फालसा  

फालसा फल

फालसा (वानस्पतिक नाम- 'ग्रेविया एशियाटिका') एक मध्यम आकार का पेड़ है, जिस पर छोटे-छोटे बेर के आकार के फल लगते है। यह मध्य भारत के वनों में प्रचुरता से पाया जाता है। फालसा के फल स्वाद में खट्टे-मीठे होते है। गर्मियों में इसके फलों का शर्बत ठंडक प्रदान करता है और लू तथा गर्मी के थपेड़ों से भी आराम दिलाता है। इसका शर्बत शरीर के लिए बहुत पौष्टिक रहता है।

विटामिन की मात्रा

खट्टे-मीठे स्वाद वाले फालसे के फल में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त सिट्रिक एसिड, एमीनो एसिड, ग्रेवियानोल, बीटा एमिरिदीन, बेट्यूलीन, फ्रेडीलिन, किम्फेराल, क्वेरसेटिन, ल्यूपिनोन, ल्यूपियाल, डेल्फीनिडीन, सायनीडीन, टैरेक्सास्टेरोल जैसे तत्त्व भी इसमें उपस्थित रहते हैं, जो इस मटर के दाने के बराबर के फल में इतने गुण भर देते हैं।[1]

गुणों की खान

  • काले फालसे की तासीर ठंडक प्रदान करने वाली होती है। स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ यह उमस भरी गर्मी से बचाने में अचूक साबित होता है।
  • मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट आदि की खान होने के कारण इसे सेहत का खजाना भी माना जाता है।
  • फालसे में गर्मी के मौसम में लू लगने और उससे होने वाले बुखार से बचने का कारगर इलाज है। यह मस्तिष्क की गर्मी और खुष्की दूर करके तरोताजा रखता है। चिड़चिड़ापन दूर करता है। उल्टी और घबराहट दूर करता है।
  • यह ज्यादा धूप में रहने के कारण शरीर के खुले अंगों पर होने वाली लालिमा, जलन, सूजन और कालेपन के इलाज में मदद करता है।
  • फालसे के रस को शांत, ताजा और आसानी से पचने और गर्मी में प्यास से राहत पहुंचाने वाला टॉनिक भी कहा जाता है।
  • फालसा पित्ताशय और जिगर की समस्याओं को दूर करता है। इसका कसैलापन शरीर से अतिरिक्त अम्लता कम करके पाचन संबंधी विकार को दूर करता है। पेट की गड़बड़ी तथा अपच दूर करता है और भूख बढ़ाता है।
  • विटामिन सी, खनिज लवण और एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर फालसा के सेवन से रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे हृदय के रोग का खतरा कम हो जाता है।
  • इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में लोहे के अवशोषण में मदद करता है, जिससे रक्त को साफ करके रक्त विकारों पर काबू पाने में मदद मिलती है।
  • वैज्ञानिक शोधों से साबित हो चुका है कि फालसा में रेडियोधर्मी क्षमता होती है, जिसके चलते फालसा में मौजूद पोषक तत्व कैंसर से लड़ने के मूल्यवान स्त्रोत हैं।
  • फालसे में खनिज लवणों की अधिकता होने के कारण इसके नियमित सेवन से रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार होता है। इससे एनीमिया का खतरा कम हो जाता है।
  • फालसा चाहे कच्चा खाया जाए या इसका शर्बत पिया जाए, सीमित मात्रा में बतौर नाश्ता खाना ही श्रेयस्कर है। इसके अधिक सेवन से भूख भी खत्म हो सकती है।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. फोड़े, फुंसी, घमौरियों का दुश्मन (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 11 मई, 2014।
  2. गुणों की खान है फालसा (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 11 मई, 2014।

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