रूप संक्रान्ति  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह व्रत संक्रान्ति के दिन करना चाहिए।
  • इस दिन कर्ता तेल स्नान करता है।
  • स्वर्ण पात्र में थोड़ा सा सोना के साथ घी रखता है और किसी ब्राह्मण को दे देता है।
  • उस दिन एकभक्त रहता है, यह संक्रान्तिव्रत है।
  • इससे सहस्र अश्वमेघ का फल, सौन्दर्य, दीर्घायु, स्वास्थ्य, धन एवं स्वर्ण की प्राप्ति होती है।[1]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 734, स्कन्दपुराण से उद्धरण)।

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