रोमन लिपि  

रोमन लिपि, लिखने की वह विधि है, जिसमें अंग्रेज़ी भाषा को मिलाकर यूरोप की लगभग सभी भाषाएँ लिखी जाती हैं। जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश, इतालवी, डच, स्वीडिश, पुर्तग़ाली आदि। सभी यूरोपीय भाषाएँ अतिरिक्त चिन्ह भी प्रयोग करती हैं किंतु अंग्रेज़ी भाषा में किसी चिन्ह का प्रयोग नहीं किया जाता है। रोमन लिपि बायें से दायीं ओर को लिखी और पढ़ी जाती है।

इतिहास

रोमन लिपि 'लातिनी भाषा' की लिपि है। इसका प्रत्येक अक्षर सदैव एक ही प्रकार से उच्चारित होता है। रोमन लिपि को अंग्रेज़ों ने अपनी भाषा लिखने के लिये 'लातिनी भाषा' से लिया था। यह लिपि अंग्रेज़ी भाषा की अपनी लिपि नहीं है।

प्राचीन रोमन लिपि में स्वर के ऊपर समतल रेखा (Macron) का अर्थ था कि यह स्वर दीर्घ है। कुछ समय बाद 'यूनानी लिपि' से यह अक्षर रोमन लिपि में सम्मिलित किये गये -

  • K- 'क' ध्वनि के लिए
  • Y - 'इयु' ध्वनि के लिए
  • Z - 'ज़' ध्वनि के लिए
  • स्वर 'उ' के लिये U का प्रयोग किया जाने लगा।
  • कुछ समय के बाद J - 'य' ध्वनि के लिए
  • W - 'व' ध्वनि के लिए प्रयोग में लाया जाने लगा।

लघु अक्षर

रोमन अक्षरों को छोटे अक्षरों (small alpabet) के स्वरूप a, b, c, d, e, f, g, h, i, j, k, l, m, n, o, p, q, r, s, t, u, v, w, x, y, z का मध्ययुग में प्रयोग किया जाने लगा। छोटे अक्षरों के प्रयोग से लिखने में गति आयी और लम्बे वाक्य सरलता और शीघ्रता से लिखे जाने लगे। इस समय तक पश्चिमी और मध्य यूरोप की लगभग सभी भाषाओं ने लिखने के लिये रोमन लिपि को अपना लिया और उसका प्रयोग प्रारम्भ कर दिया।

अंग्रेज़ी भाषा और रोमन लिपि

रोमन लिपि में लिखी हुई अंग्रेज़ी भाषा और उसके उच्चारण में बहुत ज़्यादा असमानता की स्थिति है। अंग्रेज़ी भाषा का मानकीकरण होने के बाद स्पेलिंग परिवर्तन में और भी कठिनाई होने लगी। अन्य यूरोपीय भाषाओं में लिखने और उच्चारण में उतना अंतर नहीं है जितना कि अंग्रेज़ी भाषा में है। जिन अक्षरों में उच्चारण का अंतर होता है वहाँ उच्चारण और लेखन के लिए पर्याप्त नियम और क़ायदे बनाये गये हैं।

रोमन लिपि की अवैज्ञानिकता

  • रोमन लिपि में एक ही अक्षर के कई उच्चारण मान्य होते हैं। उदाहरण के लिए C का प्रयोग कहीं 'क' ध्वनि के लिए, कहीं 'च' ध्वनि के लिए और कहीं 'स' ध्वनि के लिए होता है और कहीं कहीं एक ही उच्चारण कई अक्षर या उनके समूह से किया जाता है। उदाहरण के लिए 'क' का उच्चारण
    • 'K' से जैसे - kill,
    • 'ch' से जैसे -school
    • 'C' से जैसे - Coat
    • 'Ck' से जैसे - Check या
    • 'Q' जैसे - Cheque होता है।
  • बहुत से अक्ष्रर उपस्थित होते हैं किंतु उच्चारित नहीं किये जाते हैं। यह अक्षर शब्द में अनुच्चारित (silent) रहते हैं - जैसे listen का उच्चारण 'लिसेन्' होता है, 'लिस्टेन' नहीं, इसमें 'T' अनुच्चारित रहता है।
  • अक्षरों का नाम कुछ और होता है और उनका उच्चारण कुछ और होता है। जैसे 'h' का नाम 'एच' और उच्चारण 'ह' होता है। इसी प्रकार 'w' का नाम 'डब्लू' या 'डबल्यू' है लेकिन उच्चारण 'व' होता है।
  • रोमन लिपि में 'स्माल लेटर' और 'कैपिटल लेटर' का भी प्रयोग है। उदाहरण के लिये व्यक्तिवाचक संज्ञाओं का आरम्भ कैपिटल लेटर से किया जाता है। इसी प्रकार वाक्य के आरम्भ का पहला वर्ण कैपिटल से लिखा जाता है।
  • रोमन लिपि में लिखित किसी नाम का सही-सही उच्चारण क्या होगा यह कह पाना कठिन होता है। वस्तुतः हर उस लिपि के साथ ऐसी समस्या होती है, जो ध्वनिमूलक नहीं होती है।

रोमन में A का उच्चारण कहीं अ, आ या ए होता है। 'BHARAT' लिखने पर उसका उच्चारण भारत, भरत, भरात, भारट, भाराट भी हो सकता है।

मोबाइल पर रोमन लिपि

मोबाइल फोन से एस एम एस करने और इंटरनेट से चिट्ठी लिखने में अँगरेजी भाषा की रोमन लिपि का इस्तेमाल हिन्दी लिखने में किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिनों दिन बढ़ते मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल में सामग्री लिखने के लिए आमतौर पर लोग अँगरेजी के की-बोर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं और ज्यादातर रोमन लिपि में हिन्दी लिख रहे हैं जिसमें शब्दों का उच्चारण तो हिन्दी का होता है लेकिन वह लिखी रोमन की वर्णमाला में जाती है।



पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ


बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=रोमन_लिपि&oldid=333165" से लिया गया