मरिच सप्तमी  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • मरिच सप्तमी चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर मनाई जाती है
  • इस व्रत में सूर्य देवता की पूजा की जाती है।
  • ब्राह्मणों के भोजन कराते है और प्रत्येक ब्राह्मण को 'ओं खखोल्काय' नामक मन्त्र के साथ 100 मरिच खाने होते हैं।
  • इस व्रत के करने से कर्ता को अपने प्रियजनों का वियोग दु:ख प्राप्त नहीं होता है।
  • राम एवं सीता तथा नल एवं दमयन्ती ने यह व्रत किया था।
  • हेमाद्रि[1], और भविष्योत्तरपुराण[2] से भी उद्धरण मिलता है।

 

अन्य संबंधित लिंक

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि व्रत॰ 1, 696
  2. भविष्योत्तरपुराण, 1|214|40-47

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=मरिच_सप्तमी&oldid=593325" से लिया गया