सुकलत्रप्राप्ति व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह व्रत कुमारियों, सधवाओं एवं विधवाओं के लिए है।
  • यह एक नक्षत्र व्रत है।
  • इस व्रत में देवता नारायण की पूजा करनी चाहिए।
  • कुमारी को तीन नक्षत्रों, यथा– उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा तथा उत्तराभाद्रपदा को जगन्नाथ की पूजा करनी चाहिए तथा 'माधव' नाम लेना चाहिए।
  • प्रियंगु एवं लाल पुष्पों का अर्पण करना चाहिये तथा कुंकुम का लेप करना चाहिए।
  • 'माधव को प्रणाम' के साथ मधु एवं घी से होम करना चाहिए।
  • इस व्रत के करने से सुन्दर पति की प्राप्ति होती है।[1]
  • शिव ने इस व्रत का वर्णन पार्वती से किया था।

 

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 628-630, विष्णुधर्मोत्तरपुराण से उद्धरण

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=सुकलत्रप्राप्ति_व्रत&oldid=189126" से लिया गया