सुमुखि सवैया  

सुमुखि सवैया सात जगण और लघु-गुरु से छन्द बनता है; 11, 12 वर्णों पर यति होती है। मदिरा सवैया आदि में लघु वर्ण जोड़ने से यह शब्द बनता है।

  • "सखीन सों देत उराहनो नित्य, सो चित्त सँकोच सने लहिये।" [1]
  • "अनन्य हिमांशु, सदा तरुणीजन की परिरम्भण-शीतलता।"[2]


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

धीरेंद्र, वर्मा “भाग- 1 पर आधारित”, हिंदी साहित्य कोश (हिंदी), 741।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. देव : शब्द रसायन, प्र. 10 : पृष्ठ 152
  2. चन्द्राकार

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=सुमुखि_सवैया&oldid=238298" से लिया गया