कस्तूरी  

कस्तूरी एक सुगन्धित पदार्थ है, जो एक विशेष जाति के मृग की नाभि से निकलता है। कई हिन्दू रीति-रिवाजों में इसका प्रयोग किया जाता है। इस पदार्थ को प्राचीन काल से ही इत्र के लिए एक लोकप्रिय रासायनिक पदार्थ के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है और यह दुनिया भर के सबसे महंगे पशु उत्पादों में से एक है।

  • भारत में प्राचीन काल से ही मस्तक पर तिलक लगाने की परम्परा है। तिलक चन्दन, 'कस्तूरी', रोली आदि कई पदार्थों से किया जाता है।
  • भगवान श्रीकृष्ण की प्रशंसा करते हुए गोपियों ने निम्न श्लोक में कस्तूरी का भी नाम लिया है-

कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्ष: स्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु: करे कंकणं॥

अर्थात- "हे श्रीकृष्ण! आपके मस्तक पर कस्तूरी तिलक सुशोभित है। आपके वक्ष पर देदीप्यमान कौस्तुभ मणि विराजित है, आपने नाक में सुंदर मोती पहना हुआ है, आपके हाथ में बाँसुरी है और कलाई में आपने कंगन धारण किया हुआ है।"[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. गोपी गीत (हिन्दी) ब्रजप्रार्थना। अभिगमन तिथि: 10 मार्च, 2016।

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