महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय  

महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय

महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र राज्य के वर्धा ज़िले में स्थित है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना भारत सरकार ने संसद द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा की है। इस अधिनियम को भारत के राजपत्र में 8 जनवरी सन् 1997 को प्रकाशित किया गया। यह अधिनियम शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से हिन्दी भाषा और साहित्य का संवर्धन एवं विकास करने हेतु एक शैक्षणिक विश्वविद्यालय की स्थापना करता है, जिससे हिन्दी बेहतर कार्यदक्षता प्राप्त कर प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय भाषा बने। साथ ही विभिन्न ज्ञानानुशासनों में मौलिक सृजन हिन्दी भाषा के माध्यम से हो सके तथा विश्व की अन्य भाषाओं में विद्यमान ज्ञान संपदा का अनुवाद हिन्दी भाषा में किया जा सके।[1]

स्थापना

महात्मा गांधी के सपनों के भारत में एक सपना राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को प्रतिष्ठित करने का भी था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रभाषा के बिना कोई भी राष्ट्र गूँगा हो जाता है। नागपुर में आयोजित 'प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन'[2] में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि संयुक्त राष्ट्रसंघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिया जाए तथा एक अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाय, जिसका मुख्यालय वर्धा में हो। अगस्त, 1976 में मॉरीशस में आयोजित द्वितीय विश्व हिन्दी सम्मेलन में यह तय किया गया कि मॉरीशस में एक विश्व हिन्दी केंद्र की स्थापना की जाए जो सारे विश्व में हिन्दी की गतिविधियों का समन्वय कर सके। 'चतुर्थ विश्व हिन्दी सम्मेलन'[3] के बाद 'विश्व हिन्दी सचिवालय' की स्थापना मॉरीशस में हुई और भारत में एक 'अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय' की स्थापना को मूर्त रूप देने की आवश्यकता समझी गयी। यह संभव हुआ वर्ष 1997 में, जब भारत की संसद द्वारा एक अधिनियम पारित करके महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना राष्ट्रपिता की कर्मभूमि वर्धा में की गयी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र की एक लालसा भी पूरी हुई जो मृत्युपर्यन्त उनके मन-मस्तिष्क में छायी रही थी। वह लालसा थी ‘अपने उद्योग से एक शुद्ध हिन्दी की यूनिवर्सिटी स्थापित करना’।

उद्देश्य

  • हिन्दी भाषा और साहित्य का संवर्धन और विकास करना और उस प्रयोजन के लिए विद्या की सुसंगत शाखाओं में शिक्षण और अनुसंधान की सुविधाएँ प्रदान करना।
  • हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में तुलनात्मक अध्ययन और अनुसंधान के सक्रिय अनुसरण के लिए व्यवस्था करना।
  • देश और विदेश में सुसंगत सूचना के विकास और प्रसारण के लिए सुविधाएँ प्रदान करना ।
  • विदेशों में हिन्दी में अभिरुचि रखने वाले हिन्दी विद्वानों और समूहों तक पहुँचना और विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए उन्हें सहबद्ध करना ।
  • दूर शिक्षा पद्धति के माध्यम से हिन्दी को लोकप्रिय बनाना होगा। विश्वविद्यालय की परिकल्पना शिक्षा की एक वैकल्पिक संस्था के रूप में की गई है। यह सतत विचार प्रक्रिया का परिणाम है जिसमें अपने उद्देश्यों को पाने के लिए शैक्षणिक तकनीकों में निरंतर नवीनीकरण एवं मूल्यानुरूप नीतियों के लिए अनवरत प्रयास करना शामिल है। यह विश्वविद्यालय अपने ज्ञानात्मक आधारों में वैश्विक एवं अपनी संरचना में अंतर्राष्ट्रीय है।

