हजीरा संयंत्र  

हजीरा संयंत्र गुजरात में सूरत से 15 कि.मी. दूर ताप्ती नदी के किनारे सूरत हजीरा स्‍टेट हाईवे पर हजीरा में स्थित है। इस संयंत्र की स्थापना उर्वरक, अमोनिया तथा जैव उर्वरकों के उत्‍पादन करने के लिए की गई थी। भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय श्रीमती इन्दिरा गांधी ने 5 फ़रवरी, 1982 को इस संयंत्र की आधारशिला रखी थी। हजीरा उर्वरक संयंत्र में अमोनिया की दो स्‍ट्रीम और यूरिया की चार स्‍ट्रीम हैं। यूरिया की पुनर्मूल्‍याँकिंत वार्षिक उत्‍पादन क्षमता 1.729 मिलियन मी.टन और अमोनिया की पुनर्मूल्‍याँकिंत वार्षिक उत्‍पादन क्षमता 1.003 मिलियन मी.टन है। इस परियोजना पर 957 करोड़ रुपय की अनुमानित लागत की तुलना में 890 करोड़ रुपया की लागत आई थी और इस प्रकार परियोजना पूंजी लागत में 67 करोड़ रुपया की बचत हुई थी।

स्थापना

हजीरा स्‍थित भारी पानी संयंत्र, जिसे हजीरा अमोनिया विस्‍तार के रूप में भी जाना जाता है, में अमोनिया-हाइड्रोजन विनिमय एकल तापीय प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है। यह संयंत्र सूरत शहर से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्‍थित है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने 5 फ़रवरी, 1982 को इस संयंत्र की नींव रखी थी। इस संयंत्र ने हजीरा में अगस्त, 1986 में कार्य शुरू किया तथा यह संयंत्र जनवरी, 1991 में कमीशन किया गया।[1]

कार्य प्रणाली

इस संयंत्र में दो पृथक् आइसोटोपिक विनिमय इकाइयों से बनी हुई दो स्‍ट्रीमों, अंतिम संवर्धन इकाइयाँ, अंतिम उत्‍पादन इकाइयाँ एवं भंजन<ref(क्रेक)</ref> इकाइयों के साथ एक अमोनिया संश्‍लेषण की साझा इकाई सम्मिलित है। भरण संश्‍लेषण गैस, जो एक भाग नाइट्रोजन तथा अमोनिया संयंत्र से प्राप्‍त ड्यूटेरियम युक्‍त हाइड्रोजन के तीन भाग का मिश्रण है, को लगभग 181-220 कि.ग्रा/वर्ग से.मी.2 के दाब पर लगभग 96 टी/एचआर. की प्रवाह दर पर संयंत्र में पहुँचाया जाता है। गैस के दाब को बूस्‍टर द्वारा 40 कि.ग्रा/वर्ग से.मी.2 तक प्रथमत: बढ़ाया जाता है और संयंत्र में दाब में आने वाली गिरावट पर निगाह रखी जाती है। तब इसे संयंत्र से लौटाई गई बहिर्गमन ठंडी गैस द्वारा ऊष्‍मा विनिमायक में ठंड़ा किया जाता है।

