वराटिका सप्तमी  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह व्रत किसी सप्तमी तिथि पर करना चाहिए।
  • कर्ता को केवल तीन वराटिकाओं (कौड़ियों) से क्रय किये हुए भोजन पर ही निर्वाह करना होता है, चाहे वह भोजन उसके लिए अनुचित ही क्यों न हो।
  • सूर्य देवता की पूजा करनी चाहिए।
  • इस व्रत का फल घोषित नहीं है।[1]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कृत्यकल्पतरु (व्रतखण्ड 184); हेमाद्रि (व्रतखण्ड 1, 726, भविष्यपुराण से उद्धरण)।

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