सुखी सवैया  

सुखी सवैया नवीन सवैया 8 सगण+लघु गुरु से बनता है; 12, 14 वर्णों पर यति होती है। सुखी सवैया 8स+2ल के अन्तिम वर्णों को दीर्घ करने से यह छन्द बनता है।

  • "कुछ के अपमान के साथ पितामह, विश्व-विनाशक युद्ध को तोलिये।"[1]


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धीरेंद्र, वर्मा “भाग- 1 पर आधारित”, हिंदी साहित्य कोश (हिंदी), 742।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. दिनकर : कुरुक्षेत्र

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