विश्वविद्यालय का यह प्रयास होगा कि -

  • वह विभिन्न ज्ञानानुशासनों में अद्यतन मौलिक सृजन तथा विश्व की अन्य भाषाओं में विद्यमान ज्ञान संपदा का अनुवाद हिन्दी भाषा में कर सके,
  • समस्त विश्व में फैले हुए भारतीय मूल के व्यक्तियों तथा विदेशी हिन्दी अध्येताओं / प्रेमियों के लिए एक संपर्क केंद्र का कार्य कर सके,
  • समस्त विश्व में हिन्दी भाषा से संबंधित अध्ययन/शोध/अनुसंधान आदि का व्यापक डाटाबेस तैयार करे जिससे हिन्दी भाषा से संबंधित जानकारी सरलता से व्यापक जन तक पहुँच सके,
  • हिन्दी की बेहतरीन रचनाओं को विश्व की अन्य समृद्ध भाषाओं - फ्रेंच, स्पेनिश, चीनी, अरबी इत्यादि - में अनुवाद करे।

लक्ष्य

  • हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाना।
  • हिन्दी को अप्रतिम वैकल्पिक भाषा बनाना (जनसंचार/व्यवसाय, प्रबंधन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा और प्रशासन में अपनी भूमिका के साथ)।
  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी संगठनों में संपर्क-सूत्र की भूमिका के निर्वाह के लिए नेटवर्क संयोजन।
  • भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी भाषाओं के साथ नेटवर्क संयोजन।
  • भारतीय संस्कृति की संवाहिका के रूप में हिन्दी को द्वार-द्वार तक पहुँचाना।

दृष्टिकोण

राष्ट्रीय नेताओं एवं हिन्दी प्रेमियों की यह एक उत्कट आकांक्षा रही है कि हिन्दी भारतीयों की भावनाओं एवं विचारों की अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में 'संयुक्त राष्ट्र संघ' के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना समुचित स्थान ग्रहण करे। दूसरी ओर उनकी यह सोच भी थी कि न केवल विदेशों में अपितु समूचे विश्व में फैले हुए भारतीय मूल के व्यक्तियों के बीच भाषायी आदान-प्रदान के समन्वय हेतु हिन्दी का एक अंतर्राष्ट्रीय सचिवालय स्थापित किया जाए। इसके अतिरिक्त उनकी यह भी परिकल्पना थी कि अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिन्दी की सम्पूर्ण संभावनाओं के विकास और संवर्धन के लिए एक केंद्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए।

विद्यापीठ / केन्द्र

1.भाषा विद्यापीठ

भाषा विद्यापीठ

हिन्दी वर्तमान कम्प्यूटर-क्रांति के परिप्रेक्ष्य में जब अपने वैश्विक प्रसार के लक्ष्यों को साधित करने की ओर बढ़ती है, तब न सिर्फ़ कम्प्यूटर पर हिन्दी की प्रभावशाली उपस्थिति की अपेक्षा की जाती है, बल्कि विश्व का अंतर-भाषिक परिदृश्य भी एक चुनौती के रूप में सामने आता है। यह स्थिति बहुभाषिक वैश्विक फलक के साथ-साथ भारत जैसे बहुभाषिक-बहुसांस्कृतिक देश की सामाजिक संरचना पर भी दृष्टिगत होता है। स्पष्ट है कि जब तक हिन्दी को अन्य भाषा-भाषी समाज से बेहतर समन्वय तथा ज्ञान-विज्ञान की समस्त विधाओं से सूचना-क्रांति की भाषा के रूप में नहीं जोड़ा जाता तब तक हिन्दी के वैश्विक प्रसार के लक्ष्यों को नहीं प्राप्त किया जा सकता।[4]

विभाग/केन्द्र
इन्हीं लक्ष्यों पर केन्द्रित भाषा-विद्यापीठ निम्नलिखित विभाग/केन्द्र की स्थापना के साथ भविष्य की ओर उन्मुख हैं-

  1. भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग
  2. कंप्यूटेशनल भाषाविज्ञान विभाग
  3. प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र
  4. भारतीय एवं विदेशी भाषा प्रगत अध्ययन केन्द्र

