियों के पूर्व में बघेलखण्ड का पठार है। इस पठार के उत्तर में सोनपुर पहाड़ियाँ तथा दक्षिण में रामगढ़ की पहाड़ियाँ स्थित है।

बिहार के राज्य के गया तथा झारखण्ड के हजारीबाग एवं रांची ज़िले में छोटानागपुर का पठार पाया जाता है। इस पठार पर महानदी, सोन, सुवर्ण रेखा तथा दामोदर नदियाँ प्रवाहित होती है। दामोदर नदी के उत्तर में हजारी बाग तथा कोडरमा के पठार स्थित हैं, जबकि इसके दक्षिण में रांची का पठार है। छोटानागपुर का पठार खनिज पदार्थो के भण्डार के रूप में विख्यात हैं। नर्मदा एवं महानदी के दक्षिण में दक्कन का पठार स्थित है, जिसको महाराष्ट्र पठार भी कहते है। इसका क्षेत्रफल लगभग 5 लाख वर्ग किमी है एवं ताप्ती पदी इसकी उत्तरी सीमा बनाती है। इसका निर्माण बेसाल्ट चट्टानों से हुआ है। इस पठार को दो भागों में विभाजित किया है:

  1. तेलंगाना का पठार, जिसको गोदावरी नदी ने दो भागों में विभाजित किया है। इसके निचले समतल भाग में बड़े नगर जैसे - हैदराबाद, सिकन्दराबाद आदि बसे हैं।
  2. कर्नाटक का पठार, जो कि 600 मी. की ऊंचाई तक दक्षिणी पठार के रूप में जाना जाता है। दक्षिणी पठार को मैसूर पठार भी कहते हैं। इसकी दक्षिणी सीमा पर नीलगिरि की पहाड़ियाँ तथा पश्चिम में पश्चिमी घाट एवं पूर्व में पूर्वी घाट पहाड़ मिलते हैं।

उत्तरी पठार पर कृष्णा तथा तुंगभद्रा नदियाँ बहती हैं। सम्पूर्ण प्रायद्वीपीय पठार खनिज पदार्थों की दृष्टि से धनी हैं। इस पठार के पश्चिम में पश्चिमी पहाड़ पाया जाता है, जिसे सहाद्रि भी कहते हैं। यह पहाड़ी क्षेत्र पश्चिमी तट के समानान्तर ताप्ती नदी की घाटी से कन्याकुमारी तक 1,600 किमी की लम्बाई में फैला है। समुद्र की ओर तीव्र ढाल पाया जाता है। इस पहाड़ को कुछ प्रमुख दर्रो के माध्यम से ही पार किया जा सकता है। ये हैं - थालघाट, भोरघाट, पालघाट, तथा शेनकोट्टा। थालघाट दर्रा 581 मी. ऊँचा है तथा मुम्बई से कोलकाता को जोड़ने वाले मार्ग इससे होकर जाते हैं। भोरघाट दर्रे की ऊंचाई 630 मी. है तथा यह मुम्बई एवं पुणे को जोड़ता है। पश्चिमी घाट एवं पूर्वीघाट को दक्षिण में नीलगिरि पहाड़ियाँ मिलाती है। नीलगिरि की सर्वोच्च चोटी दोदाबेट्टा (2637 मी.) है। इसके दक्षिण में पालाघाट दर्रा नीलगिरि पहाड़ी एवं अन्नामलाई पहाड़ी को अलग करता है। अन्नामलाई की एक शाख (उत्तर में) पलनी पहाड़ियाँ एवं इसकी दूसरी शाखा इलायची की पहाड़ियाँ (दक्षिण में) हैं। दक्षिण भारत का सर्वोच्च शिखर पलनी पहाड़ियों में स्थित अनाईमुदी (2695 मी.) है।


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