शैवमहाव्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।

(1) पौष की अष्टमी से आरम्भ होता है।

  • लगातार नक्त विधि।
  • किन्तु दोनों पक्षों की अष्टमी पर उपवास रखा जाता है।
  • दिन में तीन बार शिव की पूजा, होम, भूमि पर शयन किया जाता है।
  • पौष पूर्णिमा पर घी से महापूजा की जाती है।
  • आठ ब्राह्मणों को भोज, एक जोड़ी गायों एवं एक कपिल बैल का दान दिया जाता है।
  • माघ एवं आगे के मासों में मार्गशीर्ष तक विभिन्न भोजनों से नक्तविधि।
  • यह व्रत मासव्रत होता है।[1]

(2) कार्तिक में नक्तविधि।

  • मास के अन्त में गुड़ एवं घृत युक्त तिल रोटी का अर्पण किया जाता है।
  • अष्टमी एवं चतुर्दशी पर उपवास किया जाता है।
  • र्गशीर्ष से आगे के मासों में शिव से सम्बन्धित पदार्थों का शिव प्रतिमा को अर्पण किया जाता है।
  • इस व्रत में शिव भगवान की पूजा कि जाती है।[2]

 

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 843-848);
  2. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 848-853, शिवधर्मपुराण से उद्धरण)।

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