2.साहित्य विद्यापीठ

विश्वविद्यालय अधिनियम के अंतर्गत मान्य चार विद्यापीठों में से साहित्य विद्यापीठ एक प्रमुख विद्यापीठ है। साहित्य का भारतीय तथा विश्व भाषाओं के साहित्य के साथ संवाद और तुलनात्मक अध्ययन एवं शोध इस विद्यापीठ का प्रधान लक्ष्य है। विद्यापीठ की मूल संकल्पना देश-दुनिया के भाषायी एवं साहित्यिक वैविध्य के पीछे सक्रिय समान मानवीय मस्तिष्क और उसकी सृजनशीलता में साम्य की धारणा पर अवलम्बित है। भाषा और साहित्य अनेक और बहुविधा हैं, किन्तु उनका सर्जक मानस और आस्वादक चिह्न, अपने संस्कारों के भेद के बावजूद, बुनियादी प्रकृति में एक-सा है। इस कारण विभिन्न भाषाओं के साहित्य के बीच संवाद की अपार सम्भावनाएँ हैं। इन सम्भावनाओं का सन्धान और शोध विद्यापीठ की वरीय प्राथमिकता है। इससे अकादमिक उद्देश्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय भावात्मक एकता तथा मानवीय सह-भाव भी सम्पुष्ट होता है। साहित्य सर्व समावेशी विद्या है। ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों और कलाओं के साथ उसका घनिष्ठ एवं प्रगाढ़ सम्बन्ध परम्परा से ही सर्वविदित है। इधर विकसित नयी प्रौद्योगिकी और तज्जनित विभिन्न माध्यमों से भी साहित्य का अपरिहार्य सम्बन्ध विकसित हुआ है। इस दृष्टि से अंतरानुशासनिक अध्ययन एवं शोध भी साहित्य विद्यापीठ की प्रतिश्रुति है। फिलहाल, साहित्य विद्यापीठ के अंतर्गत साहित्य विभाग में तुलनात्मक साहित्य के एम.ए., एम.फिल. एवं पी-एच.डी. पाठ्यक्रम संचालित हैं। इसके अलावा विदेशी विद्यार्थियों के लिए भाषा, साहित्य एवं संस्कृति का बी.ए. पाठ्यक्रम, तुलनात्मक भारतीय साहित्य और हिन्दुस्तानी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रस्तावित हैं। इस सत्र से नाट्य कला एवं फ़िल्म अध्ययन का स्वतन्त्र विभाग एवं उसमें एम.ए. पाठ्यक्रम प्रस्तावित है। यथासमय एम.फिल. एवं पी-एच.डी. पाठ्यक्रम भी प्रस्तावित होंगे।

3.संस्कृति विद्यापीठ

  • 'महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय' का संस्कृति विद्यापीठ, संस्कृति अध्ययन एवं अन्य समाज विज्ञान विमर्शों को समाहित करते हुए बहुसांस्कृतिक अकादमिक विकास के अगुआ के रूप में कार्य करने के लक्ष्य को सम्मुख रखता है।
  • ऐसा प्रयास करते हुए विद्यापीठ महात्मा गांधी के दृष्टिकोण में अन्तर्निहित सीखने के बहुल तरीकों की प्रतिबद्धता और असीम विस्तार से निर्देशित होता है। गांधी दृष्टि विश्वविद्यालय की भूमिका को निश्चित करने में तथा क्रियान्वित होते कार्यक्रमों में प्रतिबद्धता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण है।
  • गांधी दृष्टि के साथ विद्यापीठ में सम्पन्न अकादमिक शोध एवं अन्य गतिविधियाँ समानता एवं समस्त मानवता के शांतिपूर्ण विकास के मूल्यों का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
  • विद्यापीठ का सशक्त प्रयास होगा कि वह स्त्री-अध्ययन, दलित एवं जनजाति अध्ययन जैसे विषयों के जरिए वंचित तबकों की आवाज़ को मुखर करते हुए उन्हें अकादमिक जगत् में बहस का मुख्य मुद्दा बनाए। आज के यथार्थ एवं अपनी समझ को गहरा करते हुए मूलवासियों एवं आदिवासियों की जीवन दृष्टि को, दलित एवं अन्य दमित वर्गों के सामाजिक न्याय को प्राप्त करने के संघर्ष को तथा स्त्रियों द्वारा बराबरी का स्थान हासिल करने के संघर्ष को सामने लाना, इस विद्यापीठ की समग्र दृष्टि एवं कार्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा है।

