उच्चाटन  

उच्चाटन तांत्रिक क्रियाओं का एक प्रकार का मंत्र प्रयोग है। इसका प्रयोग भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी आदि के निवारण या नियंत्रण हेतु किया जाता है। इस मंत्र के अनेक प्रकार बतलाये गए हैं।

  • विश्वास किया जाता है कि प्रेत या डाकिनी के उत्पात या कुदृष्टि से अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। 'उच्चाटन' से रोगों का शमन और दु:ख का निवारण हो सकता है। यह विश्वास अत्यंत प्राचीन और सार्वभौम है।
  • विज्ञान के प्रसार के साथ-साथ उच्चाटन का प्रयोग कम भले ही हुआ है, किंतु कितने ही देशों में यह अब भी प्रचलित है।
  • दूसरे के मन को अन्यत्र लगा देना, उसे अन्यमनस्क कर देना भी उच्चाटन की एक क्रिया मानी जाती है।
  • उच्चाटन की विविध क्रियाएँ हैं, जिनका प्रयोग बिना मंत्र के और मंत्र के साथ भी किया जाता है।
  • विधिपूर्वक उच्चाटन का प्रयोग करना अनेक लोगों का व्यवसाय है। ये लोग दावा करते हैं कि मंत्र के द्वारा भूत, प्रेत और पिशाच भगाए जा सकते हैं और डाकिनी को नियंत्रित तथा निष्क्रिय किया जा सकता है।[1]

इन्हें भी देखें: तंत्र, डाकन प्रथा एवं चौंसठ कलाएँ


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. उच्चाटन (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 02 फ़रवरी, 2014।

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