इसके पश्‍चात् यह गैस शुद्धिकरण इकाई में से गुजारी जाती है। इस इकाई में गैस में स्‍थित ऑक्सीजन जनित अशुद्धियों को दूर किया जाता है तथा गैस को अमोनिया के साथ संतृप्‍त किया जाता है। अमोनिया के साथ संतृप्‍त शुद्ध संश्‍लेषण गैस को तब –250 सेंटीग्रेट पर चलने वाले पहले आइसोटोपिक विनिमय टावर से गुजारा जाता है, जहाँ गैस में स्‍थित डयूटेरियम का पोटेशियम एमाइड उत्‍प्रेरक युक्‍त द्रव अमोनिया, जिसे टॉवर के ऊपर से डाला जाता है, के प्रति प्रवाह स्‍ट्रीम में स्‍थानांतरण हो जाता है। विनिमय टावर की तलहटी से प्राप्‍त डयूटेरियम संवर्धित अमोनियो को तब दूसरे आइसोटोपिक विनिमय टावर में भरा जाता है, जहाँ इसे संवर्धित अमोनिया के भंजन से प्राप्‍त संवर्धित संश्‍लेषण गैसों के साथ संपर्क कराते हुए आगे संवर्धित किया जाता है। संवर्धित गैस तथा दूसरे आइसोटोपिक विनिमय टावर से प्राप्‍त द्रव के एक भाग को तब अंतिम संवर्धन खंड में ले जाया जाता है, जहाँ अमोनिया में ड्यूटेरियम की सांद्रता को आगे 99.8 प्रतिशत तक के वांछनीय स्‍तर तक बढ़ाया जाता है। अंत में इस प्रकार प्राप्‍त संवर्धित अमोनिया में से उत्‍प्रेरक को मुक्‍त किया जाता है और इसका भंजन किया जाता है। इस संवर्धित संश्‍लेषण गैस के एक हिस्‍से को भारी पानी के उत्‍पादन हेतु शुष्‍क हवा में जलाया जाता है। तथापि बेहतर पुन:प्राप्‍ति दक्षता के कारण, अंतिम संवर्धन खंड में अमोनिया में ड्यूटेरियम की सांद्रता को कम रखा जाता है, जिससे कि लगभग 60 प्रतिशत भारी पानी का उत्‍पादन हो जाए। इसके पश्‍चात तब इसका निर्वात आसवन किया जाता है, ताकि नाभिकीय ग्रेड के भारी पानी का उत्‍पादन किया जा सके।[1]

प्रथम विनिमय टावर से प्राप्‍त ड्यूटेरियम अवक्षयित ठंडी संश्‍लेषण गैस को अमोनिया संयंत्र में लौटाए जाने से पहले, इसे आ रही भरण गैस के साथ गर्म किया जाता है तथा इसे अमोनिया संश्‍लेषण इकाई में से गुजारा जाता है। इस इकाई में, संश्‍लेषण गैस के एक भाग जो भंजकों में भंजित अमोनिया की मात्रा के समतुल्‍य है, को द्रव अमोनिया में परिवर्तित किया जाता है तथा इसे पहले विनिमय टावर के ऊपर से डाला जाता है। शेष अवक्षयित संश्‍लेषण गैस जो आपूर्ति की गई भरण गैस के समतुल्‍य है, को अमोनिया संयंत्र में लौटाया जाता है। इस संयंत्र को विद्युत गुजरात राज्‍य विद्युत बोर्ड के 66 के.वी. ग्रिड द्वारा उपलब्‍ध कराई जाती है। संयंत्र के भंजकों को गर्म करने के लिए प्रयुक्‍त ईधन प्राकृतिक गैस है, जिसकी आपूर्ति गैल द्वारा की जाती है।

प्रमुख विशेषताएँ

हजीरा संयंत्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यह संयंत्र भारत का ऐसा दूसरा भारी पानी संयंत्र है, जो अमोनिया-हाइड्रोजन विनिमय प्रक्रिया पर आधारित है तथा जिसे बिना किसी विदेशी सहयोग के स्‍थापित किया गया है।
  2. आइसोटोपिक विनिमय इकाई का मूल डिज़ाइन स्‍वनिर्मित किया गया था।
  3. इस संयंत्र में परम्‍परागत न्‍यूमैटिक एनलॉग प्रणाली की बजाए उपकरणीय एवं प्रक्रिया नियंत्रण हेतु माइक्रो-प्रोसेसर पर आधारित वितरित अंकीय नियंत्रण प्रणाली के उपयोग की नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाया हुआ है। यह प्रणाली क्षेत्र नियंत्रण केंद्रों हेतु पर्यवेक्षण एवं मानीटरन संबंधित कार्य आवश्‍यकताओं को उपलब्‍ध कराता है।
  4. यह संयंत्र प्रणाली से प्राप्‍त आंकडें का प्रदर्शन एवं उनका रिकार्ड करता है तथा इसमें डाटा लाग करने एवं अलार्म संदेशों को प्रिंट करने की सुविधा है।
  5. इस संयंत्र में दो स्‍ट्रीम होती हैं, जिनमें कुछ सांझा इकाइयाँ, जैसे- संश्‍लेषण इकाई, उप-केंद्र, निष्‍क्रिय गैस इकाई, उपकरणीय वायु इकाई, उत्‍प्रेरक निर्माण इकाई, शीतलक टावर आदि सम्‍मिलित है।
  6. यह परियोजना बिना अतिरिक्‍त समय लिए सफलतापूर्वक ढंग से पूरी की जा चुकी है।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 भारी पानी संयंत्र हजीरा (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 13 मई, 2013।

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