सूरीनामी हिन्दी  

  • सूरनाम दक्षिणी अमेरिका का एक छोटा सा देश है।
  • यहाँ चार लाख लोग रहते हैं जिनमें डेढ़ लाख भारतवंशी हैं।
  • ये प्राय: सभी हिन्दी - भाषी हैं। यों यहाँ डच, रेड इंडियन, नीग्रो, पुर्तग़ाल, जापानी भी रहते हैं।
  • यहाँ की राजभाषा या राष्ट्रभाषा 'डच' है।
  • यहाँ के अधिकांश भारतवंशी भोजपुर प्रदेश के हैं, जिनके पूर्वज 1873 में वहाँ गए थे; इस तरह यहाँ की मूल हिन्दी भोजपुरी थी किंतु अब मानक हिन्दी पहुँच गई है। साथ ही डच आदि भाषाओं का भी प्रभाव है।
  • डच के कुछ शब्द यहाँ खूब चलते हैं। जैसे - फोरजाल बैठक[1], दोदूफी [2], वोसरोको [3] आदि। यहाँ कुछ हिन्दी शब्दों में अजीब अर्थ विकसित हो गए हैं। जैसे - 'खूंटा उस डंडे को तो कहते ही हैं जिसमें गाय बाँधते हैं, 'गायघर' को भी 'खूंटा' कहते हैं।'
  • सूरीनाम में इधर कई हिन्दी संस्थाएँ बन गई हैं। जैसे - 'सूरनामी हिन्दी परिषद' , 'जयप्रकाश हिन्दी संस्थान' , 'सुमन हिन्दी पाठशाला' आदि।
  • यहाँ से कई हिन्दी पत्रिकाओं का भी प्रकाशन होता रहा है, जैसे 'सरस्वती', आर्य दिवाकर' आदि।
  • यहाँ के मुख्य हिन्दी कवि और लेखक रहमान खाँ, गुरुदत्त कलासिंह तथा सूर्यप्रसाद वीरे आदि हैं। नारायण आचार्य ने सूरनाम में हिन्दी पढ़ने- पढाने के लिए डच के माध्यम से हिन्दी पाठ लिखे हैं तथा डच- हिन्दी और हिन्दी- डच शब्दकोश भी बनाया है।
  • इसके पूर्व ज्ञान हंस अधीन का भी 'हिन्दी- डच कोश' छापा था।
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शोध

टीका टिप्पणी

  1. बैठक
  2. कबूतर
  3. बनियान

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