रोहतांग दर्रा  

रोहतांग दर्रा
रोहतांग दर्रा
विवरण 'रोहतांग दर्रा' हिमाचल प्रदेश प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मनाली को लेह से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है।
स्थिति हिमाचल प्रदेश
ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 4111 मीटर।
पर्वत शृंखला हिमालय की पीर पंजाल श्रेणी
कब जाएँ यह दर्रा वर्ष में मई के महीने में पर्यटकों के लिए खुल जाता है और सितम्बर में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिया जाता है।
संबंधित लेख हिमाचल प्रदेश, मनाली, लेह
अन्य जानकारी रोहतांग दर्रे से मनाली का शानदार दृश्‍य दिखाई पड़ता है। मनाली से इसकी दूरी 51 कि.मी. है। यहां से पहाडों, सुंदर दृश्‍यों वाली भूमि और ग्‍लेशियर का शानदार दृश्‍य देखा जा सकता है।

रोहतांग दर्रा हिमालय (भारत) में स्थित एक प्रमुख दर्रा है। यह मनाली को लेह से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है। यह दर्रा समुद्र तल से 4,111 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस दर्रे का पुराना नाम 'भृगु-तुंग' था, 'रोहतांग' नया नाम है। यहाँ पूरे साल बर्फ़ की चादर बिछी रहती है। रोहतांग दर्रा लाहोल और स्पीति ज़िलों का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह दर्रा मौसम में होने वाले अचानक बदलावों के लिए भी ज़िम्मेदार है।

स्थिति

समुद्र तल से लगभग 4,111 मीटर की ऊँचाई पर स्थित रोहतांग दर्रा मनाली को लेह से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है। हिमाचल प्रदेश के लाहोल-स्पीति ज़िले का प्रवेश द्वारा कहा जाने वाला यह दर्रा कभी 'भृगु तुंग' के नाम से पुकारा जाता था। यह बौद्ध सांस्कृतिक विरासत के धनी लाहोल-स्पीति को हिन्दू सभ्यता वाले कुल्लू से प्राकृतिक रूप से बांटता है। मनाली से रोहतांग दर्रे तक पहुँचने के लिए क़रीब पचास किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

दुरूह स्थान

हिमालय के अन्य प्राकृतिक स्थलों की तुलना में इस दर्रे को पैदल पार करना मुश्किल नहीं है। लेकिन यह अन्य स्थलों की अपेक्षा इसलिए दुरूह माना जाता है, क्योंकि इस क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से बर्फ के तूफ़ान चलते रहते हैं। शायद इसलिए इस दर्रे का एक नाम लाशों का ढेर भी है।

'सीमा सड़क संगठन' (बी.आर.ओ.) द्वारा यहाँ एक उच्च कोटि के सड़क मार्ग की व्यवस्था की गयी है। सैनिक वाहनों, बसों, ट्रकों एवं अन्य भारी मालवाहक वाहनों के आवागमन के कारण इस मार्ग पर वाहनों के जाम की समस्या आम है। रोहतांग दर्रा मई से नवंबर तक खुला रहता है। बाकी समय बर्फीले तूफ़ानों और हिमस्खलन के कारण इसको पार करना बहुत मुश्किल रहता है।[1]

मौसम की समस्या

अक्सर नवम्बर से अप्रैल तक, जब बर्फ के कारण इस मार्ग को बंद कर दिया जाता है, तब यहाँ रहने वाले लगभग तीस हज़ार निवासी दुनिया से कट जाते हैं। रोहतांग दर्रा बंद होने का सबसे ज़्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। हेलीकॉप्टर से ही आवागमन संभव हो पाता है और जब मौसम खराब हो, तब यह भी संभव नहीं हो पता। अक्सर पाँच से छ: महीने के लिए ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार के सभी दिनों में राज्य सरकार सब्सिडी पर यहाँ के लोगों को राशन उपलब्ध कराती है।

पर्यटन स्थल

'राज्य पर्यटन विभाग' के अनुसार वर्ष 2008 में क़रीब 1,00,000 विदेशी पर्यटक रोहतांग दर्रा आए थे। यहाँ से हिमालय के पर्वतों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। बादल इन पर्वतों से नीचे दिखाई देते हैं। यहाँ ऐसा नज़ारा दिखता है, जो पृथ्वी पर बिरले ही स्थानों पर देखने को मिले। रोहतांग दर्रे में स्कीइंग और ट्रेकिंग करने की अपार संभावनाएँ हैं। हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक इन आकर्षक नज़ारा का लुत्फ लेने और साहसिक खेल खेलने आते हैं। रोहतांग दर्रा जाते हुए व्यास नदी के बाएं किनारे पर एक छोटा-सा दर्शनीय ग्राम है- 'वशिष्ठ'। मनाली से 12 कि.मी. दूर कोठी एक सुंदर दृश्यावली वाला स्थान है।

खुलने का समय

रोहतांग दर्रे से मनाली का शानदार दृश्‍य दिखाई पड़ता है। मनाली से इसकी दूरी 51 कि.मी. है। यहां से पहाडों, सुंदर दृश्‍यों वाली भूमि और ग्‍लेशियर का शानदार दृश्‍य देखा जा सकता है। यह दर्रा वर्ष में मई के महीने में पर्यटकों के लिए खुल जाता है और सितम्बर में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिया जाता है। यहाँ से गुजर कर यात्रा करना घातक हो सकता है। यहाँ से गुजरने के लिए सेना की अनुमति लेना अनिवार्य है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारत में हिमालय के प्रमुख दर्रे (हिन्दी) वाइवेस पेनोरमा। अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर, 2014।

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