वितस्ता पूजा  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह भाद्रपद के अन्त में शुक्ल पक्ष की दशमी से आगे सात दिनों तक वितस्ता (झेलम) का दर्शन, उसमें स्नान, उसका जल ग्रहण, पूजा एवं ध्यान किया जाता है।
  • वितस्ता सती (पार्वती) का अवतार है।
  • वितस्ता एवं सिन्धु के संगम तट पर विशिष्ट पूजा, नदी के सम्मान में उत्सव किया जाता है।
  • जिसमें अभिनेताओं एवं नर्तकों को सम्मानित किया जाता है।[1]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कृत्यरत्नाकर (286, ब्रह्म पुराण से उद्धरण)।

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