मूलगौरी व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • चैत्र के शुक्ल पक्ष की तृतीया पर यह व्रत किया जाता है।
  • तिल एवं जल से स्नान करना चाहिए।
  • स्वर्ण फलों के साथ एवं पाँव से सिर तक शिव एवं गौरी की पूजा करनी चाहिए।
  • बारह मासों में विभिन्न पुष्पों का उपयोगकरना चाहिए और इसी प्रकार विभिन्न पदार्थों को खाना या पीना चाहिए।
  • गौरी के विभिन्न नामों की पूजा करनी चाहिए।
  • कर्ता को एक फल छोड़ देना चाहिए और अन्त में एक पलंग, सोने के बैल एवं गाय का दान करना चाहिए।
  • शिव ने गौरी से चैत्र शुक्ल तृतीया पर विवाह किया था[1]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अग्नि पुराण (178|1-20)।

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