बृहद गौरी व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • भाद्र कृष्ण तृतीया पर (अमान्त गणना से) किया जाता है।
  • यह व्रत चन्द्रोदय पर प्रारम्भ किया जाता है।
  • यह व्रत केवल नारियों के लिए है।
  • दोर्ली नामक पौधा जड़-मूल के साथ लाया जाता है, उसे बालू की वेदी पर रख कर जल छिड़का जाता है।
  • चन्द्रोदय को देख कर नारी को स्नान करना चाहिए।
  • एक घट में वरुण की पूजा और तब विभिन्न उपचारों से गौरी की पूजा की जाती है।
  • गौरी के नाम से गले में एक धागा पहन लेना चाहिए।
  • यह व्रत पाँच वर्षों तक किया जाता है।
  • व्रतराज[1] और व्रतार्क[2] दोनों के मत से यह कर्नाटक में विख्यात है।

 



टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. व्रतराज (111-114, भविष्योत्तरपुराण से उद्धरण
  2. व्रतार्क (भविष्योत्तरपुराण से उद्धरण

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