4.अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ

  • विभिन्न ज्ञान अनुशासनों में अनुवाद प्रक्रिया का विकास करना।
  • हिन्दी से विदेशी एवं भारतीय भाषाओ में यंत्रानुवाद की प्रक्रिया का विकास करना।
  • निर्वचन को एक स्वतंत्र अनुशासन के रूप में विकसित करना और इस दिशा में अनुसंधान करना।
  • विदेशी एवं भारतीय भाषाओं में हिन्दी दुभाषिये तैयार करना।
  • अनुवाद को वर्तमान सांस्कृतिक, सामाजिक एवं प्रयोजनपरक प्रविधियों से जोड़ते हुए उसके व्यावहारिक पक्ष को विकसित करना।
  • भारतीय एवं वैश्विक परिदृश्य में हिन्दी को अनुवाद के माध्यम से सम्पन्न भाषा बनाना।
  • अनुवाद अनुशासन को विदेशी और द्वितीय भाषा शिक्षण में एक प्रमुख उपकरण के रूप में विकसित करना।
  • प्रतीकान्तरण का फ़िल्म, दूरदर्शन, आकाशवाणी एवं रंगमंच आदि में विकास करना।

सुविधाएँ

छात्रावास
छात्रावास

विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराता है। विश्वविद्यालय के पांच पुरुष एवं एक महिला छात्रावास है। वर्तमान में पुरुष छात्रावास हेतु मुख्य परिसर के बाहर भवन किराए पर लिए गए हैं। छात्रावास अधीक्षकों को यह कार्यभार उनके शिक्षण/प्रशासनिक कार्यों के अतिरिक्त प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा छात्रावास अधीक्षकों को प्रशासनिक एवं अन्य कार्यों हेतु सहयोगी कर्मचारी प्रदान किए गए हैं।

पुस्तकालय

विश्वविद्यालय के 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन केन्द्रीय पुस्तकालय' का विशाल भवन निर्माणाधीन है। केन्द्रीय पुस्तकालय के अतिरिक्त हर विद्यापीठ, केन्द्र तथा विभागों के पास अपने अलग विभागीय पुस्तकालय है। इनमें भी ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों से सम्बन्धित पुस्तकें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

कम्प्यूटर प्रयोगशाला

विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के आधुनिकतम संसाधनों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में एक कम्प्यूटर प्रयोगशाला स्थापित की गयी है। यहाँ न सिर्फ़ इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है, बल्कि कम्प्यूटर के अनिवार्य-शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को शोध और ज्ञान की अधुनातन प्रविधियों से भी अवगत कराया जाता है।

स्वास्थ्य सेवाएँ

विश्वविद्यालय का स्वास्थ्य सेवा केन्द्र आंशिक तौर पर प्रारम्भ किया गया है। फिलहाल विश्वविद्यालय ने एक पुरुष एवं एक महिला फिजिशियन तथा एक दंत चिकित्सक को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया है। विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य सेवा केन्द्र के भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। विश्वविद्यालय के सदस्यों की चिकित्सीय देखरेख हेतु जल्द ही पूर्णकालिक चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। विश्वविद्यालय ने निम्नलिखित दो चिकित्सालयों को कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों हेतु मान्य कर रखा है, जहाँ आवश्यकता होने पर सेवाएँ प्रदान की जाती है

