सूरत  

परले पॉइंट, सूरत

सूरत गुजरात राज्य का प्रसिद्ध शहर है। यह ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। सूरत दक्षिण-पूर्वी गुजरात राज्य, पश्चिम भारत में स्थित है। यह 'खंभात की खाड़ी' पर ताप्ती नदी के मुहाने पर स्थित है। कहा जाता है कि 1516 ई. में एक हिन्दू ब्राह्मण 'गोपी' ने इसे बसाया था। सूरत मुख्यत: कपड़ा उद्योग और हीरे की कटिंग और पॉलिशैंग आदि के कार्यों के लिए प्रसिद्ध है। यही कारण है कि इस शहर को 'सिल्क सिटी' और 'डायमंड सिटी' के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास

12वीं से 15वीं शताब्दी तक सूरत शहर मुस्लिम शासकों, पुर्तग़ालियों, मुग़लों और मराठों के आक्रमणों का शिकार हुआ। 1514 ई. में पुर्तग़ाली यात्री दुआरते बारबोसा ने सूरत का वर्णन एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में किया था। यहाँ फ़्राँसीसियों ने अपनी पहली कोठी 'फ़्रैकों कैरो' द्वारा 1668 ई. में स्थापित की। गोलकुण्डा रियासत के सुल्तान से अधिकार पत्र प्राप्त करने के बाद फ़्राँसीसियों ने अपनी दूसरी व्यापारिक कोठी की स्थापना 1669 ई. में मसुलीपट्टम में की थी। 18वीं शताब्दी में धीरे-धीरे सूरत का पतन होने लगा था। उस समय अंग्रेज़ और डच, दोनों ने ही सूरत पर नियंत्रण का दावा किया, लेकिन 1800 ई. में अंग्रेज़ों का ही इस पर पूर्णत: अधिकार हो गया।

कारोबारियों की नगरी

गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत पिछले कुछ सालों में हीरे और टेक्सटाइल सेक्टर में भारत और दुनिया के अन्य शहरों की तुलना में काफ़ी आगे बढ़ गई है। इन दोनों कारोबारों की वजह से सूरत ने सिर्फ़ गुजरात ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी बड़ी तादाद में लोगों को आकर्षित किया है। सूरत को क़रीब 400 वर्ष पहले से ही कारोबारियों की नगरी माना जाता रहा है। जरी के कारोबार से शुरुआत कर सूरत ने टेक्सटाइल कारोबार में भी अपना नाम दुनिया भर में बना लिया है। आज सूरत में क़रीब 7.5 लाख लूम्स और क़रीब 450 टेक्सटाइल प्रोसेसिंग हाउस हैं। इसके अलावा 70000 एम्ब्रॉयडरी की यूनिट हैं। हीरे के कारोबार में सूरत में छोटी-बड़ी क़रीब 90000 डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग यूनिट हैं। इन दोनों इंडस्ट्रीज में बड़ी तादाद में लोगों को रोजगार मिल रहा है, जिसमें सूरत के बाहर से आकर बसे लोगों की संख्या अधिक है। आज दुनिया भर के पॉलिश किये गए हीरे में 80 फीसदी सूरत में तैयार होते हैं। डायमंड और टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के अलावा सूरत के हजीरा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में दिग्गज कंपनियाँ, जैसे- 'ओएनजीसी', 'रिलायंस इंडस्ट्रीज', 'एस्सार' और 'शेल' भी हैं। इस वजह से यहाँ के कारोबारियों की एक बड़ी माँग है- हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की। दूसरी सुविधाओं की बात करें तो सूरत देश के सबसे साफ-सुथरे शहरों में एक है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर का अहम हिस्सा सूरत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले शहरों में चौथे नंबर पर है।[1]

हीरा उद्योग

सूरत का हीरा कारोबार मशहूर तो है ही, अब ये उच्चस्तरीय व्यवस्थाओं सहित हाईटेक भी होता जा रहा है। मज़दूरों की कमी से निपटने के लिए यहाँ के हीरा कारोबारियों ने आधुनिक मशीनें लगवा दी हैं। यही नहीं, सूरत के नजदीकी गाँव के लोगों को हीरे की तराशने व उसकी पॉलिशिंग की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। सूरत में हीरे का कारोबार शुरू हुए क़रीब 50 वर्ष ही हुए हैं, लेकिन आज ये शहर हीरे को तराशने और पॉलिशिंग में दुनिया में अव्वल बन चुका है। दुनिया भर में पहने जाने वाले हर 100 हीरों में से 80 की कटिंग और पॉलिशिंग सूरत में होती है। हीरे की क़रीब एक लाख छोटी यूनिट सूरत में हैं, जबकि ऐसी क़रीब 300 बड़ी यूनिट हैं, जो एक्सपोर्ट भी करती हैं। अपने कारोबार को और बढ़ावा देने के लिए सूरत के हीरा कारोबारी आधुनिक तकनीक भी अपना रहे हैं। सूरत का हीरा उद्योग एकदम उच्चस्तर का हो गया है। जिस हीरे की कटिंग पहले हाथ से होती थी, अब वही कार्य लेजर मशीन से हो रहा है।

