शिवरथ व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • हेमन्त (मार्गशीर्ष एवं पौष) एवं माघ में एकभक्त।
  • माघ के अन्त में विभिन्न रंगों से सज्जित एवं चार बैलों वाले रथ का निर्माण किया जाता है।
  • एक आढ़क चावल के आटे से लिंग बनाकर रथ में स्थापित करना।
  • रात्रि में जन मार्ग पर रथ को शिव मन्दिर में लाना।
  • प्रकाश एवं नाच गान के साथ में जागर (जागरन) किया जाता है।
  • दूसरे दिन प्रात: शिवभक्तों, अंधों, दरिद्रों एवं दलितों को भोजन कराया जाता है।
  • यह ऋतुव्रत है।
  • शिव को रथ का दान दिया जाता है।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 859-860, विष्णुधर्मोत्तरपुराण से उद्धरण)।

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