खेल-कूद

'महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय' विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के रचनात्मक विकास हेतु एक विकल्प प्रस्तुत करता है। इस दिशा में विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के लिए क्रीड़ा विभाग की स्थापना की गई। इस विभाग के माध्यम से विभिन्न खेलों का आयोजन किया जाता रहा है, जिसमें दिसम्बर 2007 में विश्वविद्यालय की ओर से खेल प्रभारी श्री अमित राय, व्याख्याता, दूरशिक्षा कार्यक्रम के नेतृत्व में 28 सदस्यीय टीम ने 23वें पश्चिम क्षेत्र अंतरविश्वविद्यालीय युवा महोत्सव ग्वालियर में पहली बार भागीदारी की और प्रशंसनीय कार्य किया। सितंबर 2008 में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रांगण में एक क्रिकेट प्रतियोगिता संपन्न हुई, जिसमें एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। विश्वविद्यालय में खेल प्रांगण, इंडोर स्टेडियम एवं जिम्नेज़ियम का प्रस्ताव पास किया जा चुका है, जिसके तहत विद्यार्थियों को भविष्य में विभिन्न सुविधाएँ प्रदान करने के प्रयास जारी हैं।[5]

प्रकाशन

विश्वविद्यालय में प्रकाशित पुस्तकें

विश्व के लगभग सभी विश्वविद्यालय पठन-पाठन के अतिरिक्त ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों में उपलब्ध महत्त्वपूर्ण सामग्री के प्रकाशन का काम भी करते हैं। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय ने यह उत्तरदायित्व एक चुनौती के रूप में लिया है। हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए आवश्यक है कि दुनिया भर की भाषाओं में फैली हुई उपयोगी सामग्री शोधार्थियों, छात्रों तथा गंभीर पाठकों को हिन्दी में भी उपलब्ध हो। इस दायित्व को पूर्ण करने के लिए विश्वविद्यालय इस समय कई परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इनमें स्त्री अध्ययन, फ़िल्म तथा थियेटर और मानव शास्त्र के लिए आधार-सामग्री का निर्माण करना शामिल है। इसके अतिरिक्त हम हिन्दी में समाज विज्ञान का एक वृहत विश्वकोश भी बना रहे हैं। आशा है कि अगले कुछ महीनों में इन परियोजनाओं का परिणाम सामने आने लगेगा।

भारतकोश की हिन्दी विश्व पर चर्चा

विभूति नारायण राय और अशोक चक्रधर

प्रोफ़ेसर अशोक चक्रधर ने इंटरनेट पर हिन्दी सिखाने वाली अनेक वेबसाइट्स का उदाहरण देते हुए ब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे फेसबुक और ऑर्कुट को भी हिन्दी के प्रसार का महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया। वर्धा विश्वविद्यालय की साइट हिन्दीसमय.कॉम की प्रशंसा करते हुए उन्होंने इसे और गति देने की उम्मीद ज़ाहिर की। अरविंद लेक्सीकॉन का परिचय देते हुए उन्होंने बताया कि यह एक अनोखा सॉफ़्टवेयर है जिसमें नौ लाख से ज़्यादा अभिव्यक्तियाँ हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा द्विभाषिक कॉर्पस है। श्री अरविंद कुमार और उनकी पत्नी श्रीमती कुसुम कुमार ने मिलकर पैंतीस साल की साधना के बाद इसे तैयार किया है। बहुत शीघ्र आप इसे अपने मोबाइल पर भी देख सकेंगे। माउस के एक क्लिक पर हिन्दी की अपार शब्द संपदा में से इच्छित सामग्री मिल जाया करेगी। इसी प्रकार आदित्य चौधरी द्वारा तैयार भारतकोश भी बहुत उपयोगी ज्ञानभंडार है जो विकीपीडिया के समानांतर खड़ा हो सकता है। आदित्य इसे ज्ञान का महासागर कहते हैं।[6]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (हिन्दी) (पी.एच.पी) ज्ञान शांति मैत्री। अभिगमन तिथि: 04 जनवरी, 2011।
  2. 10-14 जनवरी, 1975
  3. दिसम्बर-1993
  4. महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (हिन्दी) (पी.एच.पी) ज्ञान शांति मैत्री। अभिगमन तिथि: 04 जनवरी, 2011।
  5. महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (हिन्दी) (पी.एच.पी) ज्ञान शांति मैत्री। अभिगमन तिथि: 04 जनवरी, 2011।
  6. इंटरनेट पर हिन्दी अनुप्रयोग के वर्तमान परिदृश्य पर विशद चर्चा (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) हिन्दी विश्व। अभिगमन तिथि: 17 जनवरी, 2011।

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