सूरत के उद्योगकार चाहते हैं कि उनके कर्मचारी भी हाईटेक हों, इसके लिए उन्होंने गुजरात की सरकार को अनुरोध किया है कि वह हीरे की कटिंग, पॉलिशिंग और मार्केटिंग के डिप्लोमा कोर्स शुरू करे। सूरत के हीरा कारोबारियों ने सूरत के आस-पास के 50 किलोमीटर इलाके में बसे गाँव के लोगों को ट्रेनिंग देने का काम शुरू कर दिया है। इसकी वजह ये भी है कि केंद्र सरकार की 'नरेगा योजना' की वजह से इन्हें हीरे की कटिंग-पॉलिशिंग का काम करने वाले कारीगरों की कमी भी एक वर्ष तक झेलनी पड़ी थी। सूरत के हीरा उद्योग में आज इस उद्योग के जरिए दस लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। यहाँ का हीरा दुनिया भर के देशों में निर्यात किया जाता है। वर्ष 2010-2011 में भारत से 1,28,000 करोड़ रुपये के पॉलिश्ड हीरे निर्यात किए गए थे, जबकि 2011-2012 में ये निर्यात क़रीब 1,11,000 करोड़ रुपये का रहा था। इसका अधिकांश हिस्सा सूरत का ही है, और इसी वजह से 'सूरत डायमंड सिटी' कहलाने लगा है।[2]

हजीरा औद्योगिक क्षेत्र

शायर हॉल, सूरत
श्री राम चौक, सूरत

सूरत को 'फ़्यूचर सिटी' बनाने में यहाँ की डायमंड और टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के अलावा एक और चीज ने अहम भूमिका निभाई है, जो है- 'हजीरा औद्योगिक क्षेत्र'। सूरत से क़रीब 25 किलोमीटर दूर हजीरा एक अहम बंदरगाह भी है और इस इलाके में देश की कई बड़ी कंपनियों के प्लांट हैं। आज यह माना जाता है कि आने वाले दिनों में हजीरा और तेजी से विकसित होने जा रहा है। देश के बड़े बंदरगाहों में एक हजीरा सूरत मेट्रोपॉलिटन रीजन की सबसे बड़ी खूबी है। सूरत से 25 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र किनारे बसे हजीरा में भारत की कई बड़ी और नामी कंपनियाँ हैं, जिनमें 'रिलायंस इंडस्ट्रीज', 'एलएंडटी', 'ओएनजीसी', 'गेल', 'अदानी', 'एस्सार ग्रुप', 'कृभको', 'शेल' और 'जीएसपीसी' शामिल हैं। पिछले 25 वर्षों में इस इलाके ने दिन-दूनी-रात चौगुनी तरक़्क़ी की है। हजीरा बंदरगाह नजदीक होने का बड़ा फायदा सूरत को मिला है, क्योंकि इसी वजह से दिग्गज कंपनियों ने अपने प्लांट यहाँ लगाए हैं।

इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 2 लाख से भी अधिक है और बड़ी संख्या में ये कर्मचारी अपने परिवार के साथ हजीरा में ही बसे हैं। इस वजह से अब सूरत और हजीरा के सम्पर्क को बेहतर करने की मांग हो रही है। हजीरा का एक और फायदा सूरत को मिल रहा है, स्किल डेवलपमेंट के तौर पर, क्योंकि यहाँ के बड़े उद्योगपति सूरत के डायमंड और टेक्सटाइल के कारीगरों को प्रोडक्ट क्वालिटी बेहतर करने की ट्रेनिंग देते हैं। हजीरा को प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई के डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव है। यही नहीं, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत हजीरा इंडस्ट्रियल एरिया के बड़े पैमाने पर विकास की भी योजना है। इन्हें भी देखें: हजीरा एवं हजीरा संयंत्र

यातायात और परिवहन

पूरे भारत में आज अपनी एक ख़ास पहचान बना चुका सूरत शहर सड़कमार्ग, रेलमार्ग और हवाई मार्गों से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ पहुँचना अब अधिक कठिन कार्य नहीं है। इस शहर में भी यातायात के सभी साधन उपलब्ध हैं, जैसे- बस, ऑटो, टैक्सी आदि।

कृषि और खनिज

सूरत के आस-पास के इलाके में कृषि होती है। कपास, बाजरा, दलहन और चावल यहाँ की मुख्य पैदावार हैं। वस्त्रोद्योग सूरत शहर में ही केंद्रित है। 1990 में गन्ना, अंगूर और केले जैसे नकदी फ़सलों की कृषि की शुरुआत यहाँ की गई थी। ज़िले में औसत वार्षिक वर्षा 1,071 मिमी है।

उद्योग और व्यापार

पुर्तग़ालियों द्वारा वर्ष 1512 एवं 1530 ई. सूरत को जला दिए जाने के बाद यह एक बड़ा विक्रय केंद्र बना, जहाँ से कपड़े और सोने का निर्यात होता था। वस्त्रोद्योग और जहाज़ निर्माण यहाँ के मुख्य उद्योग थे। अंग्रेज़ों ने 1612 में पहली बार अपनी व्यापारिक चौकी यहीं पर स्थापित की थी। यहाँ के सूती, रेशमी, किमख़ाब (जरीदार कपड़ा) के वस्त्र तथा सोनेचाँदी की वस्तुएँ प्रसिद्ध हैं। सूरत के हीरे पर पॉलिश के उद्योग ने प्रवासी मज़दूरों कों अपनी और बड़ी संख्या में आकर्षित किया है।

जनसंख्या

19वीं शताब्दी के मध्य में सूरत एक गतिहीन नगर था, जिसकी आबादी 80,000 थी, लेकिन भारतीय रेलवे की शुरुआत के साथ सूरत फिर से समृद्ध होने लगा। 2001 की जनगणना के अनुसार नगर की जनसंख्या 24,33,787 है। सूरत ज़िले की कुल जनसंख्या 49,96,391 है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कारोबारियों की नगरी, सूरत (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 मई, 2013।
  2. डायमंड सिटी सूरत है फ्यूचर सिटी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 मई, 2013।

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