भैरव जयन्ती  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • मार्गशीर्ष मास में कृष्ण अष्टमी को 'कालाष्टमी' कहा जाता है.
  • उपवास; जागर करते हैं।
  • रात्रि के चार प्रहरों तक भैरव पूजा तथा शिव के विषय की गाथाओं को सुनते हुए जागर की जाती है।
  • ऐसी मान्यता है कि पापों से मुक्ति एवं उत्तम शिव भक्ति की प्राप्ति होती है।
  • काशी में रहने वालों के लिए यह अपरिहार्य है।[1]; [2]; [3]

 

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. समयमयूख (60-61
  2. स्मृतिकौस्तुभ (427-429
  3. परुषचिन्तामणि (138

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