मुअज़्ज़िन  

मुअज़्ज़िन इस्लाम धर्म में उस व्यक्ति को कहा जाता है, जो शुक्रवार के दिन सार्वजनिक नमाज़ के लिए 'अज़ान' देता है और प्रतिदिन पांच बार की नमाज़ (सलाती)- 'प्रभात', 'दोपहर', 'अपराह्न', 'सूर्यास्त' और 'रात्रि' के आरंभ के लिए अज़ान देता है।[1]

  1. 'इबादत' करने वालों को बुलावा देने के लिए यहूदी लोग तुरही का उपयोग करते हैं, ईसाई घंटी का और मुस्लिम इंसानी आवाज़ का।
  2. मस्जिद का सेवक मुअज़्ज़िन होता है और वह अपने अच्छे चरित्र के कारण इस कार्य के लिए चुना जाता है। वह या तो छोटी मस्जिद के दरवाज़े पर या उसके एक तरफ़ या बडी मस्जिद की मीनार[2] पर खड़ा होता है।
  3. मुअज़्ज़िन बारी-बारी से दिक्सूचक[3] की चारों दिशाओं, पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण की ओर मुंह करके आवाज़ देता है। हर दिशा में वह चिल्लाकर कहता है- "अल्लाह सबसे महान् है, मैं घोषणा करता हूँ कि अल्लाह के अलावा कोई ईश्वर नहीं है। मैं घोषणा करता हूँ कि मुहम्मद ही अल्लाह के पैग़ंबर हैं। नमाज़ के लिए आइए, मुक्ति के लिए आइए, अल्लाह सबसे महान् है, अल्लाह के अलावा कोई ईश्वर नहीं है।"[1]
  4. शिया मुअज़्ज़िन यह वाक्य भी कि "सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए आइए" को "मुक्ति के लिए आइए" के बाद में जोड़ देते हैं।
  5. कई मस्जिदों में नमाज़ के लिए अज़ान के इलेक्ट्रॉनिक रेकार्ड लगा दिए गए हैं और मुअज़्ज़िन का स्थान लाउडस्पीकर ने ले लिया है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 भारत ज्ञानकोश, खण्ड-4 |लेखक: इंदु रामचंदानी |प्रकाशक: एंसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली और पॉप्युलर प्रकाशन, मुम्बई |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 386 |
  2. अन्य स्थानों पर यह 'मज़ाना' या 'मीनार' के रूप में उल्लेखित होता है
  3. कंपास

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