सर्वोषधि  

'कुष्ठ मांसी हरिद्रे द्वे मुरा शैलेयचन्दनम्।
वचा चम्पकमुस्ते च सर्वोषध्यो दश स्मृता:।।'


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सूखी अदरक
  2. अग्निपुराण 177|13
  3. शान्ति पर
  4. शान्तिक
  5. वर्षक्रियाकौमुदी 212
  6. पुरुषार्थचिन्तामणि 307
  7. व्रतराज 16
  8. हेमाद्रि व्रत खण्ड 1, पृ, 49

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