वर्धापन विधि  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • इसको जन्मतिथि कृत्य एवं उत्सव पर करना चाहिए।
  • शिशु के विषय में प्रत्येक मास में जन्मतिथि पर, राजा के लिए, यह प्रतिवर्ष किया जाता है।
  • नील या कुंकुम से 16 देवियों [1] के चित्र बनाये जाते हैं तथा एक वृत्त के बीच में सूर्य का चित्र बनाया जाता है, वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, ऊँचे संगीत से उत्सव मनाया जाता है, बच्चे को स्नान कराकर देवियों की पूजा की जाती है।
  • सींक से बने पात्रों (छितनियों) में मूल्यवान पदार्थ, भोजन सामग्री, पुष्प, फल आदि रखकर प्रत्येक देवी के सम्मान में ब्राह्मणों एवं सधवा नारियों को, 'कुमुदा' आदि देवियाँ मेरे बच्चे को स्वास्थ्य, सुख एवं दीर्घायु दें' के साथ, दान के रूप में दे दिया जाता है।
  • माता-पिता अपने सम्बन्धियों के साथ भोजन करते हैं।
  • राजा के विषय में इन्द्र एवं लोकपालों को हविष्य दिया जाता है तथा वैदिक मंत्र[2] पड़े जाते हैं।[3]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. यथा- कुमुदा, माधवी, गौरी, रुद्राणी, पार्वती
  2. यथा-ऋग्वेद 6|47|11, 10|161|4
  3. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 889-892, अथर्वण-गोपथ ब्राह्मण एवं स्कन्द पुराण से उद्धरण)।

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