द्यूतविशेष कला  

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जयमंगल के मतानुसार चौंसठ कलाओं में से यह एक कला है। द्यूत (जूआ) आदि अनेक क्रीड़ाओं से लोगों का मनोरंजन करना 'कला' है। प्राचीन काल में द्यूत के अनेक प्रकारों के प्रचलित होने का पता लगता है। उन सबमें अक्षक्रीड़ा (चौपड़ा) विशेष प्रसिद्ध थी। नल, युधिष्ठिर, शकुनि आदि इस कला में निपुण थे।

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